
उस युद्ध की कहानी जिसमें बुरी तरह हारा था चीन... जापान ने सड़कों पर मचा दिया था कत्लेआम
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एक वक्त था जब जापान ने चीन पर कब्जा कर रखा था. उसकी सड़कों पर ऐसा कत्लेआम मचाया था, जिसे सुनकर किसी की भी रूह कांप जाए. चीन की सड़कों पर जापानी सेना ने 3 लाख से ज्यादा लोगों की हत्या कर दी थी. सैकड़ों-हजारों लोगों को कैदी बनाकर उन पर बायोलॉजिकल और केमिकल हथियारों का ट्रायल किया जाता था.
अरुणाचल प्रदेश में चीन की सीमा पर तनाव है. कारण है यहां के तवांग सेक्टर में यांगत्से के पास भारत और चीन के सैनिकों के बीच हुई झड़प. ये झड़प 9 दिसंबर को हुई थी.
इस झड़प पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने संसद में बताया था कि भारतीय सेना ने बहादुर की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) को हमारे क्षेत्र में अतिक्रमण करने से रोका और उन्हें उनकी पोस्ट पर जाने को मजबूर कर दिया.
इससे पहले जून 2020 में लद्दाख की गलवान घाटी में भारत और चीन के सैनिकों में झड़प हुई थी. उस झड़प में भारतीय सेना के 20 जवान शहीद हो गए थे. जबकि, चीन ने सिर्फ चार सैनिकों की मारे जाने की बात मानी थी. हालांकि, ऑस्ट्रेलियाई अखबार ने अपनी रिपोर्ट में कम से कम 38 चीनी सैनिकों के मारे जाने का दावा किया था. गलवान घाटी में झड़प के करीब 30 महीने बाद तवांग में झड़प हुई.
इस झड़प के बाद 1962 की जंग की बातें भी दोहराई जाने लगीं हैं. उस समय में चीनी सेना ने जबरन हमला कर दिया था और फिर एकतरफा संघर्ष विराम का ऐलान कर दिया था. जंग के छह दशक बीत जाने के बाद भी चीन की चुनौती कम नहीं हुई है. आज चीन जहां लगातार धमकाता रहता है तो ऐसे में इतिहास का वो दौर याद करना भी जरूरी है, जब छोटे से देश जापान ने चीन में कत्लेआम मचा दिया था.
चीन की राजशाही के घुटने टिका दिए थे
चीन और जापान के बीच पहली लड़ाई 1 अगस्त 1894 से 17 अप्रैल 1895 तक चली थी. उस समय जापान और चीन, दोनों ही जगह राजशाही थी. इस लड़ाई की वजह कोरिया बना था. कोरिया, चीन का खास दोस्त था. कोरिया के पास कोयला और आयरन बहुत था. जापान को कोरिया के प्राकृतिक संसाधन चाहिए था.

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