
Presidential Election 2022: शरद पवार के बाद अब फारुक अब्दुल्ला भी पीछे हटे, क्या ये है वजह?
AajTak
President election: राष्ट्रपति चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं. दरअसल इस चुनाव का मनोवैज्ञानिक असर लोकसभा चुनाव 2024 पर भी पड़ सकता है. विपक्ष के बड़े नेताओं की कोशिश है कि आम सहमति बनाकर ताकतवर एनडीए को टक्कर दी जाए.
राष्ट्रपति चुनाव (Presidential Election 2022) में विपक्ष के दो नेताओं ने मैदान में उतरने से साफ इनकार कर दिया है. सबसे पहले एनसीपी नेता शरद पवार (Sharad Pawar) ने चुनाव लड़ने से मना किया अब नेशनल कॉन्फ्रेंस के मुखिया और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारुक अब्दुल्ला (Farooq Abdullah) ने भी अनिच्छा जाहिर की है. फारुक अब्दुल्ला की ओर जारी एक बयान में कहा गया है कि वह ममता बनर्जी के आभारी हैं कि उन्होंने राष्ट्रपति चुनाव के लिए उनके नाम को आगे बढ़ाया और साथ ही उन नेताओं को भी धन्यवाद जिन्होंने समर्थन देने का वादा किया है.
जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम ने कहा, 'मैंने इस इस पर काफी विचार करने के बाद मेरा मानना है कि जम्मू-कश्मीर इस समय कठिन हालात से गुजर रहा है जिससे निपटने के लिए मेरी मदद की जरूरत है. इसलिए मैं अपना नाम इस आदर के साथ वापस लेता हूं. मैं ममता दीदी का आभारी हूं कि उन्होंने मेरा नाम का प्रस्ताव रखा है साथ ही उन नेताओं का आभारी हूं जिन्होंने मुझे समर्थन देने का वादा किया.'
15 जून को टीएमसी नेता ममता बनर्जी की ओर से बुलाई गई विपक्ष के नेताओं की बैठक में शरद पवार के साथ-साथ फारुक अब्दुल्ला, गोपाल कृष्ण गांधी और एनके प्रेमचंद्रन के भी नाम की चर्चा हुई है. दरअसल विपक्ष को राष्ट्रपति उम्मीदवार ढूंढने के साथ-साथ एनडीए को टक्कर देने के लिए अच्छे-खासे वोट का भी जुगाड़ करना है.
अगर राष्ट्रपति चुनाव की गणित के हिसाब से देखें तो राष्ट्रपति चुनाव जीतने के लिए कम से कम 5,43,216 वोट चाहिए होंगे. लोकसभा के 543 और राज्यसभा के 233 सदस्यों को वोटों को मिलाकर वैल्यू 543200 है. सभी राज्यों की विधानसभा सदस्यों की कुल वोट वैल्यू 543231 है. यानी संसद के सदस्यों और सभी विधानसभाओं के सदस्यों का कुल वोट वैल्यू 1086431 है.
देश की मौजूदा राजनीति में दो गठबंधन एनडीए और यूपीए ही अस्तित्व में हैं. राष्ट्रपति चुनाव के नजरिए से देखें तो एनडीए के पास करीब 48 फीसदी वोट हैं और उसके उम्मीदवार को जीतने के लिए 10 हजार से कुछ ज्यादा वोटों की जरूरत है. वहीं यूपीए के पास इस समय 23 फीसदी के आसपास वोट हैं. अगर संयुक्त विपक्ष की बात करें तो उसके पास करीब 51 फीसदी तक वोट हो जाते हैं.
लेकिन सभी विपक्षी पार्टियां एकजुट हो जाएंगी ये अभी दूर की कौड़ी नजर आती है. साल 2017 में हुए राष्ट्रपति चुनाव में बीजू जनता दल और वाईएसआर कांग्रेस ने एनडीए प्रत्याशी के पक्ष में वोट किया था. बीजेपी इस बार भी इन दोनों पार्टियों की अपने पाले में करने की कोशिश कर रही है. विपक्ष की ओर से भले ही इस चुनाव के लिए उम्मीदवारों के नाम सामने आ रहे हैं लेकिन एनडीए की ओर से अभी तक पत्ते नहीं खोले गए हैं. माना जा रहा है कि एनडीए में शामिल बीजेपी कोई चौंकाने वाला नाम आगे कर सकती है.

यूपी में जल जीवन मिशन में लापरवाही पर सरकार ने बड़ा एक्शन लिया है. 12 जिलों के 26 इंजीनियरों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए 12 को निलंबित किया गया, जबकि अन्य पर जांच, नोटिस और तबादले की कार्रवाई हुई है. खराब गुणवत्ता, धीमी प्रगति और शिकायतों के बाद यह कदम उठाया गया. सरकार ने स्पष्ट किया है कि हर घर नल योजना में किसी भी तरह की लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी.

कड़क है नॉर्थ बंगाल की चुनावी चाय! 54 सीटों में छुपा सत्ता का स्वाद, स्विंग वोटर्स करेंगे असली फैसला
उत्तर बंगाल की 54 सीटें पश्चिम बंगाल की सत्ता की चाबी मानी जाती हैं, जहां चुनावी ‘चाय’ का स्वाद हर बार बदलता है. टीएमसी और बीजेपी के बीच सीधी टक्कर में यह इलाका स्विंग जोन की भूमिका निभाता है. चाय बागान, पहाड़ी राजनीति, आदिवासी और राजवंशी वोटबैंक जैसे कई फैक्टर नतीजों को प्रभावित करते हैं. छोटे वोट शिफ्ट भी यहां बड़ा असर डाल सकते हैं, जिससे तय होगा कि राज्य की सत्ता किसके हाथ जाएगी.

मर तो वो 13 साल पहले गया था लेकिन मौत सचमुच तब उसके हिससे में आई जब इस चिता में लेटने के बाद जब हरीश की आत्मा की लाइट यानी रोशनी चिता से उठती इस आग के साथ मिलकर हमेशा-हमेशा के लिए ये दुनिया छोड़ गई. पर इस दुनिया को छोड़ने से पहले हरीश आजादा भारत के इतिहास का पहला भारतीय बन गया जिसे अदालत और अस्पताल ने मिलकर मां-बाप की इच्छा को ध्यान में रखते हुए इच्छामृत्यु दी.










