
कार में तीन लाश, हेलमेट और मर्डर की थ्योरी... क्या है दिल्ली के पीरागढ़ी कांड का पूरा सच!
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दिल्ली के पीरागढ़ी फ्लाइओवर के पास एक कार से तीन शव मिलने के बाद सनसनी फैल गई थी. मरने वालों की शिनाख्त रणधीर, शिव नरेश और लक्ष्मी देवी के तौर पर हुई. लेकिन यह मामला जितना सीधा दिख रहा था, उतना है नहीं. हालात बिल्कुल मर्डर जैसे थे. पढ़ें इस वारदात का पूरा सच.
Delhi Car Death Mystery: दिल्ली के पीरागढ़ी फ्लाइओवर के पास रविवार की दोपहर एक सफेद टाटा टिगोर कार खड़ी थी. बाहर से सब सामान्य लग रहा था, लेकिन कार के अंदर का मंजर रोंगटे खड़े कर देने वाला था. दोपहर करीब 3:50 बजे पुलिस को PCR कॉल मिली थी कि कार में बैठे लोग कोई प्रतिक्रिया नहीं दे रहे हैं. राहगीरों को शक होने पर पुलिस को यह कॉल की गई थी. पुलिस मौके पर पहुंची. कार के भीतर देखा तो तीन लोग बेसुध थे. जब कार का दरवाजा खोला गया तो पता कार में मौजूद तीनों लोग मर चुके थे. जिनमें एक महिला थी. अब वारदात के कई घंटे बीत जाने के बाद भी एक सवाल जस का तस है कि आखिर कार के अंदर हुआ क्या था?
कार के अंदर तीन मुर्दा जिस्म दरअसल, जब पुलिस ने मौके पर जाकर उस सफेद कार का दरवाजा खोला, तो उसमें सीटों पर दो पुरुष और एक महिला की लाश थी. ये मंजर देखकर पुलिस भी हैरान थी. पुलिस ने जांच पड़ताल शुरू की. सबसे पहला काम था, मरने वाली की शिनाख्त. जिसे शुरुआती जांच के दौरान पूरा किया गया. मृतकों की पहचान रणधीर (76), शिव नरेश (40) और लक्ष्मी देवी (40) के रूप में हुई. सफेद टाटा टिगोर कार रणधीर की ही थी. हालांकि मरने वाले तीनों लोग अलग-अलग इलाकों के रहने वाले थे. रणधीर और शिव नरेश रणहोला के निवासी थे, जबकि लक्ष्मी देवी जहांगीरपुरी की रहने वाली बताई गई. अब सवाल ये था कि तीनों एक साथ उस जगह पर कैसे और क्यों पहुंचे थे?
रिश्तों की उलझी कड़ी! कार में मुर्दा पाए गए तीनों लोगों के आपसी संबंध ने इस मामले को और पेचीदा बना दिया. शिव नरेश, रणधीर के यहां प्रॉपर्टी का काम देखता था. यानी उन दोनों के बीच मालिक और कर्मचारी का रिश्ता साफ था. रणधीर मालिक था और शिव नरेश उसका कर्मचारी. लेकिन कार में लक्ष्मी देवी की मौजूदगी ने कई नए सवाल खड़े कर दिए. क्या वे तीनों किसी प्रॉपर्टी डील के सिलसिले में मिले थे? या पहले से उनकी कोई योजना थी? पुलिस अब तीनों की कॉल डिटेल और पिछले 24 घंटों की गतिविधियों को खंगाल रही है.
किसी के शरीर पर नहीं मिले जख्म जांच के दौरान पुलिस को तीनों की लाश पर किसी तरह के चोट या संघर्ष के निशान नहीं मिले हैं. कार के अंदर भी लूटपाट या जबरदस्ती के संकेत भी नहीं थे. ऐसे में शुरुआती तौर पर जहर खाने से मौत की आशंका जताई जा रही है. पुलिस इस एंगल से इस मामले को सुसाइड मानकर जांच कर रही है. हालांकि, पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने तक अंतिम नतीजा नहीं निकाला जा सकता.
सुसाइड या साजिश? जहां पुलिस आत्महत्या की आशंका जता रही है, वहीं परिजन हत्या की थ्योरी पर अड़े हैं. शिव नरेश के भाई राम नरेश ने साफ कहा कि यह सुसाइड नहीं, बल्कि सुनियोजित हत्या का मामला है. उनका दावा है कि शिव नरेश को फोन कर बुलाया गया था. उसका हेलमेट भी कार में मिला, जो इस बात का संकेत देता है कि वह सामान्य तरीके से वहां पहुंचे थे.
हेलमेट बना बड़ा सुराग कार में मिला हेलमेट इस केस की अहम कड़ी बन गया है. अगर तीनों ने आत्महत्या की, तो क्या वे पहले से योजना बनाकर आए थे? या किसी ने उन्हें बहाने से बुलाया? परिजनों का कहना है कि प्रॉपर्टी के लेन-देन को लेकर विवाद हो सकता है. ऐसे में पुलिस के सामने यह चुनौती है कि क्या यह सामूहिक आत्महत्या है या कोई खूनी साजिश?

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