
Madhya Pradesh: गरबा में गए मुस्लिम लड़के गिरफ्तार, वायरल वीडियोज में कार्रवाई पर सवाल
AajTak
इंदौर के ऑक्सफोर्ड़ कॉलेज में गरबा के प्रोग्राम में वीएचपी और बजरंग दल ने जमकर हंगामा मचाया. विश्व हिंदू परिषद का आरोप है कि कॉलेज में चल रहे गरबा में मुस्लिम लड़कों को एंट्री दी गई. हिंदूवादी संगठन के लोगों ने लव जिहाद को बढ़ावा देने और धर्मविरोधी गतिविधि की बात करते हुए ऑक्सफोर्ड कॉलेज के संचालक पर भी गंभीर आरोप लगाए. इस गरबा कार्यक्रम में विश्व हिंदू परिषद यानी वीएचपी की रेड पड़ी और 4 मुस्लिम लड़कों को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया गया और उन्हें जेल भेज दिया गया. बजरंग दल का कहना है कि ये मुस्लिम लड़के गरबा कार्यक्रम में लव जेहाद फैलाने आए थे, कॉलेज को लव जेहाद का अड्डा बनाया जा रहा था. अब सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो वायरल हो रहे हैं, और कॉलेज में चल रहे गरबा पर हुई एक धर्म विशेष के खिलाफ कार्रवाई पर सवाल भी उठाए जा रहे हैं. देखें ये वीडियो.

उत्तर प्रदेश की सियासत में उल्टी गंगा बहने लगी है. मौनी अमावस्या के दिन स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के स्नान को लेकर हुआ विवाद अब बड़ा मुद्दा बन गया है. जहां खुद अविमुक्तेश्वरानंद के तेवर सरकार पर तल्ख हैं, तो वहीं बीजेपी पर शंकराचार्य के अपमान को लेकर समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रयागराज में संगम नोज तक पालकी पर जाकर स्नान करने से उन्हें रोका था.

झारखंड के लातेहार जिले के भैंसादोन गांव में ग्रामीणों ने एलएलसी कंपनी के अधिकारियों और कर्मियों को बंधक बना लिया. ग्रामीणों का आरोप था कि कंपनी बिना ग्राम सभा की अनुमति गांव में आकर लोगों को ठगने और जमीन हड़पने की कोशिश कर रही थी. पुलिस के हस्तक्षेप के बाद लगभग दो घंटे में अधिकारी सुरक्षित गांव से बाहर निकल सके.

दिल्ली के सदर बाजार में गोरखीमल धनपत राय की दुकान की रस्सी आज़ादी के बाद से ध्वजारोहण में निरंतर उपयोग की जाती है. प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल के बाद यह रस्सी नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाने लगी. इस रस्सी को सेना पूरी सम्मान के साथ लेने आती है, जो इसकी ऐतिहासिक और भावनात्मक महत्ता को दर्शाता है. सदर बाजार की यह रस्सी भारत के स्वाधीनता संग्राम और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक बनी हुई है. देखिए रिपोर्ट.

संभल में दंगा मामले के बाद सीजेएम के तबादले को लेकर विवाद शुरू हो गया है. पुलिस के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए गए थे लेकिन पुलिस ने कार्रवाई नहीं की. इस पर सीजेएम का अचानक तबादला हुआ और वकील प्रदर्शन कर रहे हैं. समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और AIMIM ने न्यायपालिका पर दबाव बनाने का आरोप लगाया है. इस विवाद में राजनीतिक सियासत भी जुड़ी है. हाई कोर्ट के आदेशानुसार जजों के ट्रांसफर होते हैं लेकिन इस बार बहस हुई कि क्या यहां राज्य सरकार ने हस्तक्षेप किया.









