
कल्ट फिल्मों में निभाए दमदार किरदार, फिर भी अंडररेटेड कलाकार... 'धुरंधर 2' से अर्जुन रामपाल को मिलेगी अल्टिमेट सक्सेस!
AajTak
'धुरंधर' में मेजर इकबाल के रोल में अर्जुन रामपाल का खौफनाक अवतार देखकर जनता का मुंह खुला रह गया था. पहली फिल्म में उनका ये कैरेक्टर बहुत नहीं खुला, पर 'धुरंधर 2' में आग उगलने को तैयार बैठा है. कई सालों से अंडररेटेड माने जा रहे अर्जुन के लिए ये फिल्म एक बड़ा मोड़ साबित हो सकती है.
पिछले साल, नवंबर में ‘धुरंधर’ के पहले ट्रेलर में अर्जुन रामपाल का विलेन अवतार देखकर जनता हक्की-बक्की रह गई थी. बॉलीवुड के सबसे गुड लुकिंग एक्टर्स में गिने जाने वाले अर्जुन, हैंडसम तो मेजर इकबाल के रोल में भी लग रहे थे. लेकिन इंसान की खाल खींचने के लेटेस्ट तरीकों के प्रैक्टिकल करते अर्जुन ने कितने ही लोगों से ‘धुरंधर’ का ट्रेलर बीच में पॉज करवा दिया था.
पहली फिल्म में रहमान डकैत के निपटने और ‘धुरंधर 2’ के ट्रेलर से साफ हो चुका है कि इस बार लोगों की हाड़ कंपाने की जिम्मेदारी मेजर इकबाल के दमदार कंधों पर है. और ‘धुरंधर 2’ का ये किरदार, कई सालों से अंडररेटेड चल रहे अर्जुन रामपाल के लिए वो शिखर बन सकता है, जहां बैठकर लोग नोटिस कर सकते हैं कि वो असल में हमेशा से काफी इम्प्रेसिव रहे हैं.
गुड-लुकिंग मॉडल से एक्टिंग के अर्जुन तक ‘मोक्ष’ (2001) के ‘जान लेवा’ या ‘दिल है तुम्हारा’ (2002) के ‘दिल लगा लिया मैंने तुमसे प्यार करके’ गाने में अपने लुक्स से दिलों पर आरी चलाते अर्जुन रामपाल लोगों को आज भी याद हैं. पर ये कम ही लोग जानते हैं कि ‘मोक्ष’ के लिए अर्जुन का नाम ‘मिस्टर इंडिया’ और ‘बैंडिट क्वीन’ वाले डायरेक्टर शेखर कपूर ने सुझाया था. करियर की शुरुआत में ही क्रिटिक्स के पसंदीदा फिल्ममेकर्स में से एक खालिद मोहम्मद की ‘तहजीब’ के लिए अर्जुन की काफी तारीफ हुई. मगर टिपिकल बॉलीवुड लवर बॉय वाले किरदारों में अर्जुन कुछ खास कमाल नहीं कर पा रहे थे. मॉडल होने के नाते उनका एक्टिंग टैलेंट तो हमेशा से लेंस की नजर में रहा ही. लेकिन शाहरुख खान के साथ दो फिल्मों ने लोगों का फोकस फिर से अर्जुन के एक्टिंग टैलेंट पर खींचा.
‘डॉन’ (2006) में लेजेंड एक्टर प्राण वाले किरदार को दोबारा जिंदा करने और ‘ओम शांति ओम’ (2007) में दूसरे जन्म तक जान के पीछे पड़े रहने वाले रोल में अर्जुन ने कमाल किया. विलेन के रोल में तो उनकी तारीफ ऐसी हुई कि उन्हें फिर नेगेटिव रोल खूब मिलने लगे. ‘रॉक ऑन’ (2008) में अपनी वैल्यूज की वजह से पिछड़े रह गए म्यूजिशियन के रोल में अर्जुन ने ऐसी परफॉर्मेंस दी कि उन्हें नेशनल अवॉर्ड दिया गया. ऋतुपर्णो घोष की आर्टहाउस फिल्म ‘द लास्ट लियर’ और प्रकाश झा की ‘राजनीति’ (2010) से अर्जुन ने क्रिटिक्स को अपनी एक्टिंग की धार खूब चेक करवाई. वही अर्जुन जिन्हें कभी ‘वुडन एक्टर’ कहा गया था, अपने काम से सरप्राइज कर रहे थे.
अर्जुन के फेस और उनके एक्सप्रेशंस को देखकर समझ आता है कि उनका काम असल में कभी खराब नहीं था. थोड़ी खराबी उनकी शुरुआती फिल्मों में थी और कुछ तो 2010s के मेनस्ट्रीम बॉलीवुड में रोल ही थोड़े ओवररिएक्ट करने वाले थे. एक्टर को सूट करने वाला किरदार कैसा कमाल करता है, इसका सबूत है ‘रा वन’ (2011) में अर्जुन का विलेन. अर्जुन को इस रोल में देखकर लोगों की आंखें फटी रह जाती थीं. आज भी उनकी इंटेंसिटी की वजह से ही ये किरदार बॉलीवुड लवर्स में बहुत आइकॉनिक माना जाता है.
सॉलिड डायरेक्टर्स की पसंद, एक्सपेरिमेंट में आगे ‘हीरोइन’ में मधुर भंडारकर, ‘चक्रव्यूह’ और ‘आरक्षण’ में फिर से प्रकाश झा, ‘इनकार’ में सुधीर मिश्रा और ‘द रेपिस्ट’ में अपर्णा सेन के साथ अर्जुन ने दमदार काम किया. ये फिल्में चली नहीं, मगर ये फिल्ममेकर्स ऐसे हैं कि इनके साथ काम करना ही कई एक्टर्स अपनी सबसे बड़ी अचीवमेंट मानते हैं. रॉ एजेंट रुद्र प्रताप सिंह के रोल में अर्जुन की फिल्म ‘डी-डे’ (2013) कौन भूल सकता है! बीते कुछ सालों में ये फिल्म एक कल्ट बन गई है. ‘डैडी’ (2017) बहुत बड़ी हिट या पॉपुलर फिल्म नहीं है. पर अर्जुन ने इसमें गैंगस्टर अरुण गवली का ऐसा किरदार निभाया है कि उनके काम की तारीफ फिल्म देखने वाले जरूर करते हैं.













