
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने गिनाईं न्यू एजुकेशन पॉलिसी की बड़ी उपलब्धियां, बताया आगे का प्लान
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केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि नई शिक्षा नीति के तहत सरकार ने कम से कम पांचवीं कक्षा तक मातृभाषा में शिक्षा देने की सिफारिश की है. उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति देश को रटने वाली पारंपरिक व्यवस्था से निकालकर नवाचार, रोजगार और बहुभाषी शिक्षा की दिशा में आगे बढ़ा रही है.
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के क्रियान्वयन के पांच वर्षों को भारत की शिक्षा व्यवस्था में ऐतिहासिक बदलाव का दौर बताया है. उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति ने भारत की शिक्षा व्यवस्था में केवल बदलाव नहीं बल्कि सिविलाइजेशनल पैराडाइम शिफ्ट लाया है, जिससे देश की शिक्षा व्यवस्था को 21वीं सदी की जरूरतों के अनुरूप तैयार किया जा रहा है.
इंडिया टुडे एजुकेशन कॉन्क्लेव 2026 में बोलते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि NEP का मुख्य उद्देश्य मैकाले मॉडल से आगे बढ़कर भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक कौशल आधारित शिक्षा प्रणाली विकसित करना है. स्कूल और उच्च शिक्षा दोनों स्तरों पर व्यापक सुधार किए गए हैं. नई शिक्षा नीति देश को रटने वाली पारंपरिक व्यवस्था से निकालकर इनोवेशन, रोजगार और बहुभाषी शिक्षा की दिशा में आगे बढ़ा रही है. साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आने वाले वर्षों में मातृभाषा आधारित शिक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित शिक्षक प्रशिक्षण और तकनीक से लैस शिक्षा व्यवस्था पर विशेष फोकस रहेगा.
प्रधान ने बताया कि नई शिक्षा नीति का सबसे बड़ा बदलाव स्कूल शिक्षा में आया है. अब शिक्षा व्यवस्था को रटने वाली प्रणाली से हटाकर क्रिटिकल थिंकिंग, इनोवेशन और स्किल डेवलपमेंट पर केंद्रित किया जा रहा है. इसके तहत नई टेक्स्ट बुक और टीचिंग-लर्निंग मटीरियल तैयार किए गए हैं. शुरुआती शिक्षा के लिए ‘बाल वाटिका’ से लेकर कक्षा 8 तक नई पाठ्य सामग्री तैयार हो चुकी है, जबकि कक्षा 9 से 12 तक का पाठ्यक्रम भी अगले एक-दो वर्षों में पूरी तरह लागू कर दिया जाएगा. इसके साथ ही पहली बार खेल, कला और कौशल विकास को औपचारिक शिक्षा का हिस्सा बनाया गया है. उनका कहना है कि इससे छात्रों की बहुआयामी प्रतिभा विकसित होगी और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे.
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि नई शिक्षा नीति के तहत सरकार ने कम से कम पांचवीं कक्षा तक मातृभाषा में शिक्षा देने की सिफारिश की है. उन्होंने बताया कि अगर छात्र अपनी मातृभाषा में पढ़ाई करता है तो उसकी सोचने, समझने और नवाचार करने की क्षमता अधिक विकसित होती है. नीति में यह भी सुझाव दिया गया है कि संभव हो तो आठवीं कक्षा तक मातृभाषा आधारित शिक्षा को बढ़ावा दिया जाए. हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि उच्च शिक्षा स्तर पर भाषा का चयन पूरी तरह छात्र, संस्थान और विश्वविद्यालय की पसंद पर निर्भर करेगा.
उन्होंने कहा कि नई वैश्विक व्यवस्था में बहुभाषी होना छात्रों के लिए बड़ी ताकत बनेगा. उनका कहना था कि जो छात्र कई भाषाओं में दक्ष होगा, उसकी नौकरी और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में स्वीकार्यता ज्यादा होगी. उन्होंने बहुभाषावाद को “नई दुनिया का हथियार” बताया.
तीन भाषा नीति पर तेजी से काम

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