
'SC के फैसले के बाद टैरिफ का क्या होगा, साफ-साफ बताओ', ट्रंप प्रशासन को EU की दो टूक
AajTak
यूरोपीय संघ ने अमेरिका से पिछले साल हुए व्यापार समझौते की शर्तों का सख्ती से पालन करने की मांग की है. यूरोपियन कमीशन ने कहा कि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अगर ट्रंप प्रशासन टैरिफ में कोई बढ़ोतरी करता है तो इसे स्वीकार नहीं करेंगे.
यूरोपीय संघ (EU) ने स्पष्ट किया है कि वह अमेरिका द्वारा टैरिफ में किसी भी तरह की बढ़ोतरी स्वीकार नहीं करेगा. यूरोपियन कमीशन ने रविवार को कहा कि अमेरिका को पिछले साल हुए व्यापार समझौते की शर्तों का पूरी तरह पालन करना होगा. यह प्रतिक्रिया तब आई, जब अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने डोनाल्ड ट्रंप द्वारा विभिन्न देशों पर लगाए गए व्यापक टैरिफ को असंवैधानिक बताते हुए रद्द कर दिया. यूरोपीय संघ में शामिल 27 सदस्य देशों की ओर से यूरोपियन कमीशन ही दूसरे देशों के साथ ट्रेड पॉलिसी तय करता है.
इस फैसले के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने अस्थायी तौर पर सभी देशों पर 15% ग्लोबल टैरिफ लगा दिया. यूरोपियन कमीशन ने कहा कि ट्रंप प्रशासन को सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद उठाए जाने वाले कदमों पर 'पूर्ण स्पष्टता' देनी होगी. कमीशन के अनुसार, मौजूदा हालात 'निष्पक्ष, संतुलित और परस्पर लाभकारी' ट्रांसअटलांटिक ट्रेड के अनुकूल नहीं हैं. यूरोपियन कमीशन ने दो टूक कहा, 'समझौता, समझौता होता है' और उसका पालन होना चाहिए.
यह भी पढ़ें: US To Halt Tariff Collections: कल से ट्रंप टैरिफ वसूली पर ब्रेक, US सुप्रीम कोर्ट ने बताया था गैरकानूनी
अमेरिका और यूरोपीय संघ के बीच पिछले साल हुए समझौते के तहत ईयू के अधिकतर वस्तुओं पर 15% टैरिफ तय हुआ था, जबकि कुछ उत्पादों- जैसे विमान और स्पेयर पार्ट्स पर 0 टैरिफ रखा गया था. बदले में यूरोपीय संघ ने कई अमेरिकी वस्तुओं पर टैरिफ हटाए थे. अब सवाल है कि ट्रंप द्वारा घोषित नए 15% ग्लोबल टैरिफ क्या इस समझौते से ऊपर होंगे. अगर ऐसा हुआ, तो यूरोपीय संघ को मिली जीरो-टैरिफ छूट खत्म हो सकती है.
ट्रेड पॉलिसी मॉनिटर 'ग्लोबल ट्रेड अलर्ट' के मुताबिक, इससे पूरे यूरोपीय संघ को 0.8 परसेंट पॉइंट का नुकसान हो सकता है, जबकि इटली पर 1.7 परसेंट पॉइंट का अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है. यूरोपियन कमीशन ने कहा कि अनिश्चित टैरिफ वैश्विक बाजारों में भरोसा कमजोर करते हैं. इस बीच यूरोपीय संघ के ट्रेड कमिश्नर मारोस सेफकोविक ने शनिवार को अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जैमीसन ग्रीर और कॉमर्स सेक्रेटरी हॉवर्ड लुटनिक से इस मुद्दे पर चर्चा की.

अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने गुरुवार को कहा कि वैश्विक आपूर्ति बढ़ाने और कीमतों को कम करने में मदद करने के लिए अमेरिका जल्द ही टैंकरों में फंसे ईरानी तेल पर लगे प्रतिबंध हटा सकता है. बेसेंट ने कहा कि प्रतिबंधित ईरानी तेल के वैश्विक आपूर्ति में शामिल होने से अगले 10 से 14 दिनों तक तेल की कीमतें कम रखने में मदद मिलेगी.

