
Ukraine की शिकायत... Russia ने उसकी तरफ दागी Zircon हाइपरसोनिक मिसाइल, जानिए इसकी ताकत
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Ukraine ने दावा किया है कि Russia ने अपनी सबसे घातक हाइपरसोनिक मिसाइल Zircon से उस पर हमला किया है. इस मिसाइल ने 11 हजार किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से यूक्रेनी टारगेट पर सटीक निशाना लगाया. दो साल से चल से जंग में पहली बार इस खतरनाक मिसाइल का इस्तेमाल किया गया है.
रूस ने अपनी सबसे घातक मिसाइलों में से एक Zircon से यूक्रेन के किसी ठिकाने पर हमला किया. दो साल से चल रही जंग में पहली बार रूस ने अपनी इस हाइपरसोनिक मिसाइल का इस्तेमाल किया है. इस मिसाइल की गति ही इसे सबसे ज्यादा खतरनाक बनाती है.
जिरकॉन हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल को 3M22 Tsirkon भी कहते हैं. कुछ महीनों पहले रूस ने इस मिसाइल का सफल परीक्षण भी किया था. जिसमें इस मिसाइल को एक जंगी जहाज से दागा जा रहा है. राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (President Vladimir Putin) ने तब कहा था कि ये दुनिया की सबसे खतरनाक क्रूज मिसाइल है.
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1 सेकेंड में 3.1 किलोमीटर करती है कवर
जिरॉकन आवाज की गति से 9 गुना ज्यादा स्पीड में टारगेट की तरफ बढ़ती है. यानी जिरकॉन एक घंटे में 11 हजार किलोमीटर की स्पीड से चलती है. इसकी लंबाई 30 फीट है. व्यास 24 इंच है. अधिकतम रेंज 1500 km है. इसमें 200 Kt tnw परमाणु हथियार लगा सकते है. इसमें स्क्रैमजेट इंजन लगा है. यह अधिकतम 28 km की ऊंचाई तक जा सकती है.
अमेरिका के टोमाहॉक से 11 गुना ज्यादा तेज

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भले ही मीडिया के सामने सेना भेजने की बात से इनकार किया हो, लेकिन 2,200 मरीन सैनिकों के साथ यूएसएस त्रिपोली युद्धपोत का मिडिल ईस्ट की ओर बढ़ना कुछ और ही इशारा कर रहा है. ट्रंप का मुख्य मकसद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के तेल मार्ग को ईरान के कब्जे से छुड़ाना और वहां दबे यूरेनियम भंडार को सुरक्षित करना है. अगर ये सेना तैनात होती है, तो यह पिछले दो दशकों में अमेरिका का सबसे बड़ा सैन्य कदम होगा.

महायुद्ध तीसरे हफ्ते में पहुंच गया है...लेकिन बम-बारूद-गोले थम ही नहीं रहे ..। कहां तो युद्ध ईरान को न्यूक्लियर पावर बनने से रोकने के लिए शुरू हुआ...और कहां ये जंग तेल युद्ध बनकर दुनिया को धधका रहा है...। समझ नहीं आ रहा कि ये जंग किसे धुरंधर बना रहा...एक तरफ तबाही है...तो दूसरी तरफ तेल-गैस-हीलियम संकट...जो हर घर...हर परिवार पर असर डाल रहा है..

अमेरिका-इजरायल और ईरान युद्ध में अब तेल-गैस के ठिकानों पर हमले से तनाव बढ़ गया है. पूरे दुनिया पर ऊर्जा का संकट बढ़ता जा रहा है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने से तेल के बाजार में पहले ही उथल-पुथल मची है. अब दोनों ओर से ताजा हमलों से पूरी दुनिया महंगाई के बड़े संकट की ओर बढ़ती जा रही है. देखें लंच ब्रेक.

चाहे हालात शांति के हों या युद्ध जैसे तनावपूर्ण, जिंदगी कभी नहीं रुकती, इसकी मिसाल लेबनान में देखने को मिली. मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के बीच यहां दुनिया के अलग-अलग देशों से आए हजारों लोग, जो काम के सिलसिले में लेबनान में रह रहे हैं, उन्होंने इजरायली हमलों और तमाम चुनौतियों के बावजूद ईद-उल-फितर का त्योहार पूरे उत्साह के साथ मनाया. संघर्ष और अनिश्चितता के बीच भी लोगों ने एक-दूसरे के साथ खुशियां साझा कीं.

होर्मुज को लेकर तनातनी जारी है. इस बीच छह देशों ने एक बयान जारी किया है ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान और नीदरलैंड्स ने कहा है कि वे हॉर्मुज़ में सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करने के लिए अपना योगदान देने के लिए तैयार हैं. हालांकि, इटली, जर्मनी और फ्रांस ने बाद में स्पष्ट किया कि वे तत्काल किसी सैन्य सहायता की बात नहीं कर रहे हैं. इन देशों ने क्या शर्त रखी है. जानें.

ईरान ने 66वें राउंड का हमला शुरू कर दिया है. ईरान ने मिसाइलों के जरिए इजरायल पर 66वें राउंड के हमले किए हैं. इधर ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने एक बहुत बड़ा दावा किया है .IRGC ने अमेरिकी सेना के एक F-35 लड़ाकू विमान पर हमले का दावा किया है और इसका वीडियो भी जारी किया है. दावे के मुताबिक अमेरिकी लड़ाकू विमान को काफी नुकसान पहुंचा है. देखें 9 बज गए

ईरान ने सोचा था कि वो सिर्फ अपने जज्बे और कुछ मिसाइलों और ड्रोन के भरोसे जंग जीत लेगा. इसी ओवर-कॉन्फिडेंस वो मात खाता जा रहा है, जब उसके एक के बाद एक बड़े नेता ताबूत में बंद होते दिखाई दे रहे हैं. ईरानी जज्बे का मुकाबला इजरायली इंटेलिजेंस यानी दुनिया के सबसे बड़े खुफिया नेटवर्क से है. वो नेटवर्क जो ईरानी नेताओं के बेडरूम तक घुसा हुआ है.






