
कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा में शामिल हुए महात्मा गांधी के परपोते तुषार गांधी
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कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा सात नवंबर से महाराष्ट्र की सीमा में प्रवेश कर गई थी. यह यात्रा शुक्रवार को सुबह लगभग छह बजे अकोला जिले के बालापुर से दोबारा शुरू हुई और कुछ घंटों का सफर तय कर बुलढाणा जिले के शेगांव पहुंची. शेगांव में ही महात्मा गांधी के परपोते तुषार गांधी इस यात्रा में शामिल हुए.
महात्मा गांधी के परपोते और लोकप्रिय लेखक तुषार गांधी महाराष्ट्र के बुलढाणा में कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा में शामिल हुए. वह शुक्रवार को इस यात्रा में राहुल गांधी के साथ ताल से ताल मिलाते नजर आए. कांग्रेस ने भारत जोड़ो यात्रा में तुषार गांधी की भागीदारी को ऐतिहासिक बताया है.
कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा सात नवंबर से महाराष्ट्र की सीमा में प्रवेश कर गई थी. यह यात्रा शुक्रवार को सुबह लगभग छह बजे अकोला जिले के बालापुर से दोबारा शुरू हुई और कुछ घंटों का सफर तय कर बुलढाणा जिले के शेगांव पहुंची. शेगांव में ही तुषार गांधी इस यात्रा में शामिल हुए.
इससे पहले गुरुवार को तुषार गांधी ने ट्वीट कर बताया था कि वह महाराष्ट्र के बुलढाणा के शेगांव में कांग्रेस जोड़ो यात्रा में शामिल होंगे. उन्होंने बताया था कि शेगांव उनकी जन्मस्थली है.
करगिल हीरो दीपचंद भी भारत जोड़ो यात्रा से जुड़े
करगिल युद्ध के नायक दीपचंद भी कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा में शामिल हुए. हरियाणा के हिसार के रहने वाले दीपचंद को 2019 में करगिल विजय दिवस की 20वीं वर्षगांठ पर सीडीएस जनरल बिपिन रावत ने करगिल युद्ध की उपाधि से नवाजा था. दीपचंद करगिल युद्ध के ऑपरेशन विजय में तोलोलिंग के ऊपर सबसे पहला गोला दागने वाले पहले जवान थे.
ऑपरेशन पराक्रम के दौरान स्टोर अनलोडिंग में बम धमाके से उनका हाथ उड़ गया था. रातभर चले ऑपरेशन में उनकी जिंदगी बचाने के लिए डॉक्टर्स को उनके दोनों पैर काटने पड़े थे. इन सभी बाधाओं को पार करते हुए दीपचंद आज भी सार्वजनिक जीवन में सक्रिय है और आदर्श सैनिक फाउंडेशन के जरिए दिव्यांग सैनिकों के लिए कार्य कर रहे हैं.

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