
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी का चांसलर बनकर क्या हासिल करना चाहते हैं पाकिस्तान के पूर्व PM इमरान खान?
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पाकिस्तान के पूर्व पीएम इमरान खान के लिए ये करियर का तीसरा विकल्प हो सकता है. लेकिन ये चुनाव आसान नहीं है. ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में चांसलर पद के लिए उनके खिलाफ टक्कर में हैं ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर और बोरिस जॉनसन. फिर भी अगर इमरान खान जीतते हैं तो क्या वे पाकिस्तान की राजनीति से एग्जिट होना चाहेंगे?
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान ने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के चांसलर पद के लिए अपनी दावेदारी पेश की है. एक साल से ज़्यादा समय से जेल में बंद इमरान अक्टूबर में ऑक्सफोर्ड चुनाव में हिस्सा लेंगे. इमरान और पाकिस्तानी राजनीति के लिए उनके आवेदन का क्या मतलब है? क्या यह सिर्फ दुनिया भर का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश है या पाकिस्तान की शक्तिशाली सेना को इमरान की ओर से दिया जा रहा कुछ संकेत?
जेल में बंद तन्हां इमरान खान इन दिनों जेल की दीवारों को घूरने से कहीं कुछ ज़्यादा कर रहे हैं. उन्होंने ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी के चांसलर बनने के लिए आवेदन किया है. एक साल से जेल में बंद इमरान खान का ऑक्सफ़ोर्ड के टॉप पोस्ट के लिए चुनाव लड़ने का आश्चर्यजनक कदम दुनिया का ध्यान आकर्षित करने का एक प्रयास हो सकता है. इधर उनकी पार्टी उनके जेल जाने के एक साल पूरा होने पर पाकिस्तान में रैलियां आयोजित कर रही है. क्या यह पाकिस्तान की शक्तिशाली सेना के लिए एक संकेत है कि इमरान खान ने पाकिस्तानी राजनीति से नाता तोड़ लिया है और क्रिकेट और राजनीति के बाद अब वे अपने तीसरे करियर में दिलचस्पी रखते हैं.
इमरान के सलाहकार सैयद जुल्फी बुखारी ने बताया है कि उन्होंने अक्टूबर में होने वाले चुनाव में भाग लेने के लिए आवेदन दिया है. उन्होंने ये आवेदन ऐसे समय में किया है जब चांसलर पद के लिए चुनाव और नामांकन ऑनलाइन हो गए हैं.
बता दें कि पूर्व पाकिस्तानी प्रधानमंत्री अगर सफल रहते हैं तो वे पूर्व कंजर्वेटिव मंत्री क्रिस पैटन की जगह लेंगे. पैटन, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के चांसलर हैं, जिन्होंने फरवरी में घोषणा की थी कि वह अपने पद से इस्तीफा दे रहे हैं.
यह भी पढ़ें: कैसे चुना जाता है ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी का चांसलर, जिसका चुनाव लड़ेंगे पाकिस्तान के पूर्व PM इमरान खान
पाकिस्तान की राजनीति में इमरान का सफर "नया पाकिस्तान" के वादे से शुरू हुआ. अब वे जेल में जिंदगी गुजार रहे हैं और उन पर कई आरोप लगे हैं. हालांकि उनके समर्थकों का कहना है कि ये सब एक राजनीतिक साजिश का हिस्सा है.

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