
Indian Railways: UP में पिछले 16 महीनों में 11,137 घंटे देरी से पहुंचीं ट्रेनें, वजह बने मवेशी
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Indian Railways, Train Late: ट्रेन से यात्रा करने वाले यात्रियों को कई बार स्टेशन पर ट्रेन का इंतजार करना पड़ता है. ट्रेन लेट होने के कई कारण हो सकते हैं, लेकिन उनमें से एक कारण है आवारा मवेशी. यूपी में आवारा मवेशियों के कारण करीब 11 हजार मिनट से भी ज्यादा ट्रेनें लेट हुईं हैं. पढ़िए ये रिपोर्ट.
Indian Railways, Bhartiya Rail: भारतीय रेलवे (Indian Railways) में हर रोज बड़ी संख्या में लोग यात्रा करते हैं. रेलवे यात्रियों की सुविधा के लिए हर मुमकिन कोशिश करता है. रेलवे का प्रयास रहता है कि यात्रियों को ट्रेन निर्धारित समय पर मिले और उन्हें ट्रेन का इंतजार नहीं करना पड़े. हालांकि, कई बार ऐसा होता है ट्रेनें अपने निर्धारित समय से लेट पहुंचतीं हैं. ट्रेन लेट होने के कई कारण हो सकते हैं. जिसमें से एक कारण हैं आवारा मवेशी. आवारा मवेशियों के कारण कई बार ट्रेनें निर्धारित स्टेशन पर देरी से पहुंचतीं हैं.
16 महीनों में 11,137 घंटे तक की हुई देरी टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 16 महीनों में उत्तर प्रदेश के चार भारतीय रेलवे जोन्स में हर रोज औसतन 39 पशु कटान (कैटल रन ओवर) की घटनाएं हुईं, जिसके परिणामस्वरूप ट्रेनों में कुल 11,137 घंटे तक की देरी हुई.
उत्तर मध्य रेलवे जोन में हुईं 9,725 घटनाएं रिपोर्ट से पता चलता है कि यूपी में जनवरी 2021 और अप्रैल 2022 के बीच कैटल रन ओवर (सीआरओ ) के 18,655 मामले सामने आए हैं. इन घटनाओं में 9,725 घटनाएं उत्तर मध्य रेलवे जोन में हुई हैं. इस जोन में देश के दो प्रमुख हाई-स्पीड कॉरिडोर- नई दिल्ली-प्रयागराज और नई दिल्ली- झांसी शामिल हैं.
उत्तर मध्य रेलवे जोन के प्रयागराज मंडल ने कैटल रन ओवर के 5,109 मामले दर्ज किए तो वहीं, झांसी और आगरा मंडल में 2,701 और 1,915 मामले दर्ज किए गए. बता दें, तीन मंडलों में से आगरा में फतेहाबाद से बाह और बाह से उदी मोड़ जंक्शन तक के हिस्सों में क्रमशः 153 और 105 सीआरओ प्रवण क्षेत्र हैं, जबकि झांसी मंडल में दतिया और सोनागीर के बीच के खंड में 98 सीआरओ प्रवण क्षेत्र हैं.
गतिमान एक्सप्रेस, शताब्दी, वंदे भारत एक्सप्रेस को भी हुई देरी गौरतलब है कि ये तीनों खंड चंबल के बीहड़ इलाके में आते हैं, जहां काफी संख्या में मवेशी घूमते हैं. पिछले 16 महीनों में उत्तर मध्य रेलवे में कैटल रन ओवर के कारण कुल 2,163 ट्रेनें सीधे प्रभावित हुईं, जिनमें गतिमान एक्सप्रेस, शताब्दी एक्सप्रेस, वंदे भारत एक्सप्रेस, विभिन्न राजधानी और दुरंतो जैसी देश की सबसे तेज ट्रेनें शामिल .
इसी तरह, उत्तर रेलवे ने लखनऊ डिवीजन में 3,774 और मुरादाबाद डिवीजन में 2,474 सहित 6,248 सीआरओ घटनाएं दर्ज कीं हैं, जबकि उत्तर पूर्व रेलवे ने 2,629 सीआरओ मामले दर्ज किए, जिसमें वाराणसी डिवीजन में 1,519 और लखनऊ में 1,110 शामिल हैं. वहीं, पूर्वी मध्य रेलवे दीन दयाल उपाध्याय मंडल ने 16 महीनों में केवल 53 सीआरओ दर्ज किए.

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