
Raaj Ki Baat: क्या उत्तराखंड चुनाव से पहले बदल जाएगा मुख्यमंत्री का चेहरा?
ABP News
राज की बात है कि तीरथ के नेतृत्व में उत्तराखंड के चुनाव होना लगभग असंभव है. चुनाव से पहले उनकी विदाई लगभग तय है और राज की बात ये है कि हो सकता है कि उत्तराखंड का नया मुख्यमंत्री दिल्ली से भेजा जाए.
राज की बातः देवभूमि की सियासी किस्मत बदलना शायद किसी के बूते में नहीं. सरकार चाहे बीजेपी की हो या कांग्रेस. बमुश्किल ही यहां पांच साल एक मुख्यमंत्री से पूरे हो पाते हों. वैसे तो मोदी-शाह की जोड़ी ने तमाम राज्यों के सियासी चरित्र को बदल कर रख दिया. मगर उत्तराखंड में एक सरकार एक मुख्यमंत्री चला पाए, यह वो भी नहीं कर सके. त्रिवेंद्र सिंह रावत की जगह तीरथ सिंह रावत को लाना पड़ा. यह तो पता है, लेकिन तीरथ सिंह रावत का मुख्यमंत्री बनना अगर चौंकाने वाला था तो उनकी विदाई का कारण और भी ज्यादा चौंकाने वाला है. जी, राज की बात ये है कि तीरथ रावत को इसलिए मुख्यमंत्री पद छोड़ना पड़ेगा, क्योंकि विधानसभा में उनको सीट नहीं मिल पाएगी. मतलब वो विधायक बन पाएंगे, इसकी उम्मीद न के बराबर है. दरअसल, जनप्रतिनिधि कानून 1951 के तहत कोई भी लोकसभा या राज्यसभा सीट खाली होने के छह माह के अंदर चुनाव कराना होता है. इस हिसाब से उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की आठ खाली पड़ी सीटों पर चुनाव सितंबर तक कराना होगा. इसके तहत यदि किसी लोकसभा या विधानसभा सदस्य के कार्यकाल के एक साल बाकी हैं तो अपवादस्वरूप चुनाव कराया जा सकता है.More Related News













