
कभी माचो मैन, कभी लवर बॉय… आखिरी सांस तक पर्दे पर जिए धर्मेंद्र, क्यों कहलाए 'ही-मैन'
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बॉलीवुड के ‘ही-मैन’ धर्मेंद्र देओल अब हमारे बीच नहीं रहे. समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, 89 साल की उम्र में उन्होंने अंतिम सांस ली, लेकिन उनकी आवाज, जोश और किरदार हमेशा जिंदा रहेंगे. ‘कुत्ते कमीने… मैं तेरा खून पी जाऊंगा’ जैसे डायलॉग से लेकर शोले, फूल और पत्थर, धरम-वीर जैसी फिल्मों तक- धर्मेंद्र सिर्फ एक अभिनेता नहीं, एक युग थे जिन्होंने पर्दे पर जज्बे और दिल का मेल दिखाया.
'कुत्ते कमीने... मैं तेरा खून पी जाऊंगा...', 'तेरे घर में कैलेंडर है? 97 को गौर से देख ले क्योंकि 98 तू देख नहीं पाएगा...', 'बसंती इन कुत्तों के सामने मत नाचना...', 'इलाका कुत्तों का होता शेर का नहीं...', ऐसे कितने ही डायलॉग हैं जो जहन में आते हैं तो एक ही नाम कौंध जाता है, और वो है- धर्मेंद्र देओल. समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, 89 साल की उम्र में धर्मेंद्र का निधन हो गया है पर यादें आज भी ताजा हैं.
धर्मेंद्र जो एक ऐसी शख्सियत थे, जिनके होने से ही माहौल में जोश भर जाया करता था. वो फिल्मों के एक्शन, कॉमेडी, ड्रामा, लवर बॉय हीरो रहे, बावजूद इसके उन्हें बॉलीवुड के 'ही-मैन' की उपाधि मिली.
नंबर वन की रेस से दूर थे धर्मेंद्र
यह धर्मेंद्र यानी धर्म सिंह देओल की बात है, बॉलीवुड में लंबे समय तक चमकते सितारे की. उन्हें उनका पूरा हक मिला, लेकिन वे कभी नंबर 1 नहीं रहे. वे हमेशा नंबर 2 रहे और उन्हें यह पसंद भी था.
जब राजेंद्र कुमार नंबर 1 थे, धर्मेंद्र नंबर 2 थे. जब राजेश खन्ना नंबर 1 बने, तब भी धर्मेंद्र नंबर 2 थे. और जब अमिताभ बच्चन नंबर 1 हुए, तब भी धर्मेंद्र नंबर 2 ही रहे. एक बार उनसे पूछा गया कि- 'आप नंबर 1 बनने की कोशिश क्यों नहीं करते?' तो धर्मेंद्र ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया- 'हर कोई नंबर 1 बनना चाहता है लेकिन नंबर 2 की जगह सेफ है, और मुझे यह जगह पसंद है.' कितना शानदार जवाब था.
1958 से 2025 तक- बस धर्मेंद्र













