
'उन्हें बालासाहेब को हिन्दू हृदय सम्राट बोलने में भी तकलीफ', शिंदे गुट के विधायक का फूटा गुस्सा
AajTak
एकनाथ शिंदे गुट के विधायक ने कहा है कि कुछ लोग हिंदुत्व भूल गए हैं, उन्होने हिंदुत्व ही छोड़ दिया है. कुछ लोग तो ऐसे हैं कि उन्हें बालासाहेब को हिन्दू हृदय सम्राट बोलने में भी तकलीफ है, वो घबराने लगें हैं.
महाराष्ट्र में जब से सत्ता परिवर्तन हुआ है और एकनाथ शिंदे ने मुख्यमंत्री की कुर्सी संभाली है, शिवसेना की अंदरूनी लड़ाई बढ़ती जा रही है. सिर्फ मुद्दे अलग रहते हैं, लेकिन आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी रहता है. इस समय शिवाजी पार्क में दशहरा रैली को लेकर भी विवाद चल रहा है. उद्धव ठाकरे भी वहां रैली करना चाहते हैं और एकनाथ शिंदे भी दावा ठोक रहे हैं. तर्क ये है कि हमेशा से शिवसेना ने वहां पर रैली की है, लेकिन इस बार शिवसेना ही दो गुट में बंट चुकी है, ऐसे में दावे भी दो तरफ से हुए हैं.
अब एकनाथ शिंगे के करीबी नरेश म्हस्के ने दो टूक कहा है कि दशहरा पर शिवाजी पार्क में मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का ही संबोधन होने वाला है. वे कहते हैं कि बालासाहेब के समय से ही सदा सरवनकर (शिंदे गुट के विधायक) दशहरा रैली के लिए आवेदन करते आये हैं. इस बार भी उन्होंने ही आवेदन किया है लेकिन रैली शिंदे गुट की शिवसेना की ही होगी. जोर देकर कहा गया कि कुछ लोग हिंदुत्व भूल गए हैं, उन्होने हिंदुत्व ही छोड़ दिया है. कुछ लोग तो ऐसे हैं कि उन्हें बालासाहेब को हिन्दू हृदय सम्राट बोलने में भी तकलीफ है, वो घबराने लगें हैं.
वे आगे कहते हैं कि सिर्फ सीएम एकनाथ शिंदे ही बालासाहेब के विचारों को लेकर आगे चल रहे हैं, इसलिए शिवतीर्थ यानी जी शिवाजी पार्क पर दशहरा रैली का अधिकार सिर्फ शिंदे गुट की शिवसेना को ही है. तमाम नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भी शिंदे से यही आग्रह किया है, लेकिन इस पर आखिरी निर्णय सीएम ही लेंगे.
जानकारी के लिए बता दें कि हर साल दशहरा के मौके पर शिवाजी पार्क में शिवसेना की मेगा रैली होती है. उस रैली में पूरे देश से कार्यकर्ता आते हैं और फिर अपने नेता का संदेश लेकर जगह-जगह घूमते हैं. लेकिन इस बार क्योंकि पार्टी में ही फूट है, ऐसे में रैली को लेकर भी तरह-तरह के कयास लग रहे हैं.

मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के कारण भारत के 6 से ज्यादा जहाज अभी भी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में फंसे हुए हैं. बताया जा रहा है कि इन जहाजों में ज्यादातर एलपीजी टैंकर और एलएनजी जहाज हैं. जिससे देश में एलपीजी की किल्लत हो सकती है. हालांकि, सरकार ने घरेलू उत्पादन में 40% वृद्धि की है और घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दी जा रही है.

न्यूजरूम में बात होगी तेल-गैस युद्ध बने ईरान-अमेरिका-इजरायल युद्ध की. बताएंगे कि कैसे भड़का तेल-गैस युद्ध. इजरायल के हमले का जवाब ईरान ने कैसे दिया. ये भी बात होगी कि क्या ट्रंप का ऑपरेशन एपिक फ्यूरी फेल हो गया? क्या ईरान को निहत्था करने के लिए शुरू हुई जंग अब तेल-गैस युद्ध के साथ तीसरा विश्व युद्ध की तरफ बढ़ चला है.

देश के 3 शहरों से ऐसी खबरें आईं जिसने दिल दहला दिया. आग लगने के कारण दिल्ली, चंडीगढ़ और इंदौर में भयानक हादसे हुए. भीषण आग की चपेट में पूरा का पूरा परिवार आ गया. दिल्ली में 9 लोगों की मौत हुई तो इंदौर में भी 8 लोगों को जान गंवानी पड़ी. चंडीगढ़ में लगी आग भयावह जरूर है, लेकिन गनीमत रही कि किसी तरह की जनहानि नहीं हुई.

अमेरिका-इजरायल की ईरान से जंग की वजह से देशभर में LPG की किल्लत अब भी जारी है. गैस एजेंसियों के बाहर लम्बी लाइनें हैं. गैस सिलेंडर की कालाबाजारी और जमाखोरी भी हो रही है. होटल-रेस्टोरेंट में गैस का स्टॉक खत्म होने से बिजनेस ठप होने लगे हैं. कई जगह ताले भी लटकने लगे हैं. त्योहारी सीजन में घरों में भी इसका असर दिख रहा है.









