
Kolkata Rape Murder Case: CBI के हाथ लगी ये अहम जानकारी, अब सामने आएगा कोलकाता कांड का सच!
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सुप्रीम कोर्ट को सौंपी गई सीबीआई की इस स्टेट्स रिपोर्ट के अंदर क्या है, ये तो पता नहीं. लेकिन आज तक को सीबीआई के सूत्रों से जो जानकारी हाथ लगी है, वो बेहद चौंकाने वाली है. तो स्टेट्स रिपोर्ट से हट कर आपको बताते हैं कि आखिर पिछले दस दिनों की जांच के बाद सीबीआई इस केस को लेकर किस नतीजे पर पहुंची है.
Kolkata Junior Doctor Rape & Murder: कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में जूनियर डॉक्टर का रेप और हत्या किए जाने के मामले में सीबीआई ने अपनी स्टेट्स रिपोर्ट अदालत को सौंप चुकी है. लेकिन उस स्टेट्स रिपोर्ट में क्या है? ये कोई नहीं जानाता. यहां तक कि उसके बारे में सुनवाई के दौरान मौजूद कई वकीलों को भी जानकारी नहीं है. वजह ये थी कि केस की जांच अभी जारी है. स्टेट्स रिपोर्ट का खुलासा जांच को प्रभावित भी कर सकता है. लेकिन अपनी दस दिनों की जांच में सीबीआई ने काफी कुछ हासिल किया है.
नहीं मिले इन सवालों के जवाब पिछले दस दिनों में सीबीआई ने इस केस में क्या जांच की? इस केस की सच्चाई क्या है? और कोलकाता पुलिस की जांच सीबीआई की जांच से कितनी मिलती जुलती या हट कर है? लेकिन चूंकि स्टेट्स रिपोर्ट बेहद गोपनीय थी, इसलिए इन सवालों के जवाब सामने नहीं आ पाए.
जांच में CBI को मिली अहम जानकारी सुप्रीम कोर्ट को सौंपी गई सीबीआई की इस स्टेटस रिपोर्ट के अंदर क्या-क्या है, ये तो पता नहीं. लेकिन आज तक को सीबीआई के सूत्रों से जो जानकारी हाथ लगी है, वो बेहद चौंकाने वाली है. तो स्टेट्स रिपोर्ट से हट कर आपको बताते हैं कि आखिर पिछले दस दिनों की जांच के बाद सीबीआई इस केस को लेकर किस नतीजे पर पहुंची है.
रेप नहीं गैंगरेप का मामला तो सीबीआई सूत्रों से आजतक को मिली जानकारी के मुताबिक आरजे कर अस्पताल की जूनियर डॉक्टर के साथ गैंगरेप नहीं हुआ था. बल्कि ये एक रेप था. और ये रेप और रेप के बाद जूनियर डॉक्टर का कत्ल करने वाला एक अकेला संजय रॉय था. वही संजय रॉय जिसे 9 अगस्त को ही कोलकाता पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था. और वही संजय रॉय जो फिलहाल सीबीआई की कस्टडी में है.
पुलिस और CBI की सेम लाइन सूत्रों के मुताबिक पहले कोलकाता पुलिस और फिर सीबीआई दोनों की लाईन ऑफ इन्वेस्टिगेशन मौका-ए-वारदात यानी उस सेमिनार हॉल को लेकर एक ही जैसी थी. दरअसल, सेमिनार हॉल की तरफ जाने वाले सीसीटीवी फुटेज में सिर्फ एक ही संदिग्ध नजर आया था और वो संजय रॉय ही था. इसके अलावा रात तीन से लेकर सुबह साढ़े पांच बजे तक सेमिनार हॉल की तरफ जाता कोई संदिग्ध मिला ही नहीं. जो कुछ लोग कैमरे में वहां से गुजरते दिखाई भी दिए, उनमें से ज्यादतर लोग तीन से पांच मिनट में अपने-अपने वार्ड या अपने-अपने काम में जुटे नजर आए. जिसका सबूत उन-उन जगहों पर लगे सीसीटीवी कैमरे ने दिया. यानी एक अकेला संजय रॉय था, जो 40 मिनट से ज्यादा सेमिनार हॉल में रहा. सेमिनार हॉल से बरामद ब्लूटूथ नेकबैंड और उसका कनेक्शन संजय रॉय के मोबाइल से होना भी इस केस में एक अहम सबूत बन गया.
संजय रॉय ने बताई अपनी करतूत सूत्रों के मुताबिक संजय रॉय ने 9 अगस्त को ही कोलकाता पुलिस के सामने अपना जुर्म कबूल कर लिया था. इसके बाद 14 अगस्त को जब वो सीबीआई हिरासत में गया, तब भी उसने ना सिर्फ अपना जुर्म कबूला, बल्कि घटना वाली रात और सुबह की पूरी कहानी बयान कर दी थी. लेकिन आरोपी के इकबालिया बयान के बावजूद पहले कोलकाता पुलिस और फिर सीबीआई ठोस सबूतों की तलाश में थी. और ये तलाश खत्म हुई फॉरेंसिक रिपोर्ट पर.

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