
'अगर सांसद को टेरर फंडिंग केस में रिहा किया तो...', इंजीनियर राशिद की याचिका पर दिल्ली HC ने NIA से पूछा
ABP News
बेंच ने NIA के सीनियर वकील से मौखिक रूप से यह निर्देश लेने को कहा कि क्या रिहाई के मामले में राशिद के मूवमेंट को किसी खास ज्योग्राफिकल एरिया तक सीमित किया जा सकता है, क्योंकि वो मौजूदा सांसद हैं.
दिल्ली हाई कोर्ट ने गुरुवार को नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) से पूछा कि अगर बारामूला के सांसद ए. राशिद को टेरर फंडिंग केस में बेल पर रिहा किया जाता है तो क्या वह उनके मूवमेंट को किसी खास ज्योग्राफिकल एरिया तक सीमित करने पर विचार करेगी. जस्टिस प्रतिभा एम सिंह और मधु जैन की बेंच राशिद की अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उन्होंने पिछले साल उन्हें बेल देने से मना करने वाले ट्रायल कोर्ट के ऑर्डर को चुनौती दी थी.
राशिद की ओर से पेश सीनियर वकील ने कहा कि वह साढ़े छह साल से ज़्यादा समय से कस्टडी में हैं और उन्हें पहले दो बार इंटरिम बेल दी गई थी. उन्होंने कोर्ट को बताया कि राशिद ने न तो बेल की शर्तों का उल्लंघन किया और न ही उस दौरान कोई शिकायत का सामना किया. वकील ने दलील दी कि NIA का यह डर कि वह गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं, बेबुनियाद है और बताया कि उन्हें पहले कस्टडी में पार्लियामेंट में जाने की इजाजत दी गई थी.
बेंच ने एनआईए के वकील को क्या निर्देश दिए है?
सुनवाई के दौरान, बेंच ने NIA के सीनियर वकील से मौखिक रूप से यह निर्देश लेने को कहा कि क्या रिहाई के मामले में राशिद के मूवमेंट को किसी खास ज्योग्राफिकल एरिया तक सीमित किया जा सकता है, यह देखते हुए कि वह मौजूदा मेंबर ऑफ पार्लियामेंट हैं.













