
इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर मालिकों को वापस करनी पड़ सकती है सब्सिडी की रकम! जानिए क्या है पूरा मामला
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कुछ कंपनियों पर ग्राहकों से अधिक शुल्क लेने का आरोप लगाया गया था और इस मामले में MHI ने फैसला सुनाया था कि, कंपनियों को ग्राहकों से अधिक वसूली गई रकम वापस करनी होगी. अब कंपनियां चाहती हैं कि, वापसी की ये रकम ग्राहकों से वसूला जाए.
दोपहिया इलेक्ट्रिक वाहन मालिकों को सब्सिडी की रकम वापस करनी पड़ सकती है! इलेक्ट्रिक वाहन निर्माताओं के एक समूह ने मिनिस्ट्री ऑफ हैवी इंडस्ट्रीज (MHI) से एक प्रस्ताव दिया है, जिसमें ग्राहक को कम कीमत पर बेचे गए वाहनों की सब्सिडी (Subsidy) के पैसे वापस करने के लिए उनसे संपर्क करने की मंजूरी मांगी गई है. इस प्रस्ताव में हीरो इलेक्ट्रिक, बेनलिंग और एम्मो मोबिलिटी जैसी कई कंपनियां शामिल हैं.
दरअसल, इन कंपनियों पर ग्राहकों से अधिक शुल्क लेने का आरोप लगाया गया था और इस मामले में MHI ने फैसला सुनाया था कि, कंपनियों को ग्राहकों से अधिक वसूली गई रकम वापस करनी होगी. अब कंपनियां चाहती हैं कि, वापसी की ये रकम ग्राहकों से वसूला जाए. इन ईवी निर्माताओं ने सामूहिक रूप से सोसायटी ऑफ इलेक्ट्रिक व्हीकल मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (SMEV) को ग्राहकों से पैसे वसूलने के लिए पत्र लिखा है. ये कंपनियां पहले से ही सरकार के बकाए और पिछले 18 महीनों से बिक्री बाधित होने से परेशान हैं.
क्या है मामला:
हाल ही में 7 कंपनियों को फेज़्ड मैन्युफैक्चरिंग प्रोग्राम (PMP) के मानदंडों का उल्लंघन करते हुए पाया गया था, जिसके बाद MHI ने इन कंपनियों पर तकरीबन 469 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया. मंत्रालय ने ARAI और ICAT जैसी व्हीकल टेस्टिंग एजेंसियों को इन कंपनियों द्वारा वाहनों में इस्तेमाल किए जाने वाले कंपोनेंट्स की सोर्सिंग की जांच करने को कहा. जांच में पाया गया कि, हीरो इलेक्ट्रिक, रिवोल्ट, बेनलिंग, एमो, लोहिया, एम्पीयर ईवी और ओकनावा ने आयातित (इम्पोर्टेड) कंपोनेंट्स का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया है जो कि PMP प्रोग्राम के नियमों का खुला उल्लंघन था.
क्या है नियम:
दरअसल, नियम के अनुसार 50 प्रतिशत मैन्युफैक्चरिंग स्थानीय रूप से प्राप्त कंपोनेंट्स (लोकल पार्ट्स) के साथ किया जाना आवश्यक है, लेकिन इन कंपनियों नियमों की अनदेखी करते हुए बाहर से इम्पोर्ट किए गए पार्ट्स का इस्तेमाल किया. एक रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि, इन कंपनियों ने उन पार्ट्स को भी विदेशों से आयात किया था, जिन्हें भारत में तैयार किया जाना था.

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