
ईरान पर एक हफ्ते तक बम-मिसाइलें गिराने वाली थी अमेरिकी फौज, लेकिन ट्रंप ने बीच में रुकवा दी जंग!
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अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रमुख आर्मी जनरल एरिक कुरिल्ला ईरान के खिलाफ 'ऑल-इन' वॉर चाहते थे. ये युद्ध अगर जनरल एरिक कुरिल्ला के प्लान के तहत हुआ होता तो कई हफ्तों तक चल सकता था. लेकिन यू्एस आर्मी का ये प्लान ट्रंप की विदेश नीति से टकरा रहा था. इसके बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने अधिकारों का इस्तेमाल किया.
अमेरिकी सेना ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को नष्ट करने के लिए एक व्यापक और लंबी अवधि का मिलिट्री एक्शन तैयार किया था. अगर ऐसा होता तो ईरान के न्यूक्लियर साइट नतांज, फोर्दो, इस्फहान पर अमेरिकी हमले सिंगल नाइट के लिए सीमित नहीं होते, बल्कि ये हफ्तों तक चल सकता था. लेकिन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस योजना को अस्वीकार कर दिया.
अमेरिकी न्यूज एजेंसी एनबीसी ने एक रिपोर्ट में इन तथ्यों का जिक्र किया है. इसमें कहा गया है कि अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के प्रमुख जनरल एरिक कुरिला ने ईरान के 6 परमाणु स्थलों को बार-बार निशाना बनाने की योजना तैयार की थी. इस योजना में कई हफ्तों तक सैन्य कार्रवाई शामिल थी जो कि "ऑपरेशन मिडनाइट हैमर" से पैमाने में कहीं ज्यादा बड़ा था.
क्या था अमेरिका का लॉन्ग प्लान?
इस योजना का उद्देश्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह से नेस्तानाबूद करना था. इसमें ईरान की मिसाइल डिफेंस सिस्टम और बैलिस्टिक मिसाइल क्षमताओं को निशाना बनाना शामिल था. हालांकि इस कार्रवाई से ईरान में बड़े पैमाने पर हताहत होने की आशंका थी.
इसके अलावा अमेरिका को यह भी आशंका थी कि इन हमलों के जवाब में ईरान इराक और सीरिया में अमेरिकी ठिकानों पर हमला कर सकता था.
ट्रंप ने इस योजना को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि यह लंबे समय तक चलने वाले संघर्ष को जन्म दे सकती थी जिससे क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता को खतरा हो सकता था. ट्रंप ने अपनी विदेश नीति में अमेरिका को विदेशी संघर्षों से निकालने पर फोकस किया है न कि इन संघर्षों में गहराई से उतरने पर. इस योजना की जानकारी रखने वाले एक सूत्र ने कहा, "हम अपने विकल्पों पर पूरी तरह से विचार करने को तैयार थे, लेकिन राष्ट्रपति ऐसा नहीं चाहते थे."

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