
एक पुलिस कांस्टेबल के आंगन से माफिया डॉन के साम्राज्य तक... जानें, मोस्ट वॉन्टेड शाइस्ता परवीन की पूरी कहानी
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90 के दशक में जब कांस्टेबल मोहम्मद हारुन ने अपने बच्चों के बेहतर मुस्तकबिल का ख्याल रखते हुए एक फैसला लिया था, तब किसी को क्या पता था कि उनका ये कदम ही अब से कोई चार दशक बाद उनकी बड़ी बेटी शाइस्ता को यूपी पुलिस का मोस्ट वॉन्टेड बना देगा. जी हां, वही शाइस्ता परवीन जिसके सिर पर फिलहाल 50 हजार रुपये का इनाम है.
नेक, शरीफ, सभ्य, नरम दिल और काबिल ना जाने कितने मायने हैं शाइस्ता के. पिता पुलिस में थे तो अच्छे-बुरे की तमीज भी थी. पढ़ाई लिखाई का शौक भी था, तो ग्रेजुएशन भी किया. मगर फिर उस पुलिसवाले की बेटी की शादी एक मुजरिम से हो गई. जब वो शादी के बाद मायके से ससुराल पहुंची तब भी वो बिल्कुल अपने नाम जैसी ही थी शाइस्ता. लेकिन फिर धीरे-धीरे वो शाइस्ता कहीं गुम होती गई और सामने आई बेगम.
साल 1985, गांव दामूपुर, इलाहाबाद, यूपी यूपी पुलिस के कांस्टेबल मोहम्मद हारुन बेशक ज्यादा पढे-लिखे नहीं थे. लेकिन उन्हें पढे-लिखे होने के फायदों का जरूर पता था. यही वजह है कि चार बेटियों और दो बेटों का भरा-पूरा परिवार होने के बावजूद उन्होंने कभी अपने बच्चों की पढाई से समझौता नहीं किया. हर बच्चे को स्कूल भेजा और अपनी तरफ से हर किसी को तालीम दिलाने की पूरी कोशिश की. ये पढाई-लिखाई से मोहम्मद हारुन का लगाव ही था कि 1985 में वो अपने पूरे परिवार के साथ अपने गांव दामूपुर से इलाहाबाद के चकिया इलाके में शिफ्ट हो गए. क्योंकि उनके गांव में तब बच्चों का कोई भी अच्छा स्कूल नहीं था.
पिता के फैसले ने बदली जिंदगी चकिया, इलाहाबाद के मुस्लिम बहुल इलाकों में से एक है और वो एक जमाने में चांद बाबा और अतीक अहमद जैसे खूंखार गैंगस्टरों का गढ़ था. लेकिन 90 के दशक में जब मोहम्मद हारुन ने अपने बच्चों के बेहतर मुस्तकबिल का ख्याल रखते हुए ये फैसला लिया, तब किसी को क्या पता था कि उनका ये कदम ही अब से कोई चार दशक बाद उनकी बड़ी बेटी शाइस्ता को यूपी पुलिस का मोस्ट वॉन्टेड बना देगा. जी हां, वही शाइस्ता परवीन जिसके सिर पर फिलहाल 50 हजार रुपये का इनाम है और जिसे लोग यूपी के खूंखार माफिया सरगना अतीक अहमद की बीवी के तौर पर जानते हैं.
साजिश की असली सूत्रधार शाइस्ता... वैसे तो पश्तो भाषा के इस लफ्ज के मायने विनम्रता से हैं. लेकिन इन दिनों अतीक की बीवी शाइस्ता का एक अलग ही चेहरा दुनिया के सामने है. वो चेहरा जिसमें शाइस्तगी नहीं, बल्कि सख्ती है. वो चेहरा जो अपने शौहर के हर गुनाह की राजदार है. वो चेहरा जो अतीक के जेल जाने से लेकर उसके मारे जाने तक उसके जुर्म के काले साम्राज्य की वारिस है और वो चेहरा जो पुलिस की नजर में उमेश पाल के कत्ल की फेसलिटेटर यानी साजिश की असली सूत्रधार है.
सब भाई-बहनों में सबसे बड़ी है शाइस्ता लेकिन एक मामूली पुलिस कांस्टेबल की बेटी से यूपी की मोस्ट वॉन्टेड क्रिमिनल बनने तक शाइस्ता की जिंदगी भी कम उतार-चढाव भरी नहीं है. शाइस्ता कुल छह भाई-बहनों में सबसे बड़ी है. ये उसके पिता की कोशिशों का ही नतीजा है कि एक मामूली से परिवार से आने के बावजूद शाइस्ता ने पहले प्रयागराज में रहते हुए किदवई गर्ल्स इंटर कॉलेज, हिम्मतगंज से प्लस टू तक की पढाई पूरी की और फिर आगे चल कर उसने ग्रेजुएशन भी किया.
पिता को आया शादी का ख्याल शाइस्ता के दोनों भाइयों में से एक शबी अहमद ने अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद एक मदरसे में टीचर के तौर पर अपने करियर की शुरुआत की और कुछ इस तरह धीरे-धीरे सारे भाई बहन अपनी-अपनी जिंदगी में आगे बढ़ने लगे. इस बीच शाइस्ता के पिता मोहम्मद हारुन का नौकरी के सिलसिले में कुछ सालों के लिए प्रयागराज से बाहर भी जाना हुआ, लेकिन बच्चों की पढाई-लिखाई के मद्देनजर उनका परिवार शहर के चकिया में ही रहा. फिर वो वक्त भी आया जब मोहम्मद हारुन को अपनी बड़ी बेटी शाइस्ता की शादी का ख्याल आया.

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