
इटली के पास समुद्र में डूबी लग्जरी बोट, ब्रिटेन के 'टेक टाइकून' समेत 6 लापता, 1 की मौत
AajTak
इटली तट रक्षक ने एक बयान में कहा कि ब्रिटिश ध्वज वाला "बेयसियन" एक 56 मीटर लंबी (184 फीट) सेलबोट थी, जो 22 लोगों को ले जा रही थी. इस दौरान बोट पोर्टिसेलो बंदरगाह के पास तट पर खड़ी थी. इसी दौरान समुद्र में भीषण तूफान आया और बोट डूब गई. वहीं प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि बोट लहरों के नीचे गायब हो गई. डूबने से पहले पंद्रह लोग बच गए, जिनमें लिंच की पत्नी शामिल हैं.
इटली के सिसिली स्थित तट पर सोमवार देर रात समुद्र में आए भीषण तूफान में एक लग्जरी बोट डूब गई. इस पर सवार एक शख्स की मौत हो गई, जबकि 6 लोग लापता हैं. इन लापता लोगों में ब्रिटेन के टेक्नोलोजी दिग्गज माइक लिंच और उनकी बेटी भी शामिल हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक जहाज पर सवार लिंच की पत्नी समेत कुल 15 लोगों को रेस्क्यू कर लिया गया, जिनमें से आठ को अस्पताल में भर्ती कराया गया है.
इटली तट रक्षक ने एक बयान में कहा कि ब्रिटिश ध्वज वाला "बेयसियन" एक 56 मीटर लंबी (184 फीट) सेलबोट थी, जो 22 लोगों को ले जा रही थी. इस दौरान बोट पोर्टिसेलो बंदरगाह के पास तट पर खड़ी थी. इसी दौरान समुद्र में भीषण तूफान आया और बोट डूब गई. वहीं प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि बोट लहरों के नीचे गायब हो गई. डूबने से पहले पंद्रह लोग बच गए, जिनमें लिंच की पत्नी, एंजेला बैकारेस, जो नाव की मालिक थीं और एक वर्षीय लड़की शामिल हैं.
मृतकों और लापता लोगों के नाम तुरंत जारी नहीं किए गए, लेकिन बचाव अभियान से परिचित एक व्यक्ति ने पुष्टि की कि लिंच और उनकी 18 वर्षीय बेटी हन्ना का पता नहीं चल पाया है. इटली की मीडिया के मुताबिक मृत व्यक्ति बोट पर सवार रसोइया था. लापता लोगों में ब्रिटिश, अमेरिकी और कनाडाई नागरिक हैं. उनकी तलाश में रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया है. जीवित बचे लोगों ने बताया कि लिंच ने अपने सहकर्मियों के लिए ट्रिप का आयोजन किया था. लापता लिंच को जून में एक बड़े अमेरिकी धोखाधड़ी मुकदमे में बरी किया गया था.
बता दें कि 59 वर्षीय लिंच ब्रिटेन के सबसे प्रसिद्ध तकनीकी उद्यमियों में से एक हैं. उन्होंने कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में अपने अभूतपूर्व शोध से देश की सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर फर्म ऑटोनॉमी की शुरुआत की. वह ब्रिटेन के बिल गेट्स के रूप में जाने जाते हैं. उन्होंने 2011 में फर्म को HP को $11 बिलियन में बेच दिया था. हालांकि इसी दौरान अमेरिकी तकनीकी दिग्गज ने उन पर धोखाधड़ी का आरोप लगाया. आपराधिक आरोपों पर मुकदमा चलाने के लिए उन्हें ब्रिटेन से अमेरिका प्रत्यर्पित किया गया था. जून में सैन फ्रांसिस्को में एक जूरी ने उन्हें बरी कर दिया, जिसके बाद उन्होंने एक साल से अधिक समय तक प्रभावी रूप से घर में नजरबंद रहने का समय बिताया.

