
कांग्रेस ने सदन में उठाया NCERT से संविधान की प्रस्तावना हटाने का मुद्दा, शिक्षा मंत्री ने दिया ये जवाब
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राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने NCERT की किताबों से संविधान की प्रस्तावना हटाए जाने का मुद्दा उठाया. इस दौरान सदन में हंगामा भी हुआ. विपक्ष के नेता ने कहा कि संविधान की प्रस्तावना समानता, न्याय को दर्शाता है.
राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने NCERT की किताबों से संविधान की प्रस्तावना हटाए जाने का मुद्दा उठाया. इस दौरान सदन में हंगामा भी हुआ. विपक्ष के नेता ने कहा कि संविधान की प्रस्तावना समानता, न्याय को दर्शाता है. विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने इसे लेकर सभापति जगदीप धनखड़ से एनसीईआरटी की प्रस्तावना को हटाए जाने का मुद्दा उठाने की अनुमति मांगी थी. सभापति धनखड़ ने कहा कि इसमें लिखा है, हमें ऐसी जानकारी मिली है. इस पर मल्लिकार्जुन खड़गे खड़े हुए और कहा कि किस सोर्स से मिली है, ये मैं भी बताऊंगा. आप भी जानते हैं. इस पर सभापति ने कहा कि हमें नहीं पता, हम नहीं जानते. इस पर खड़गे ने कहा कि आप बहुत कुछ जानते हैं, बहुत हुआ तो कहते हैं कि मेरे चैंबर में आओ. इस पर सभापति धनखड़ ने कहा कि लेकिन आप कभी नहीं आए मेरे चैंबर में. एक काम कीजिए, इस पर चर्चा के लिए आइए मेरे चैंबर में.
खड़गे ने फैसला वापस लेने को कहा इस पर खड़गे ने कहा कि नहीं-नहीं, ये महत्वपूर्ण विषय है. इसके बाद खड़गे ने कहा कि बीजेपी ने पराजय के बाद पहले तो बाबा साहब की प्रतिमा को हटाया, अब बीजेपी और संघ अपनी सांप्रदायिक विचारधारा को थोपने के लिए पाठ्यक्रम में बदलाव किया जिसे देश की जनता स्वीकार नहीं करेगी. इस पर ट्रेजरी बेंच की ओर से हंगामा शुरू हो गया. सभापति जगदीप धनखड़ ने उन्हें टोका. जिस पर विपक्ष के नेता ने कहा कि उनको जवाब देने दीजिए, मैं अपनी बात कहूंगा. खड़गे ने पाठ्यक्रम में बदलाव का निर्णय वापस लेने की मांग की.
क्या बोले सभापति जगदीप धनखड़ सभापति जगदीप धनखड़ ने कहा कि हम सभी संविधान के प्रति समर्पित हैं. बीजेपी अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता सदन जेपी नड्डा ने कहा कि समझता हूं कि कांग्रेस एक जिम्मेदार पार्टी है और जो कहती है, जिम्मेदारीपूर्ण तरीके से कहती होगी. मगर आज मुझे उनकी बुद्धिमत्ता और नीयत पर बहुत बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा हुआ. विपक्ष के नेता ने कहा- ऐसा देखने में आया, ऐसा सुनने में आया है, ऐसा पढ़ने में आया है. विपक्ष के नेता को ये ध्यान रखना चाहिए कि किस सोर्स से आया है. सोर्स अखबार की कतरनें नहीं होती हैं, पुस्तकें होती हैं.
उन्होंने कहा कि मोदी के नेतृत्व में चलने वाली सरकार ने जितना संविधान को आदर देकर चलने का तय किया है, उतना किसी सरकार ने नहीं किया है. संविधान की प्रस्तावना में किसी तरह के छेड़छाड़ का सवाल ही नहीं उठता. संविधान दिवस मनाने के लिए 2014 तक का इंतजार क्यों करना पड़ा. संविधान के ऊपर तो डाका डाला गया 1975 में, 19 बार चुनी हुई सरकारों को गिराया गया. आपकी सरकार ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को दो बार प्रतिबंध लगाने की कोशिश गई, मीसा के तहत लाखो लोगों को जेल में डाला गया. लेकिन संघ उतना ही मजबूत होकर निकला. बीजेपी मां भारती की सेवा के लिए पूरी ताकत से लगी है.
शिक्षा मंत्री ने भी बोला कांग्रेस पर हमला शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि अभी कक्षा सात तक की पुस्तकें आई हैं. अभी जिसका उल्लेख कर रहे थे, उसमें संविधान की प्रस्तावना है. मूलभूत अधिकार, कर्तव्य और राष्ट्रगान भी है. ये भी संविधान की मूल भावना का प्रतिनिधित्व करते हैं. इस पर मल्लिकार्जुन खड़गे ने पढ़कर सुनाना शुरू किया. सभापति ने उन्हें टोकते हुए कहा कि यदि मंत्री गलत बयान देंगे तो ये ब्रीच ऑफ प्रीविलेज है. मंत्री ने कैटेगोरिकल स्टेटमेंट दिया है.

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