ईरान से अमेरिका-इजरायल की लड़ाई की आंच आज और भड़क गई. अपने सबसे बड़े गैस फील्ड साउथ पार्स पर इजरायल के हमले के जवाब में ईरान ने बीती रात से खाड़ी देशों में कई अहम तेल और गैस के ठिकानों पर हमला किया है. इन हमलों का असर ये है कि आज भारत के समय से दोपहर 3 बजे तक ब्रेंट क्रूड ऑयल 118 डॉलर प्रति बैरल की सीमा को पार कर गया था. इसका असर शेयर बाजार से लेकर सोने-चांदी की कीमतों पर पड़ा है. जहां शेयर बाजार में जबरदस्त गिरावट आयी वहीं सोने-चांदी की कीमतें भी टूट गईं. भारत के शेयर बाजार से आज 12 लाख करोड़ से अधिक की संपत्ति साफ हो गई है. सवाल ये है कि क्या पश्चिम एशिया में अब युद्ध का रुख पूरी दुनिया को चपेट में ले चुका है ? इस बीच पहली बार 12 मुस्लिम देशों के विदेश मंत्रियों ने खाड़ी देशों पर ईरान के हमले के खिलाफ बयान जारी किया है. तो उधर राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान पर कड़ा रुख बरकरार रखने के बावजूद ईरानी गैस फील्ड पर इजरायल के हमले से पल्ला झाड़ा है.

अमेरिकी युद्ध मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा है कि आज ईरान पर अमेरिका अटैक का सबसे बड़ा पैकेज लॉन्च करने जा रहा है. जंग की जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि हमारे उद्देश्य कभी बदले नहीं हैं और ये जंग राष्ट्रपति ट्रंप की इच्छानुसार खत्म होगा. आज ही ईरान ने अपने स्टैंड को बताते हुए कहा था कि अभी उसका बदला पूरा नहीं हुआ है.

ईरान और अमेरिका के बीच छिड़ी जंग अब अपने सबसे निर्णायक और संभवतः सबसे खौफनाक मोड़ पर पहुंच गई है. आज डोवर एयरफोर्स बेस पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उन छह अमेरिकी नायकों को अंतिम विदाई दी, जिन्होंने एक विमान हादसे में अपनी जान गंवाई लेकिन इस शोक के बीच, वॉशिंगटन के गलियारों से एक ऐसी खबर आ रही है जो पूरी दुनिया को दहला सकती है. रॉयटर्स की एक एक्सक्लूसिव रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन अब ईरान में 'बूट्स ऑन द ग्राउंड' यानी थल सेना उतारने पर बेहद गंभीरता से विचार कर रहा है.

मैं श्वेता सिंह सीधे युद्ध भूमि से आपको महायुद्ध के बीसवें दिन की खबर बता रही हूं. कल ईरान की गैस फील्ड पर इजरायल के हमले के बाद लगातार चार खाड़ी देश के ऑयल-गैस डिपो-रिफाइनरी पर बड़ा हमला ईरान ने कर दिया है. ईरान ने सऊदी अरामको और यूएई के टर्मिनल के अलावा कतर के सबसे बड़े गैस टू लिक्वड प्लांट रास लफान पर मिसाइल हमला कर दिया. कतर के इस प्लांट से दुनिया को 20 से 25 प्रतिशत गैस की सप्लाई होती है. वहीं सऊदी अरब के यनबू पोर्ट पर स्थित सैमरेफ ऑयल रिफाइनरी पर हवाई हमला हुआ है.

अमेरिकी अधिकारियों के वॉशिंगटन आर्मी बेस के ऊपर कुछ अनजान ड्रोन देखे जाने बाद वहां हड़कंप मच गया है. इसी बेस पर विदेश मंत्री मार्को रूबियो और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ रहते हैं. अभी तक ये पता नहीं लग पाया है कि ये ड्रोन कहां से आए थे. इसके बाद सुरक्षा और बढ़ा दी गई है. इस पर व्हाइट हाउस में एक बैठक भी हुई है, जिसमें इस बात पर चर्चा हुई है कि इन हालातों से कैसे निपटा जाए.







