
कर्नाटक: पब-क्लब में क्यों नहीं बजाए जाते कन्नड़ गाने, सम्मान के लिए ऑनलाइन कैंपेन
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यह मुद्दा इस साल जनवरी में सामने आया जब लोकप्रिय कन्नड़ रैपर चंदन शेट्टी ने अपने इंस्टाग्राम पेज पर इस मुद्दे को उजागर करते हुए एक वीडियो पोस्ट किया. चंदन शेट्टी ने एक पब का दौरा किया और देखा कि वहां कोई कन्नड़ गाने नहीं बजाए जा रहे हैं.
कर्नाटक के आलोक बाबू नाम के एक व्यक्ति ने यहां क्लब और पब में कन्नड़ गाने बजाने की एक ऑनलाइन याचिका दायर की है. आलोक की इस याचिका को अब तक 81,000 से ज्यादा लोगों का समर्थन मिल चुका है. याचिका में आलोक बाबू का कहना है कि कन्नड़ को क्षेत्रीय भाषा के रूप में राज्य के कई पब और क्लबों में प्रमुखता नहीं दी गई है. यह समस्या बेंगलुरु में ज्यादा है. उनका दावा है कि मुख्य रूप से अंग्रेजी या हिंदी गाने कुछ तमिल/तेलुगु नंबरों के साथ एक बार में प्ले किये जाते हैं. याचिका में अनुरोध करते हुए कहा गया है कि क्लब के माहौल के अनुरूप हर रोज कम से कम 3-4 लोकप्रिय कन्नड़ गाने बजाए जाएं. याचिका में आगे कहा गया है कि ऐसा होने पर क्षेत्रीय प्रतिभा और संगीत को बढ़ावा मिलेगा. हम हर दिन इस मुद्दे पर बात करते हैं, लेकिन हम इसे बदलने की पहल नहीं करते हैं! अब समय आ गया है, हमारी मातृभाषा के लिए आवाज़ उठाने और सम्मानजनक स्थान प्राप्त करने का.
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