राष्ट्रपति ट्रंप ने एक इंटरव्यू में स्पष्ट रूप से कहा है कि यदि ईरान ने उन पर हमला किया या उनकी हत्या की साज़िश रची, तो अमेरिका ईरान को पूरी तरह से दुनिया के नक्शे से मिटा देगा. यह बयान अमेरिका और ईरान के बीच तनाव को और बढ़ा सकता है. ट्रंप की इस धमकी ने वैश्विक राजनीति में नई बहस छेड़ दी है. ऐसे हालात में दोनों देशों के बीच शांति बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है.

ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चिंता अभी भी कायम है. दावोस में दिए अपने भाषण में उन्होंने डेनमार्क को कड़ी चेतावनी दी और कहा कि वह एहसानफरामोश निकला, क्योंकि दूसरे विश्व युद्ध के बाद अमेरिका ने ग्रीनलैंड को दिया था, लेकिन अब डेनमार्क इसका सही उपयोग नहीं कर रहा है. ट्रंप ने जोर देकर कहा कि ग्रीनलैंड अमेरिका की सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है और वह इसे लेना चाहते हैं.

'PM मोदी की बहुत इज्जत करता हूं, जल्द अच्छी ट्रेड डील होगी', टैरिफ धमकियों के बीच ट्रंप का बड़ा बयान
ट्रंप ने मीडिया संग बातचीत में भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर कहा कि आपके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर मेरे मन में बहुत सम्मान है. वह बेहतरीन शख्स है और मेरे दोस्त हैं. हमारे बीच बेहतरीन ट्रेड डील होने जा रही है.

ट्रंप ने वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम को संबोधित करते हुए कहा कि मुझे यूरोप से प्यार है लेकिन वह सही दिशा में आगे नहीं बढ़ रहा है. दुनिया हमें फॉलो कर बर्बादी के रास्ते से बच सकती है. मैंने कई मुल्कों को बर्बाद होते देखा है. यूरोप में मास माइग्रेशन हो रहा है. अभी वो समझ नहीं रहे हैं कि इसके क्या-क्या दुष्प्रभाव हो सकते हैं. यूरोपीयन यूनियन को मेरी सरकार से सीखना चाहिए.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्विट्जरलैंड के दावोस में ग्रीनलैंड को लेकर बड़ा प्रस्ताव रखा है. उन्होंने साफ कहा है कि अगर ग्रीनलैंड अमेरिका को नहीं दिया गया तो वे यूरोप के आठ बड़े देशों पर टैरिफ लगाएं जाएंगे. इस स्थिति ने यूरोप और डेनमार्क को ट्रंप के खिलाफ खड़ा कर दिया है. यूरोप और डेनमार्क ने स्पष्ट कर दिया है कि वे ट्रंप के इस ब्लैकमेल को बर्दाश्त नहीं करेंगे.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विमान को एक तकनीकी खराबी की वजह से वापस वाशिंगटन लौट आया. विमान को ज्वाइंट बेस एंड्रयूज में सुरक्षित उतारा गया. ट्रंप के एयर फोर्स वन विमान में तकनीकि खराबी की वजह से ऐसा करना पड़ा. विमान के चालक दल ने उड़ान भरने के तुरंत बाद उसमें एक मामूली बिजली खराबी की पहचान की थी. राष्ट्रपति ट्रंप वर्ल्ड इकोनॉमिक फ़ोरम की बैठक में शिरकत करने के लिए स्विट्ज़रलैंड के दावोस जा रहे थे.

ग्रीनलैंड में आजादी की मांग दशकों से चल रही है. फिलहाल यह द्वीप देश डेनमार्क के अधीन अर्ध स्वायत्त तरीके से काम करता है. मतलब घरेलू मामलों को ग्रीनलैंडर्स देखते हैं, लेकिन फॉरेन पॉलिसी और रक्षा विभाग डेनमार्क सरकार के पास हैं. अब कयास लग रहे हैं कि डोनाल्ड ट्रंप की ग्रीनलैंड पर कब्जे की जिद के बीच वहां अलगाववाद को और हवा मिलेगी.






