
आज का दिन: प्राइवेट अस्पतालों में क्यों बर्बाद हो रही है कोरोना वैक्सीन?
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प्राइवेट अस्पतालों और सरकारी अस्पतालों में वैक्सीन को लेकर आए दिन खबरें आती रहती हैं कि प्राइवेट में वैक्सीन ज्यादा है और सरकारी में एक डोज के लिए चार दिन तक घूमना पड़ता है. सरकार ने प्राइवेट अस्पतालों के लिए भारत में बनी सभी कोविड -19 वैक्सीन डोज का 25 प्रतिशत रिज़र्व्ड किया है.
भारत में जो दो वैक्सीन का इस्तेमाल हो रहा है उसमें से सबसे ज्यादा इस्तेमाल हो रही है Covisheild. कोविशील्ड वैक्सीन पर कई बार रिसर्च हो चुकी हैं उसकी इफ़ेक्टिवनेस को लेकर. लेकिन अब इस वैक्सीन की बहुत बड़े स्तर पर स्टडी की गई है आर्म्ड फोर्सेज की तरफ से. जिसमें हेल्थकेयर वर्कर और फ्रंटलाइन वर्कर्स शामिल थे और पता चला है कि कोविशील्ड वैक्सीन लगाने के बाद इन्फेक्शन में 93 फीसदी की कमी हुई है. स स्टडी को इतनी अहमियत दी जा रही है क्योंकि सैंपल साइज 1.59 मिलियन यानि क़रीब 15 लाख 90 हज़ार है जो अब तक सबसे बड़ा सैंपल साइज है. तो ऐसे में इसकी फ़ाइंडिग्स कहीं ज़्यादा भरोसे के क़ाबिल हो जाती हैं लेकिन इसी के साथ एक खबर ये भी है की कोविशील्ड वैक्सीन प्राइवेट अस्पताल में पड़े पड़े बर्बाद भी हो रही है. सिर्फ यही वैक्सीन नहीं बल्कि covaxin भी. इवेट अस्पतालों और सरकारी अस्पतालों में वैक्सीन को लेकर आए दिन खबरें आती रहती हैं कि प्राइवेट में वैक्सीन ज्यादा है और सरकारी में एक डोज के लिए चार दिन तक घूमना पड़ता है. सरकार ने प्राइवेट अस्पतालों के लिए भारत में बनी सभी कोविड -19 वैक्सीन डोज का 25 प्रतिशत रिज़र्व्ड किया है. हालांकि, पिछले 2.5 महीनों में, प्राइवेट अस्पतालों ने 7 फीसदी से भी कम का वैक्सिनेशन किया है. ऐसा हेल्थ मिनिस्ट्री की तरफ से बयान आया है. अब ऐसा तो नहीं है कि प्राइवेट अस्पतालों को इंटरेस्ट नहीं रह गया है वैक्सिनेशन लगाने में. या कोई और वजह है. प्राइवेट हॉस्पिटल को जो 25 फ़ीसदी का रिजर्वेशन मिला है उसे फिर से एलोकेशन स्ट्रेटजी में बदलाव करने की ज़रूरत है?
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