
SC का फैसला तल्ख टिप्पणियों के बावजूद शिंदे-BJP के लिए कैसे राहत है
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महाराष्ट्र में करीब एक साल से जारी सियासी ड्रामे के बीच सुप्रीम कोर्ट ने राज्यपाल और स्पीकर की भूमिका पर सवाल खड़े करते हुए तल्ख टिप्पणियां की हैं. सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणियों के बावजूद सुप्रीम कोर्ट का फैसला एकनाथ शिंदे और बीजेपी के लिए राहत भरा है. कैसे?
महाराष्ट्र में पिछले एक साल से सियासी ड्रामा चला आ रहा है. उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे की खींचतान से जुड़े मामले को सुप्रीम कोर्ट ने सात जजों की बेंच के पास भेज दिया है. सर्वोच्च अदालत ने महाराष्ट्र के गवर्नर और स्पीकर की भूमिका पर सवाल खड़े करते हुए तल्ख टिप्पणियां जरूर की हैं, लेकिन फैसला सीधे-सीधे एकनाथ शिंदे के लिए राहत भरा रहा. शिंदे ने उद्धव से बगावत कर बीजेपी के साथ गठबंधन कर सरकार बना ली थी. शिंदे के नेतृत्व वाली सरकार को फिलहाल किसी तरह का खतरा नहीं है.
SC ने दिया झटका, शिंदे के हाथ में रहेगी सत्ता
महाराष्ट्र की राजनीति में जिसके हाथों में सत्ता है, सुप्रीम कोर्ट का फैसला उसी के लिए अच्छा है. सत्ता शिंदे के हाथों में है तो फैसला भी उनके पक्ष में ही है. पिछले साल जून महीने से उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे गुट के बीच सियासी घमासान चला आ रहा था कि महाराष्ट्र की सत्ता संभालने का हक किसे है. सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने के बाद से शिंदे सरकार के सिर पर तलवार लटक रही थी कि उनकी कुर्सी रहेगी या नहीं?
उद्धव का इस्तीफा ही शिंदे की संजीवनी
सुप्रीम कोर्ट के फैसले से ये लगभग साफ हो गया है कि महाराष्ट्र में शिंदे-फडणवीस की सरकार बरकरार रहेगी. कोर्ट ने कहा कि उद्धव ठाकरे ने फ्लोर टेस्ट के बिना ही इस्तीफा दे दिया था इसलिए उन्हें फिर से मुख्यमंत्री नहीं बनाया जा सकता है. अगर उद्धव ने इस्तीफा नहीं दिया होता तो उन्हें फिर से मुख्यमंत्री बनाने पर विचार किया जा सकता था. इस तरह फैसले का पूरा राजनीतिक फायदा सीधे-सीधे शिंदे को मिला है. कोर्ट ने न तो शिंदे को सत्ता से हटने के लिए कहा है और ना ही उनकी सदस्यता ही खत्म की है.
कोर्ट ने स्पीकर के पाले में डाली गेंद

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