
Uttar Pradesh MoTN survey : आश्चर्य, राम मंदिर लहर के बावजूद यूपी में BJP की 70 ही सीटें!
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India Today-Aajtak MoTN survey जनवरी का है. पर फरवरी में जिस तरह उत्तर प्रदेश की राजनीति बदल रही है वो अलग कहानी कह रही है. 2024 के लोकसभा चुनावों में यूपी 2014 वाले मोड में जा रहा है, अगर ऐसी ही स्थितियां रह गईं तो बीजेपी की सीटों का आंकड़ा और बढ़ सकता है.
केशव प्रसाद मौर्य कह रहे हैं कि हमारे आंतरिक सर्वे में हम 78 सीटें जीत रहे हैं. जबकि ब्रजेश पाठक 80 सीटें जीतने का दावा कर रहे हैं. जबकि India Today-Aajtak MoTN survey के मुताबिक यूपी में भाजपा 70 लोकसभा सीटों में जीतती दिख रही है. जान लीजिये कि 2014 के चुनाव में भाजपा ने तब 71 सीटें जीती थीं, जब राम मंदिर नहीं था. भाजपा निश्चित ही जीत के आंकड़े को और आगे ले जाना चाहेगी. भले इसके लिए RLD के जयंत चौधरी को साधना पड़े. जनवरी में जब MoTN सर्वे हुआ था, तब तक BJP-RLD के रिश्ते का जन्म नहीं हुआ था. सवाल यह उठता है कि अगर राम मंदिर की लहर के बावजूद अगर बीजेपी को मात्र यूपी से 70 सीटें मिलती दिख रही हैं तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 370 लोकसभा सीटों के टार्गेट का क्या होगा? पर जिस तरह उत्तर प्रदेश की राजनीति 2024 के चुनावों में 2014 वाले मोड में जा रही है उससे तो यह लगता है कि बीजेपी कम से कम 77 सीटें जीत सकती है.
सपा का वोट परसेंट बढ़ना मतलब , बीजेपी के लिए मुश्किल
एमओटीएन की सर्वे बता रहा है कि इस बार समाजवादी पार्टी अपने वोटों में 2019 की तुलना में करीब 12 परसेंट की बढ़ोतरी कर रही है.चूंकि बीजेपी भी 2019 की तुलना में करीब 2 परसेंट की बढोतरी करती दिख रही है इसका मतलब है कि समाजवादी पार्टी अपने विपक्ष के साथियों का हिस्सा काटती दिख रही है. समाजवादी पार्टी की सीट संख्या भी पिछली बार (5) के मुकाबले 2024 में बढ़ती दिख रही है. इस बार समाजवादी पार्टी करीब 7 सीट जीतती हुई नजर आ रही है. मतलब साफ है कि इस बार बीजेपी और समाजवादी पार्टी मे आमने-सामने की दोतरफा जंग है.दोहरे जंग में दोनों पार्टियों में वोट ध्रुवीकरण का खेल होगा, जो बाजी मारेगा वो इस सर्वे से भी अधिक वोट पाने का हकदार होगा. ध्रुवीकरण से फायदा दोनों दलों को होने की उम्मीद होगी.
बीजेपी को मिले वोट क्या इशारा करते हैं
2014 के आम चुनाव में बीजेपी को 71 सीटें मिली थीं, जबकि सहयोगी अपना दल के 2 सांसद लोक सभा पहुंचे थे. बची हुई सात सीटों में से 5 मुलायम सिंह यादव के परिवार को मिलीं, और दो गांधी परिवार को. बहुजन समाज पार्टी को कोई सीट नहीं मिली थी.पर 2019 के चुनावों में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी का चुनावी गठबंधन हो गया जिसका फायद विपक्ष को मिला और बसपा को 10 सीट और समाजवादी पार्टी को 5 सीट जीतने में सफलता मिली. मतलब साफ था गठबंधन का असर कुछ खास नहीं पड़ा. खुद अखिलेश अपनी पत्नी डिंपल यादव को नहीं जिता सके. इस बार परिस्थितियां काफी कुछ 2014 जैसी रहने वाली हैं . क्योंकि इस बार समाजवादी पार्टी और बहुजन समाजवादी पार्टी एक बार फिर अलग-अलग चुनाव लड़ रहीं हैं. पर देखा जाए तो इस बार 2014 से भी बुरी स्थित हो सकती है विपक्ष की. क्योंकि पिछली बार अमेठी विपक्ष के हाथ से जा चुका है. आजमगढ़ और रामपुर जैसे गढ़ भी विपक्ष के हाथ से निकल चुके हैं. रायबरेली से अगर सोनिया गांधी इस बार चुनाव नहीं लड़ती हैं तो यहां से भी बीजेपी की एक सटी पक्की ही होगी. इस तरह 2014 की परिस्थितियों में बीजेपी को करीब 77 सीट मिलती दिख रही है.

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