
अब Noida की महिला ने काट डाले अपने बाल, Insta पर शेयर किया वीडियो, भड़कती जा रही है ईरानी हिजाब क्रांति की आग
AajTak
Hijab Protest In Iran: ईरानी से निकली हिजाब क्रांति की चिंगारी अब भारत तक पहुंच गई है. यहां उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्धनगर जिले (Noida) की एक महिला ने अपने बाल काटकर ईरानी महिलाओं को समर्थन दिया है. डॉ. अनुपमा भारद्वाज नाम की महिला ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी शेयर किया है.
ईरान में हिजाब को लेकर महिलाएं मैदान में उतरी हुई हैं. हिजाब के विरोध में जगह-जगह विरोध प्रदर्शन कर रही हैं. ईरानी महिलाओं के समर्थन में दुनियाभर की महिलाएं सामने आ रही हैं अब भारत में भी इस आंदोलन की चिंगारी पहुंच गई है. दिल्ली से सटे यूपी के नोएडा की एक महिला ने अपने बाल काटकर ईरानी महिलाओं के प्रदर्शन को समर्थन दिया है.
नोएडा के सेक्टर-15 A निवासी डॉ. अनुपमा भारद्वाज ने अपने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया, जिसमें वो अपने बाल खुद काटती दिख रही थीं. डॉ. अनुपमा ने यह कदम ईरानी महिलाओं के समर्थन में उठाया है.
डॉ. अनुपमा का कहना है कि हम 21वीं सदी में पहुंच गए हैं. उसके बावजूद इस तरह की घटनाएं दुख पहुंचाती हैं. बात किसी धर्म की नहीं है. बात महिला अधिकारों की है. भारत में भी महिलाओं के लिए कई समस्याएं हैं, जिन पर बात करने की जरूरत है और यह समय सबसे ठीक है. उन्होंने कहा कि माहसा आमिनी के समर्थन से उस सोच का ध्यान आकर्षित करना है जो धर्म और समाज के बाधाओं की बात कहकर महिलाओं का शोषण कर रहे हैं और महिला अधिकारों का गला घोंट रहे हैं. देखें Video:-
बता दें कि ईरान में हिजाब के विरोध में गिरफ्तार हुई 22 साल कुर्दिश महिला माहसा अमिनी की पुलिस की गिरफ्तारी के बाद मौत हो गई थी. जिसके बाद ईरानी महिलाओं ने वहां की सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. लगातार ईरान की महिलाएं देशभर में हिजाब के खिलाफ प्रदर्शन कर रही हैं, जिसके लिए उन्हें दुनियाभर की महिलाओं का समर्थन मिल रहा है.
बॉलीवुड अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा ने भी हिजाब को लेकर ईरानी महिलाओं का समर्थन किया है. पता हो कि बेल्जियम की विदेश मंत्री और दो अन्य सांसदों ने भी ईरानी महिलाओं को अपना समर्थन देते हुए संसद में अपने बाल कटवाए.

आज हम आपको अद्भुत, अविश्वसनीय, अकल्पनीय हथियारों से रूबरू कराने वाले हैं. कुछ जो इंसान के बचाव के लिए बने हैं और कुछ केवल विनाश के लिए. डोनाल्ड ट्रंप जिस वक्त अमेरिका की ताकत पर इतरा रहे थे, बता रहे थे कि उन्होंने ईरान की ताकत को मिट्टी में मिला दिया है. इसके कुछ घंटे बाद ईरान ने इजरायल पर आज तक के सबसे बड़े हमले को अंजाम दिया.

कतर के समुद्री इलाके में रविवार को एक बड़ा सैन्य हादसा हो गया. रूटीन ड्यूटी पर निकला एक हेलीकॉप्टर तकनीकी खराबी की वजह से क्रैश होकर समुद्र में जा गिरा. इस दर्दनाक हादसे में कतर और तुर्की सेना के 5 जवानों समेत 2 टेक्नीशियनों की मौत हो गई. दोनों देशों के रक्षा मंत्रालयों ने इस घटना की पुष्टि करते हुए गहरा दुख जताया है.

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी है. उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कहा कि अगर ईरान 48 घंटे के भीतर होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह सुरक्षित और खोलता नहीं है, तो अमेरिका ईरान के पावर प्लांट्स पर हमला करेगा. ट्रंप ने लिखा कि अमेरिका सबसे बड़े पावर प्लांट से शुरुआत करते हुए उन्हें नष्ट कर देगा. देखें वीडियो.

मिडिल ईस्ट संकट का असर अब श्रीलंका की अर्थव्यवस्था पर साफ दिखने लगा है. सरकार ने ईंधन कीमतों में करीब 25% की भारी बढ़ोतरी कर दी है, जिससे आम जनता और परिवहन क्षेत्र पर दबाव बढ़ गया है. बस ऑपरेटरों ने हड़ताल की चेतावनी दी है, जबकि महंगाई बढ़ने की आशंका जताई जा रही है. ऊर्जा संकट ने 2022 जैसी आर्थिक चुनौतियों की यादें ताजा कर दी हैं.

अमेरिका की 250वीं स्वतंत्रता वर्षगांठ पर जारी होने वाले विशेष सोने के सिक्के को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. प्रस्तावित सिक्के पर डोनाल्ड ट्रंप की तस्वीर छापने के फैसले ने कानूनी और राजनीतिक बहस छेड़ दी है. जहां ट्रंप समर्थक इसे राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक बता रहे हैं, वहीं विरोधी इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बता रहे हैं.

जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी ने रविवार को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बिछी बारूदी सुरंगों को हटाने का प्रस्ताव रखा है. उन्होंने कहा है कि यदि अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच सीजफायर हो जाता है तो जापान होर्मुज जलडमरूमध्य में बिछी समुद्री बारूदी सुरंगों (नेवल माइंस) को हटाने के लिए अपने अत्याधुनिक 'माइनस्वीपर' जहाज तैनात करेगा.

ईरान जंग से तेल $112 प्रति बैरल तक पहुंच रहा है. एयरलाइंस उड़ानें काट रही हैं. ट्रांसपोर्ट महंगा हो रहा है. जापान, दक्षिण कोरिया, बांग्लादेश में फ्यूल राशनिंग शुरू हो गई है. IEA का 10-पॉइंट प्लान आ गया है. दुनियाभर की सरकारें इसे एनर्जी सिक्योरिटी कहेंगी, लेकिन असर लॉकडाउन जैसा दिखना शुरू हो चुका है. इस बार चेतावनी भी नहीं मिलेगी.






