
'Sardar Patel के अंतिम संस्कार में कोई न जाए, Nehru ने जारी की थी चिट्ठी', देखें Sambit Patra का दावा
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जम्मू कश्मीर में आतंकी लगातार बेगुनाहों को निशाना बना रहे हैं. पिछले 16 दिनो में 11 लोगों की हत्या की गई है. लेकिन घाटी में दहशत के बीच सरदार वल्लभ भाई पटेल को लेकर सियासत सुलगने लगी है. दो दिनों पहले CWC की बैठक में जम्मू कश्मीर के नेता तारिक हामिद कर्रा ने कश्मीर को लेकर पटेल और नेहरु के बीच हुई बातचीत का हवाला दिया तो बीजेपी ने आरोप लगा दिए कि पटेल को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है. आज हल्ला बोल में इसी मुद्दे पर बहस देखने को मिली. बहस के दौरान संबित पात्रा ने दावा किया कि नेहरू ने चिट्ठी जारी कर कहा कि सरदार पटेल के अंतिम संस्कार में कोई न जाए. देखें गौरव वल्लभ ने क्या दिया जवाब.

7 राज्य, 26 ठिकाने और ED का एक्शन... इंटरस्टेट ड्रग सिंडिकेट का भंडाफोड़, PMLA के तहत चल रही है जांच
ED ने PMLA के तहत गोवा समेत 7 राज्यों में मौजूद 26 ठिकानों पर छापेमारी की और इंटरस्टेट ड्रग तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग सिंडिकेट का पर्दाफाश कर दिया. यह एक बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है. पढ़ें इस मामले की पूरी कहानी.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कहते हैं कि पंचायत से पार्लियमामेंट तक जनता का विश्वास बीजेपी के साथ है. इसी विश्वास की नई किस्त महाराष्ट्र से आई है. देश में लगातार तीन बार मोदी सरकार. देश के बीस राज्यों में NDA की सरकार. केरल तक में बीजेपी की जीत. तिरुवनंतपुरम नगर निगम चुनाव में कमल खिलने के बाद आज महाराष्ट्र में भी नया इतिहास रचा गया है.

आज के बीएमसी चुनाव में भाजपा ने मुम्बई में बड़ी सफलता हासिल की है. पिछले चालीस वर्षों में पहली बार भाजपा बीएमसी की मेयर की कुर्सी संभालने को तैयार है. भाजपा ने विकास कार्यों को अपनी प्राथमिकता बनाया है और जनता ने इसे स्वीकार किया है. चुनाव की मतगणना अभी चल रही है, लेकिन शुरुआती रुझान साफ दिखा रहे हैं कि भाजपा और उसके गठबंधन को भारी बहुमत मिलेगा. विपक्ष खासकर शिवसेना के लिए यह चुनाव चुनौतीपूर्ण रहा है. उद्धव ठाकरे की पार्टी को कुछ सीटें मिली हैं पर भाजपा की बढ़त स्पष्ट है.

बीएमसी चुनाव में बीजेपी-शिवसेना शिंदे गुट का गठबंधन आगे चल रहा है. ठाकरे बंधुओं और एनसीपी-एसपी का गठबंधन भी 80 से अधिक सीटों पर बढ़त बनाए हुए है. Axis My India के एमडी प्रदीप गुप्ता ने कहा है कि हार के बावजूद ठाकरे बंधु मराठी बहुल इलाकों, खासकर ग्रेटर मुंबई में अपनी साख बचाने में कामयाब रहे हैं. हार के बावजूद उनके वजूद पर सवाल नहीं उठाए जा सकते.









