
उन्नाव रेप पीड़िता को दिल्ली में क्यों करनी पड़ी PCR कॉल? DCW पर लगाया परेशान करने का आरोप
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उन्नाव की रेप पीड़िता नवंबर 2020 से दिल्ली में रह रही है. कोर्ट के आदेश के मुताबिक उत्तर प्रदेश सरकार उसके रहने, पढ़ने का खर्च उठाती है. ये सब दिल्ली महिला आयोग की देखरेख में होता है. लेकिन पिछले कुछ महीनों से वह परेशान है.
उन्नाव की रेप पीड़िता नवंबर 2020 से दिल्ली में रह रही है. कोर्ट के आदेश के मुताबिक उत्तर प्रदेश सरकार उसके रहने, पढ़ने का खर्च उठाती है. ये सब दिल्ली महिला आयोग की देखरेख में होता है. लेकिन पिछले कुछ महीनों से वह परेशान है. दिल्ली में उसके साथ एक सुरक्षाकर्मी भी मौजूद है, जो ठीक उसके बगल के फ्लैट में रहता है और हर आने-जाने वाले पर नर रखता है. जानकारी के मुताबिक 16 अगस्त की रात उन्नाव रेप पीड़िता के पति ने अपने हाथ पर ब्लेड से कट मार कर खुदकुशी करनी चाही.
इसके पीछे की वजह थी दिल्ली महिला आयोग के द्वारा समय पर किराया नहीं चुकाया जाना. पीड़िता के मुताबिक शुरू में सब ठीक था. खासकर जब तक स्वाति मालीवाल दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्षा थीं, लेकिन अब उन्हें अपने खर्च का पैसा लेने के लिए आयोग के चक्कर काटने पड़ते हैं. पानी और बिजली की भी दिक्कत होती है, और जब भी पीड़िता और उसके पति आयोग में फोन करते हैं या जाते हैं तो उनकी समस्या का समाधान करने की बजाय टरका दिया जाता है. रेप पीड़िता ने इस बात की शिकायत करने के लिए दिल्ली पुलिस कंट्रोल रूम में कॉल कर दी थी.
आजतक से बातचीत में इस पूरे घटनाक्रम के बारे में बताया है. उन्नाव रेप पीड़िता के मुताबिक, 'यूपी सरकार दिल्ली महिला आयोग को पैसे देती है और वहां से हमारे खर्च का पैसा मिलता है. लेकिन मकान मालिक की कॉल आई हमारे पास कि आपका तीन महीने का रूम रेंट और बिजली-पानी का बिल नहीं पेड हुआ है. इसलिए हम आपका बिजली और पानी की सप्लाई बंद कर रहे हैं. तब मैंने दिल्ली पुलिस कंट्रोल रूम में मदद के लिए कॉल की. वहां से कहा गया कि ये मामला सीबीआई, दिल्ली महिला आयोग और कोर्ट के बीच का है. इसलिए हम इसमें आपकी कुछ मदद नहीं कर सकते. आप उन्हीं से संपर्क करें.'
दिल्ली महिला आयोग में नहीं हो रही सुनवाई: पीड़िता
रेप पीड़िता ने कहा, 'दिल्ली महिला आयोग में कॉल करने पर कहा जाता है आप 181 पर कॉल करिए. 181 पर कॉल करने पर मामला पीसीआर के पास फारवर्ड कर दिया जाता है. वहां से मुझसे सारी दिक्कतें पूछी जाती हैं, फिर होता कुछ नहीं है और मकान मालिक मुझे सुनाकर कर जाता है. इसमें मकान मालिक की भी गलती नहीं है. उसका साफ कहना है कि मुझे किराया और बिजली-पानी का बिल हर महीना चाहिए न की तीन-तीन महीने पर. हमें बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. कोर्ट ने इस संबंध में निर्देश जब महिला आयोग को दिया है, तो उसे इंतजाम करना चाहिए. लेकिन मुझे बातों से टाल दिया जाता है. जाने पर कहते हैं जाइए हो जाएगा, लेकिन होता कुछ नहीं है.'
उसने कहा, 'जब बार-बार मकान मालिक आकर सुनाएगा तो किसी को भी बुरा लगेगा. बेइज्जती किसी को बर्दाश्त नहीं होती है. मकान मालिक ने जब फोन किया तो मेरे पति ने गुस्से में अपना हाथ काट लिया और फांसी लगाने की कोशिश की. जब मेरा पति ही नहीं रहेगा तो मैं दो-दो बच्चों और अपनी दिव्यांग सास को लेकर कहां जाऊंगी. दिल्ली महिला आयोग का कहना है कि एलजी साहब ने हमें 6-7 महीने से फंड नहीं दिया है. लेकिन एलजी साहब का दूसरा मामला है, मेरा खर्च तो उत्तर प्रदेश सरकार देती है. कोर्ट ने जब निर्देश दिल्ली महिला आयोग और यूपी सरकार को दिया है, तो मैं 181 और दिल्ली पुलिस के पास क्यों जाऊंगी.'

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