
आज का दिन: रूस से जंग के बीच कितना सही है जेलेंस्की का दावा? चीन के राष्ट्रपति ने क्यों किया रूस का समर्थन?
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यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने दावा किया है कि जंग में रूस को इतना नुकसान हुआ है, जितना पिछले 30 साल में नहीं हुआ. सुनिए 'आज का दिन' में अमन गुप्ता के साथ.
रूस और यूक्रेन का एक दूसरे पर वार पलटवार जारी है. इस बीच यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने दावा किया कि 13 दिन की जंग में रूस के इतने एयरक्राफ्ट तबाह हो चुके हैं जितने 30 साल में भी नहीं होते. दूसरी तरफ यूक्रेन के पूर्व राष्ट्रपति विक्टर यानुकोविच ने जेलेंस्की से किसी भी कीमत पर युद्ध रोकने की अपील की है. रूसी सेना लगातार यूक्रेन के अलग-अलग शहरों को निशाना बना रही है. KFC-Pizza Hutt ने भी रूस में अपना कारोबार सस्पेंड करने का फैसला किया है., अमेरिका ने रूस से गैस और तेल ना लेने का फैसला किया है.
कल चीन के राष्ट्रपति जिनपिंग ने रूस का समर्थन किया और कहा कि रूस पर जो पाबंदियां लगाई जा रही हैं, उसका नुकसान हर देश को उठाना पड़ेगा. उधर, यूक्रेन के सुमी में फंसे भारतीयों को बसों के जरिए बॉर्डर पार कराया गया. मगर रेस्क्यू से कुछ देर पहले ही सुमी शहर के रिहायशी इलाकों पर रूस ने मिसाइल से अटैक किया, जिसमें दो बच्चों समेत 21 लोगों की मौत हो गई. इसमें किसी भी भारतीय के हताहत होने की ख़बर नहीं आई. वहीं, कल यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने वेस्टर्न कंट्रीज के हवाई मदद ना भेजने पर उन सब को आड़े हाथ लिया और एक दफा फिर से युद्ध रोकने में सबकी मदद मांगी.
कई दिनों से ये ख़बर आ रही है कि रूस के टैंक्स सड़कों पर ही बंद पड़े हैं, लॉजिस्टिक सप्लाई में रूस को दिक्कतें आ रही हैं. इसकी तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर खूब वायरल है. बताया गया कि रूस अब तक यूक्रेन के रेलवे नेटवर्क को पूरी तरीके से अपने कब्जे में नहीं कर सका है जिस वजह से उसे ये दिक्कतें आ रही हैं. तो यूक्रेन के रेलवे नेटवर्क से जुड़ा ये पूरा मसला क्या है और रूस की स्ट्रेटेजी को ये डैमेज कैसे कर रहा है, अगर आने वाले कुछ दिनों में रूस ना पहुंच सका, कब्ज़ा ना कर सका जिससे वो यूक्रेन के रेलवे नेटवर्क का इस्तेमाल कर सके, तो फिर क्या हम रूस को कमज़ोर पड़ता देखेंगे?
रूस-यूक्रेन युद्ध के वक्त भारत अपने गेहूं के एक्सपोर्ट को बढ़ाना चाहिए और इसका उसे फायदा भी होगा. ये बात कल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कही, जब वो Financing for Growth & Aspirational Economy वेबिनार को संबोधित कर रहे थे. आर्थिक जानकारों की मानें तो रूस और यूक्रेन, गेहूं के बहुत बड़े एक्सपोर्टर हैं. दुनिया में जो गेहूं एक्सपोर्ट होता है उसमें इन दोनों देशों का हिस्सा 40 फीसदी है.
युद्ध के कारण ग्लोबल मार्केट में गेहूं के दाम 25 फीसदी तक बढ़ गए हैं. न्यूज़ एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस के मुताबिक रूस-यूक्रेन के बीच हो रहे युद्ध और रूस पर लग रहे आर्थिक प्रतिबंध की वजह से यूरोप, अफ्रीका और एशिया के लोगों की फूड सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हो सकती है. और इसी में भारत गेहूं के एक्सपोर्टर के रूप में बड़ी भूमिका निभा सकता है. अगर हम भारत के गेहूं के एक्सपोर्ट को देखें तो 2021-22 के पहले सात महिने में भारत का एक्सपोर्ट 527 परसेंट बढ़ा था. तो अब ऐसे में जब रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध चल रहा है और उनके गेहूं का एक्सपोर्ट प्रभावित है तो गेहूं के एक्सपोर्ट को बढ़ाना भारत की अर्थव्यवस्था के लिए कितनी बड़ा मौका है? क्या भारत का एक्सपोर्ट बढ़ता है तो, उनकी आय भी बढ़ेगी?
गोवा 2017 विधानसभा के चुनाव परिणाम आपको याद होंगे. कांग्रेस लार्जेस्ट पार्टी थी. लेकिन सरकार बीजेपी ने बना ली थी. जोड़ तोड़ कर. लेकिन इस बार यानी 2022 के विधानसभा चुनावों में वैसी कुछ स्थिति ना हो इसके लिए कांग्रेस ने जतन शुरू कर दिया है. कहा जा रहा है कि पार्टी पहले से ही अपने उम्मीदवारों के सम्पर्क में है और साथ ही साथ दूसरी पार्टी के नेताओं के सम्पर्क में भी है. और ये तस्वीर केवल गोवा ही नहीं है, बल्कि मणिपुर , उत्तराखंड , पंजाब जहां पार्टी को लग रहा है वो सरकार बनाने की स्थिति में है वो वहां, वहां सावधानियां बरत रही है. ताकि गोवा 2017 जैसा कुछ फिर न हो जाए. इस बार के चुनाव परिणाम कल यानी दस मार्च को आएंगे. तो उससे पहले कांग्रेस की तरफ से क्या कोशिशें हो रही हैं गोवा में और अन्य राज्यों में?

केरल के कन्नूर जिले में शुक्रवार को हुए दो बम धमाके से हड़कंप मच गया. पनूर के पास खुदाई के दौरान जमीन में दबा बम फटने से टिपर लॉरी चालक शमिथ लाल घायल हो गया. वहीं, मनोलिक्कावु मंदिर के प्रवेश द्वार के पास अज्ञात व्यक्ति ने सड़क पर बम फेंका. यह घटना मंदिर उत्सव के दौरान CPI(M) और RSS कार्यकर्ताओं के विवाद के बाद हुई.

जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने आतंकवाद को लेकर महत्वपूर्ण बयान दिया है. उन्होंने कहा कि आतंकवाद को सहना नहीं होगा और आतंकवाद से जुड़े हर व्यक्ति को कड़ी सजा मिलेगी. जो लोग देश के भविष्य को नुकसान पहुंचाने की साजिश रचेंगे, उन्हें मिट्टी में मिलाया जाएगा. मनोज सिन्हा ने स्पष्ट किया कि देशद्रोही और आतंकवादी सात पीढ़ियों तक अपनी सजा याद रखेंगे.

भारतीय यूथ कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब ने कहा है कि जिस देश का सिस्टम और खुद प्रधानमंत्री ही कॉम्प्रामाइज्ड हो चुके हों, उसके खिलाफ आवाज उठाने का मंच आखिर बचता ही कौन-सा है? उन्होंने कहा कि हम महात्मा गांधी के दिखाए रास्ता पर अगर चलना जानते हैं, तो सरदार भगत सिंह के दिखाए रास्ते पर भी चलना जानते है.

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