
आज का दिनः शिवसेना पर दावा मजबूत करने के लिए क्या है शिंदे की नई चाल?
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एकनाथ शिंदे या उद्धव ठाकरे, कौन करेगा इस बार शिवाजी पार्क में दशहरा रैली? AAP क्यों मांग रही दिल्ली LG का इस्तीफ़ा? ED-CBI के शिकंजे के फंसे TMC नेताओं के समर्थन में क्यों आईं ममता बनर्जी? और क्यों देश में बढ़ रहीं हैं आत्महत्याएं?
आजतक रेडियो पर हम रोज लाते हैं देश का पहला मॉर्निंग न्यूज़ पॉडकास्ट ‘आज का दिन’ जहां आप हर सुबह अपने काम की शुरुआत करते हुए सुन सकते हैं आपके काम की खबरें और उन पर क्विक एनालिसिस. साथ ही, सुबह के अखबारों की सुर्खियां और आज की तारीख में जो घटा, उसका हिसाब किताब. जानिए, आज के एपिसोड में हमारे पॉडकास्टर अमन गुप्ता किन ख़बरों पर बात कर रहे हैं?
क्यों उपराज्यपाल का इस्तीफ़ा मांग रही है AAP?
ये किसी स्कूल या कॉलेज फेस्ट में देशभक्ति गीत गा रहे लड़कों की आवाज़ नहीं है. ये आवाज़ है...दिल्ली में आम आदमी पार्टी के विधायकों की, जो कल पूरी रात विधानसभा में धरने पर बैठे रहे. वजह बताने से पहले कहानी के बैकड्रॉप पर आते हैं. 19 अगस्त को मनीष सिसोदिया के घर सीबीआई की रेड हुई थी, इसके बाद आम आदमी पार्टी और बीजेपी के बीच तलवारें खिंच गई हैं. कोई ऐसा दिन नहीं बीता, जब AAP और बीजेपी के बड़े नेताओं के बीच ज़ुबानी जंग देखने को न मिली हो. बीजेपी लिकर पॉलिसी में कथित भ्रष्टाचार को लेकर केजरीवाल सरकार के खिलाफ हमलावर है. वहीं, आम आदमी पार्टी का आरोप है कि बीजेपी उसके विधायकों को तोड़ने की कोशिश कर रही है. कल दिल्ली विधानसभा में अरविंद केजरीवाल ने विश्वास मत पेश किया और मोदी सरकार समेत पूरी बीजेपी पर जमकर निशाना साधा.लेकिन विश्वास मत के जरिये बीजेपी को घेरने के बाद AAP ने दिल्ली के एलजी विनय कुमार सक्सेना ख़िलाफ़ भी मोर्चा खोल दिया. AAP नेताओं ने उनके ऊपर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए और पूरे दिन विधानसभा में और विधानसभा के बाहर तख्तियां और पोस्टर-बैनर लेकर प्रदर्शन किया. इतना ही नहीं, उपराज्यपाल की जांच करने और उनको पद से हटाए जाने की मांग को लेकर पूरी रात असेंबली कैंपस में धरने पर बैठे रहे. तो ये क्या मामला है जिसको लेकर AAP, LG वीके सक्सेना को घेर रही है और रात भर उनका प्रोटेस्ट कैसे चला?
दशहरा रैली, उद्धव ठाकरे के लिए क्यों अहम है?
महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की कुर्सी जाने के बाद शिवसेना में दो-फाड़ हो चुका है. एक धड़ा एकनाथ शिंदे का है और दूसरा उद्धव के साथ खड़ा है. सत्ता से बेदखल हुए उद्धव अपनी बची खुची मिल्कियत बचाने में जुटे हैं और पार्टी पर अपनी पकड़ कायम रखने की हरमुमकिन कोशिश कर रहे हैं. 'असली शिवसेना' को लेकर चल रहा विवाद कोर्ट में तो है ही. लेकिन सियासत के मैदान में भी ख़ूब ज़ोर आजमाइश चल रही है. इस संघर्ष का नतीजा ही है कि पिछले दिनों विधानसभा सत्र के दौरान दोनों गुटों में हाथा-पाई तक की नौबत आ गई थी. अब उद्धव ने एक दांव चला है. उन्होंने दशहरे पर मुंबई के शिवाजी पार्क में एक रैली आयोजित करने की परमिशन मांगी है. लेकिन उद्धव खेमे के नेताओं का आरोप है कि बीएमसी उन्हें मंज़ूरी नहीं दे रही है. इस बीच कल उद्धव ठाकरे ने ऐलान कर दिया कि दशहरा रैली तो शिवाजी पार्क में ही होगी. ऐसे में ये जानना दिलचस्प है कि आख़िर ये रैली उद्धव ठाकरे के लिए कितनी अहमियत रखती है?
ED-CBI के शिंकजे में फंसे नेताओं के समर्थन में क्यों उतरी ममता बनर्जी?

वेस्ट एशिया में छिड़ी जंग के बाद पैदा हुए हालातों पर प्रधानमंत्री लोकसभा को संबोधित कर रहे हैं. इस बीच उन्होंने कहा कि अब इस संकट को 3 सप्ताह से ज्यादा हो रहा है. इसका पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था पर, लोगों के जीवन पर बहुत ही विपरित असर हो रहा है. इसलिए पूरी दुनिया इस संकट के जल्द से जल्द समाधान के लिए सभी पक्षों से आग्रह भी कर रही है.












