
कांग्रेस से तल्खी के बाद क्या 'सरेंडर मोड' में आ गए अखिलेश? महज कुछ घंटे में यूं बदले सपा सुप्रीमो के तेवर
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हरदोई में अखिलेश यादव ने कहा कि कांग्रेस के सबसे बड़े नेता से उनकी बात हुई है. अगर वो कुछ बात कह रहे हैं तो मैं मानूंगा. साथ ही कहा कि अगर हमारी पार्टी का कोई नेता गलत ट्वीट करे या गलत भाषा का इस्तेमाल करे तो मैं उसे रोकूंगा.
समाजवादी पार्टी और INDIA गठबंधन की अहम पार्टी कांग्रेस के बीच पिछले कुछ समय से सब कुछ सामान्य नहीं चल रहा. चुनावी राज्य मध्य प्रदेश में सीटों के बंटवारे से लेकर अखिलेश यादव कांग्रेस पर जमकर बरस रहे हैं. चुनावी सरगर्मी के बीच बढ़ी तल्खियों का स्तर इतना बढ़ गया कि उन्होंने कांग्रेस नेताओं के लिए चिरकुट जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर दिया. इसके बाद यूपी कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने कहा कि जो व्यक्ति अपने पिता का सम्मान नहीं कर सका, वह हम जैसे लोगों का क्या सम्मान करेगा? इस पर आज अखिलेश ने पलटवार किया औऱ कहा कि कुछ लोग बुजुर्ग होते हैं, उनके संस्कार गलत होते हैं. कभी किसी के पिता और मां-बहन के बारे में बात नहीं करनी चाहिए. लेकिन चंद घंटों में अखिलेश के तेवर बदल गए. दरअसल, सपा नेता IP सिंह ने राहुल गांधी पर आपत्तिजनक टिप्पणी की, तो अखिलेश यादव ने दखल देते हुए आईपी सिंह का ट्वीट डिलीट करवा दिया है. सूत्रों की मानें तो अखिलेख से कांग्रेस के बड़े नेता ने संपर्क किया और INDIA गठबंधन को बचाने के संबंध में चर्चा की. बताया जा रहा है कि कांग्रेस के स्थानीय नेताओं ने एक दिन पहले ही आलाकमान को इस घटनाक्रम की जानकारी दी थी. इसके बाद कांग्रेस के बड़े नेता ने अखिलेश यादव से संपर्क किया. इस बातचीत के बाद अखिलेश यादव कूल दिख रहे हैं.
हरदोई में अखिलेश यादव ने कहा कि कांग्रेस के सबसे बड़े नेता से उनकी बात हुई है. अगर वो कुछ बात कह रहे हैं तो मैं मानूंगा. साथ ही कहा कि अगर हमारी पार्टी का कोई नेता गलत ट्वीट करे या गलत भाषा का इस्तेमाल करे तो मैं उसे रोकूंगा. किसी भी पार्टी के बड़े नेता के बारे में ऐसी टिप्पणी न करें. क्योंकि ये समाजवादी पार्टी की परंपरा नहीं है. हालांकि उन्होंने ये भी कहा कि कांग्रेस अगर ये कह दे कि हमें सपा के साथ गठबंधन नहीं करना तो हम अपनी तैयारी करेंगे.
सपा-कांग्रेस के बीच कैसे बिगड़ी बात?
सपा और कांग्रेस के बीच INDIA गठबंधन और बैठकों के समय सबकुछ ठीक चल रहा था, लेकिन जैसे ही मध्य प्रदेश में सीट शेयरिंग की बात आई तो बात बिगड़ने लगी. दरअसल, एमपी में समाजवादी पार्टी ने अपने 22 कैंडिडेटों के नाम का ऐलान किया था, इससे कांग्रेस बिफर गई औऱ कहा कि अगर सपा इतनी सीटों पर चुनाव लड़ेगी तो सीधे-सीधे बीजेपी को इससे फायदा होगा. जब ये बात राजनीतिक गलियारों में फैली तो अखिलेश यादव ने कहा कि अगर हमें पता होता कि विधानसभा स्तर पर गठबंधन नहीं है तो ना हम मीटिंग में जाते और ना ही कांग्रेस नेताओं के फोन उठाते. कांग्रेस की इस तल्खी को लेकर अखिलेश ने कहा था कि रात 1 बजे तक कांग्रेस नेताओं ने सपा नेताओं को बैठाकर रखा और बातचीत की. आश्वासन दिया कि कांग्रेस सपा के लिए 6 सीटों पर विचार करेगी. लेकिन जब लिस्ट आई तो उसमें सपा के एक भी उम्मीदवार को जगह नहीं दी गई.
कांग्रेस पर भड़के सपा प्रमुख
अखिलेश ने कहा था कि कांग्रेस को दूसरे दलों को साथ लेने में क्या परेशानी है. मुझे वो दिन याद है जब कांग्रेस को अपनी सरकार बनानी थी तो सुबह से लेकर शाम तक वह हमारे विधायक को ढूंढ रहे थे कि इकलौते विधायक का अगर समर्थन मिल जाएगा तो गवर्नर हमें सरकार बनाने के लिए बुला लेंगे. उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी वह पहले पार्टी थी, जिसने पहले चिट्ठी दी, जिसका परिणाम ये हुआ कि मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी. अखिलेश ने कांग्रेस को लेकर कहा था कि I.N.D.I.A. के भरोसे में MP में अपने नेताओं को निराश नहीं कर सकता. सपा अब भाजपा को हराने के लिए तैयार है. निर्णय कांग्रेस को लेना है.

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