
कभी चीन को रौंद डाला था इस छोटे से देश ने, सड़कों पर ऐसा कत्लेआम मचाया कि रूह कांप जाए
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चीन आज दुनिया की सबसे बड़ी ताकतों में से एक है. लेकिन एक वक्त ऐसा भी था जब चीन कमजोर हुआ करता था. उस पर छोटे से जापान ने कब्जा कर रखा था. उसकी सड़कों पर ऐसी क्रूरता दिखाई थी, जिसके बारे में जानकर किसी की भी रूह कांप जाए. चीन की सड़कों पर जापानी सेना ने 3 लाख से ज्यादा लोगों की हत्या कर दी थी. सैकड़ों-हजारों लोगों को कैदी बनाकर उन पर बायोलॉजिकल और केमिकल हथियारों का ट्रायल किया जाता था.
चीन आज दुनिया की सबसे बड़ी शक्तियों में से एक है. अमेरिका जैसे देश को चीन धमका देता है. अमेरिकी नेता नैंसी पेलोसी की ताइवान यात्रा पर चीन ने अमेरिका को 'आग से न खेलने' की धमकी तक दे डाली थी. आज चीन की सेना में सक्रिय जवानों की संख्या 22 लाख से ज्यादा है. सबसे ज्यादा सक्रिय जवानों की संख्या के मामले में चीन की सेना दुनिया में सबसे बड़ी है.
लेकिन ये चीन कभी इतना कमजोर हुआ करता था कि जापान जैसे छोटे से देश ने उसको बुरी तरह रौंद दिया था. चीन की सड़कों पर कत्लेआम मचा दिया था. चीन और जापान के रिश्ते हमेशा से खटास भरे रहे हैं. शायद यही वजह है कि 2006 में जब जापान के उस समय के डिप्टी पीएम तारो आसो भारत दौरे पर आए थे, तो उन्होंने कहा था, '1500 सालों से भी ज्यादा लंबे इतिहास का ऐसा कोई वाकया नहीं है जब चीन के साथ हमारे रिश्ते ठीक रहे हों.'
आज जब चीन दुनिया की एक बड़ी ताकत बन चुका है. खुलेआम अमेरिका को धमका रहा है. ताइवान को जंग के लिए ललकार रहा है. तब इतिहास का वो दौर याद करना भी जरूरी है, जब छोटे से देश जापान ने चीन में कत्लेआम मचा दिया था.
चीन की राजशाही के घुटने टिका दिए थे
चीन और जापान के बीच पहली लड़ाई 1 अगस्त 1894 से 17 अप्रैल 1895 तक चला था. उस समय जापान और चीन, दोनों ही जगह राजशाही थी. इस लड़ाई की वजह कोरिया बना था. कोरिया, चीन का खास दोस्त था. कोरिया के पास कोयला और आयरन बहुत था. जापान को कोरिया के प्राकृतिक संसाधन चाहिए था.
जापान ने कोरिया से अपने कोयला और आयरन जैसे प्राकृतिक संसाधन मांगे, लेकिन चीन के कारण उसने मना कर दिया. 1884 में जापान ने कोरियाई सरकार के तख्तापलट की कोशिश भी की, जिसे चीन ने नाकाम कर दिया. उस वक्त कोरिया की जमीन पर जापान और चीन के बीच जंग भी हुई. चीन ने कोरिया के किंग को बचा लिया, लेकिन उसने जापान के सैकड़ों सैनिकों को मार दिया. आखिरकार समझौते के बाद ये जंग खत्म हुई.

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