
केरल में क्या नहीं बनी कांग्रेस की बात? लेफ्ट ने सभी सीटों पर तय कर लिए उम्मीदवार
AajTak
इंडिया गठबंधन के लिए उत्तर भारत से राहत भरी खबर आई तो वहीं दक्षिण भारत के केरल में कांग्रेस-लेफ्ट के गठबंधन पर ग्रहण लगता नजर आ रहा है. लेफ्ट ने सभी 20 सीटों पर उम्मीदवारों के नाम तय कर लिए हैं. लेफ्ट पार्टियां 26 फरवरी को राष्ट्रीय नेताओं के साथ चर्चा के बाद नामों का ऐलान कर सकती हैं.
लोकसभा चुनाव से पहले विपक्षी इंडिया गठबंधन के लिए उत्तर भारत से राहत भरी खबर आई. कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (सपा) के बीच 17 सीटों पर बात बन गई है. दोनों दलों की साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस में गठबंधन का ऐलान भी हो गया लेकिन दक्षिण भारत के केरल में गठबंधन का गणित बिगड़ता दिख रहा है. अब तक पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के साथ गठबंधन की संभावनाओं को खारिज करती आई लेफ्ट पार्टियां केरल में भी एकला चलने के मूड में नजर आ रही हैं. लेफ्ट केरल की सभी लोकसभा सीटों पर उम्मीदवारों का ऐलान कर सकता है.
जानकारी के मुताबिक सीपीएम ने लोकसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों के नाम करीब-करीब फाइनल भी कर लिए हैं. पार्टी इन नामों का ऐलान करने से पहले 26 फरवरी को राष्ट्रीय नेताओं के साथ होने वाली बैठक का इंतजार कर रही है. लेफ्ट सूत्रों की मानें तो पार्टी इस बार सूबे की सरकार के कई मंत्रियों को भी लोकसभा चुनाव में उम्मीदवार बनाने के मूड में है. पूर्व स्वास्थ्य मंत्री केके शैलजा, कैबिनेट मंत्री के राधाकृष्णन के साथ ही पूर्व वित्त मंत्री थॉमस इसाक का लोकसभा चुनाव लड़ना भी करीब-करीब तय बताया जा रहा है.
यह भी पढ़ें: कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच डील पर मुहर, इनसाइड स्टोरी सुनिए
बताया जाता है कि सीपीएम के राज्य मुख्यालय में बुधवार की सुबह हुई बैठक में उम्मीदवारों के नाम तय किए गए. लोकसभा चुनाव के लिए जिन उम्मीदवारों के नाम पर सहमति बनी है, उनमें पार्टी की पोलित ब्यूरो के सदस्य पूर्व सांसद ए विजयराघवन का नाम भी शामिल हैं. विजयराघवन पलक्कड़ लोकसभा सीट से चुनाव लड़ते नजर आ सकते हैं. पूर्व सांसद विजयराघवन के साथ ही जिला सचिव एमवी बालाकृष्णन कसरगोड लोकसभा सीट, एमवी जयराजन कन्नूर और वी जॉय अट्टिंगल सीट से चुनाव लड़ते नजर आ सकते हैं.
यह भी पढ़ें: 'वायनाड से राहुल लेफ्ट को स्वीकार नहीं, CPIM ने ललकारा-जहां बीजेपी मजबूत हैं वहां लड़ें
कांग्रेस के बगैर लेफ्ट में ये है सीट शेयरिंग फॉर्मूला

झारखंड के लातेहार जिले के भैंसादोन गांव में ग्रामीणों ने एलएलसी कंपनी के अधिकारियों और कर्मियों को बंधक बना लिया. ग्रामीणों का आरोप था कि कंपनी बिना ग्राम सभा की अनुमति गांव में आकर लोगों को ठगने और जमीन हड़पने की कोशिश कर रही थी. पुलिस के हस्तक्षेप के बाद लगभग दो घंटे में अधिकारी सुरक्षित गांव से बाहर निकल सके.

दिल्ली के सदर बाजार में गोरखीमल धनपत राय की दुकान की रस्सी आज़ादी के बाद से ध्वजारोहण में निरंतर उपयोग की जाती है. प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल के बाद यह रस्सी नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाने लगी. इस रस्सी को सेना पूरी सम्मान के साथ लेने आती है, जो इसकी ऐतिहासिक और भावनात्मक महत्ता को दर्शाता है. सदर बाजार की यह रस्सी भारत के स्वाधीनता संग्राम और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक बनी हुई है. देखिए रिपोर्ट.

संभल में दंगा मामले के बाद सीजेएम के तबादले को लेकर विवाद शुरू हो गया है. पुलिस के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए गए थे लेकिन पुलिस ने कार्रवाई नहीं की. इस पर सीजेएम का अचानक तबादला हुआ और वकील प्रदर्शन कर रहे हैं. समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और AIMIM ने न्यायपालिका पर दबाव बनाने का आरोप लगाया है. इस विवाद में राजनीतिक सियासत भी जुड़ी है. हाई कोर्ट के आदेशानुसार जजों के ट्रांसफर होते हैं लेकिन इस बार बहस हुई कि क्या यहां राज्य सरकार ने हस्तक्षेप किया.

दावोस में भारत वैश्विक आर्थिक चुनौतियों का सामना करने और एक बेहतर भविष्य बनाने के लिए पूरी तैयारी कर रहा है. इस संदर्भ में सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव से खास बातचीत की गई जिसमें उन्होंने बताया कि AI को लेकर भारत की क्या योजना और दृष्टिकोण है. भारत ने तकनीकी विकास तथा नवाचार में तेजी लाई है ताकि वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे रह सके. देखिए.

महाराष्ट्र के स्थानीय निकाय चुनावों के बाद ठाणे जिले के मुंब्रा क्षेत्र में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं. एमआईएम के टिकट पर साढ़े पांच हजार से अधिक वोट के अंतर से जीत हासिल करने वाली सहर शेख एक बयान की वजह से चर्चा में हैं. जैसे ही उनका बयान विवादास्पद हुआ, उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका बयान धार्मिक राजनीति से जुड़ा नहीं था. सहर शेख ने यह भी कहा कि उनके बयान को गलत तरीके से प्रस्तुत किया जा रहा है और वे उस तरह की राजनीति का समर्थन नहीं करतीं.








