
ईरान के खार्ग आईलैंड को 'कोहिनूर' क्यों कहा जाता है? यहां क्या है US हमले की वजह
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फारस की खाड़ी में स्थित छोटा सा खार्ग आइलैंड ईरान के लिए बेहद अहम माना जाता है. देश के ज्यादातर तेल निर्यात इसी द्वीप से होते हैं. यही वजह है कि इसे ईरान की अर्थव्यवस्था की रीढ़ और उसका
अमेरिका ने फारस की खाड़ी में जिस आईलैंड पर बमबारी की है, उस आइलैंड को ईरान की आर्थिक जीवनरेखा माना जाता है. इसकी वजह यह है कि ईरान की ज्यादातर कमाई तेल बेचने से होती है. इसी पैसे से सरकार का खर्च चलता है और सेना को भी फंड मिलता है. आंकड़ों के मुताबिक ईरान के कुल कच्चे तेल के निर्यात का लगभग 90 से 95 प्रतिशत हिस्सा इसी एक द्वीप से होकर दुनिया के अलग-अलग देशों तक जाता है.
इसका मतलब साफ है कि अगर किसी वजह से खार्ग आइलैंड से तेल का निर्यात रुक जाए तो ईरान की अर्थव्यवस्था पर सीधा और बड़ा असर पड़ सकता है. मसलन, इस बात की चर्चा जोरों पर इसलिए है क्योंकि अमेरिकी राष्ट्र्पति ट्रंप ने इस द्वीप पर हमले की जानकारी दी है. इस हमले में उन्होंने बताया तेल सुविधाओं को निशाना नहीं बनाया गया, बल्कि सैन्य ठिकानों को खत्म कर दिया गया. अमेरिका ने इस आईलैंड को इसलिए निशाना बनाया क्योंकि, ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद कर रखा है और इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है.
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दुनिया का बड़ा तेल टर्मिनल
खार्ग आइलैंड सिर्फ एक बंदरगाह नहीं है, बल्कि यह एक बहुत बड़ा तेल केंद्र है. यहां बड़े-बड़े टैंक बने हुए हैं जिनमें भारी मात्रा में कच्चा तेल जमा किया जाता है. बताया जाता है कि यहां करीब 3 करोड़ बैरल तेल जमा करने की क्षमता है. पिछले कुछ सालों में ईरान ने यहां नए टैंक बनाकर इस क्षमता को और बढ़ाने की कोशिश भी की है.
इस द्वीप की जेट्टियां इतनी बड़ी और आधुनिक हैं कि यहां एक साथ करीब 10 बड़े सुपरटैंकर तेल भर सकते हैं. यहां से हर दिन लगभग 70 लाख बैरल तेल लोड किया जा सकता है. खार्ग आइलैंड के आसपास समुद्र काफी गहरा है. इसी वजह से दुनिया के सबसे बड़े तेल टैंकर भी यहां आसानी से आ सकते हैं.

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