
अमेरिका में बसे कितने भारतीय हैं हिंदू? जानें- सालभर में कितनी है कमाई
AajTak
अमेरिकी थिंक टैंक प्यू रिसर्च सेंटर के सर्वे में शामिल 48 फीसदी भारतीय मूल के अमेरिकी हिंदू हैं. यह आंकड़ा 2012 में हुए सर्वे के लगभग समान ही है. उस समय भारतीय मूल के 51 फीसदी अमेरिकी नागरिकों ने खुद को हिंदू बताया था.
अमेरिका में एक अच्छी खासी भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिकों की है. इन्हीं भारतवंशी नागरिकों को लेकर अमेरिकी थिंक टैंक प्यू (Pew) ने एक सर्वे किया है, जिससे पता चला है कि खुद को भारतीय बताने वाले एशियाई मूल के लगभग आधे अमेरिकी नागरिकों का कहना है कि वे हिंदू धर्म का पालन करते हैं. इनकी संख्या 48 फीसदी है.
अमेरिकी थिंक टैंक प्यू रिसर्च सेंटर के सर्वे में शामिल 48 फीसदी भारतीय मूल के अमेरिकी हिंदू हैं. यह आंकड़ा 2012 में हुए सर्वे के लगभग समान ही है. उस समय भारतीय मूल के 51 फीसदी अमेरिकी नागरिकों ने खुद को हिंदू बताया था. सर्वे में कहा गया है कि अमेरिका में एशियाई मूल के 10 अमेरिकी नागरिकों में से एक हिंदू धर्म का पालन कर रहा है.
इसके अलावा एशियाई मूल के छह फीसदी अमेरिकी ऐसे हैं जो खुद को हिंदू धर्म के काफी करीब मानते हैं. कुल मिलाकर कहें तो दो- तिहाई भारतवंशी अमेरिकी नागरिकों ने या तो खुद को हिंदू बताया है या फिर उन्होंने हिंदू धर्म के प्रति झुकाव का खुलासा किया है.
प्यू के सर्वे में शामिल एशियाई मूल के अमेरिकी हिंदुओं में से एक-तिहाई को लगता है कि उनकी जिंदगी में धर्म का विशेष महत्व है. इनमें से 38 फीसदी लोगों ने धर्म को जरूरी बताया है. सर्वे से पता चला है कि 31 फीसदी लोगों का कहना है कि वे महीने में कम से कम एक बार पूजा जरूर करते हैं.
सर्वे में शामिल एशियाई मूल के अमेरिकी नागरिकों में ऐसे हिंदुओं की संख्या सबसे अधिक है, जो घर में पूजा के लिए मंदिर, तस्वीरों या फिर धार्मिक प्रतीकों का इस्तेमाल करते हैं. इनमें से 79 फीसदी लोग इसका पालन करते हैं. इनमें धर्म को प्राथमिकता देने वाले हिंदुओं की संख्या 89 फीसदी हुई है.
कितना कमाते हैं?

कोलंबिया में एक विमान क्रैश हो गया, हादसे में मरने वालों की संख्या 66 हो गई है. कोलंबिया वायुसेना का विमान हरक्यूलिस सी-130 विमान रनवे से उड़ान भरते समय क्रैश कर गया. कोलंबियाई वायु सेना के विमान हादसे के बाद तुरंत बचावकर्मी मौके पर पहुंचे और अभियान शुरू किया. जानकारी के मुताबिक विमान में 125 लोग सवार थे.

ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बघेर गलीबाफ ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा अमेरिका-ईरान वार्ता का दावा फर्जी बताया. उनका कहना है कि यह वित्तीय और तेल बाजार को प्रभावित करने और अमेरिका-इजरायल की रणनीतिक विफलताओं से ध्यान हटाने के लिए फैलाया गया. ईरान ने किसी भी वार्ता की पुष्टि से इनकार किया.











