
असदुद्दीन ओवैसी ने छोटे भाई को कहा 'सालार का बेटा', क्यों ओवैसी बंधुओं के पिता को मिली थी ये दमदार उपाधि?
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AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने भाजपा नेता नवनीत राणा के बयान पर पलटवार करते हुए करते हुए अपने छोटे भाई अकबरुद्दीन ओवैसी की तारीफ की. साथ में यह भी जोड़ दिया कि अकबरुद्दीन कहीं से कम नहीं, वो सालार का बेटा है. ओवैसी भाइयों के पिता को ये खिताब मिला हुआ था. हैदराबाद में उन्हें सालार-ए-मिल्लत कहा जाता, यानी लोगों का कमांडर, या जननेता.
चुनाव का चौथा चरण करीब आने के साथ ही राजनैतिक दल एक-दूसरे के खिलाफ बयानबाजियां कर रहे हैं. इसी बीच भाजपा नेता नवनीत राणा और ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहाद-उल मुस्लिमीन (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के बीच भी जबानी जंग छिड़ गई. ओवैसी ने अपने छोटे भाई के तीखे तेवरों की बात करते हुए कहा कि मैंने उसे समझाकर रोक रखा है, वरना सालार का बेटा है वो. बहुत मुश्किल से समझाकर बैठाना पड़ता है. ओवैसी और राणा के बीच विवाद के अलावा समझिए, कौन थे हैदराबाद के सालार.
क्या कहा था नवनीत राणा ने हैदराबाद से भाजपा प्रत्याशी माधवी लता के सपोर्ट में आई नवनीत राणा ने एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के साथ-साथ उनके छोटे भाई अकबरुद्दीन को भी घेर लिया था. उन्होंने नाम लिए बगैर कहा था कि छोटा भाई बोलता है - छोटा भाई बोलता है कि 15 मिनट के लिए पुलिस को हटा दो फिर हम दिखाते हैं, हम क्या करते हैं. मैं उनको कहना चाहती हूं कि छोटे भाईसाहब आपको तो 15 मिनट लगेंगे, लेकिन हमें सिर्फ 15 सेंकड लगेंगे. 15 सेकंड के लिए पुलिस को हटाया तो छोटे-बड़े को यह पता भी नहीं चल पाएगा कि वे कहां से आए और कहां गए. इसका वीडियो अपने एक्स हैंडल से शेयर करते हुए राणा ने दोनों ओवैसी भाइयों को टैग भी किया था.
इसी का जवाब देते हुए ओवैसी ने सालार का बेटा टर्म इस्तेमाल किया. उन्होंने कहा- मैंने छोटे को बहुत समझाकर रोक रखा है, छोड़ दूं क्या? तुमको मालूम ही क्या है कि छोटा क्या है. मेरा छोटा भाई तोप है, वो सालार का बेटा है. बहुत मुश्किल से समझाकर बैठाना पड़ता है. मैंने रोक रखा है.
ओवैसी के पिता क्यों कहलाए थे सालार
ओवैसी बंधुओं के पिता सुल्तान सलाहुद्दीन ओवैसी के पास ये उपाधि थी- सालार-ए-मिल्लत. तीस के दशक में हैदराबाद के बेहद प्रतिष्ठित परिवार में जन्मे सलाहुद्दीन के पिता अब्दुल वहीद ओवैसी थे, जो तब ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के अध्यक्ष थे. पिता के गुजरने के बाद सलाहुद्दीन ओवैसी ने मजलिस की कमान संभाली. बहुत कम समय में ही वे हैदराबाद की बड़ी आबादी में लोकप्रिय हो गए. लोगों के बीच उनका रुतबा ऐसा था कि उन्हें सालार-ए-मिल्लत कहा जाने लगा. खासकर मुस्लिम आबादी के लिए वे काफी काम करते. तब ओवैसी को हैदराबाद की राजनीति में सबसे मजबूत व्यक्ति माना जाने लगा.
ओवैसी के दबदबे का अंदाजा इसी बात से लगा लीजिए कि वे 4 दशक के अपने राजनैतिक करियर में लगातार छह बार हैदराबाद से सांसद रहे. उन्हें ऐसा व्यक्ति माना जाता था जो आंध्र प्रदेश में मुस्लिम वोट बैंक को किसी भी पार्टी को समर्थन देने के लिए झुका सकता था.

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