
Exclusive: 'बहुत भयानक था, धमाके जैसी आवाज फिर...', चमोली हादसे में फंसे मजूदरों ने सुनाई खौफनाक दास्तां
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चमोली हादसे के बाद अब भी 4 मजदूर लापता बताए जा रहे हैं. रेस्क्यू में सेना के 4 हेलिकॉप्टर्स के अलावा ITBP, BRO, SDRF और NDRF के 200 से ज्यादा जवान लगे हुए हैं.
उत्तराखंड (Uttarakhand) के चमोली में हुए हिमस्खलन में मांड़ा गांव में 55 मजदूर फंस गए थे. मजदूरों के बचाने के लिए रेस्क्यू कैंपेन जारी है. भारतीय वायुसेना के चीता हेलिकॉप्टर्स बचाव कार्य के तीसरे दिन भी अपना अभियान जारी रखे हुए हैं. अब तक कुल 50 लोगों को निकाला गया है, जिनमें कुल 46 लोग जिंदा हैं. वहीं, अब भी चार मजदूर लापता बताए जा रहे हैं. रेस्क्यू में सेना के 4 हेलिकॉप्टर्स के अलावा ITBP, BRO, SDRF और NDRF के 200 से ज्यादा जवान लगे हुए हैं.
अब तक 46 जीवित श्रमिकों को जोशीमठ के आर्मी अस्पताल में इलाज के लिए लाया जा चुका है. इस हादसे में चार लोगों की दुखद मृत्यु हो गई, जबकि चार अन्य की तलाश जारी है.
रेस्क्यू किए गए श्रमिकों ने आजतक के साथ बातचीत में खौफनाक दास्तान बयां की है. श्रमिकों ने बताया कि वे अपने कैंप में थे, तभी अचानक सुबह एक तेज विस्फोट जैसी आवाज आई. इसके बाद तेज हवाओं के झोंके के साथ उनके कंटेनर हवा में उड़ गए. कुछ वक्त तक किसी को कुछ समझ नहीं आया. उन्हें ऐसा महसूस हुआ जैसे बच पाना नामुमकिन था. फिर सेना और बचाव दल ने आकर रेस्क्यू किया.
रोड कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट में काम रहे थे श्रमिक
सभी श्रमिक सीमा सड़क संगठन (BRO) के रोड कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट में काम कर रहे थे. यह प्रोजेक्ट पूरे 12 महीने चलता रहता है. हालांकि, जब बर्फबारी और ठंड ज्यादा बढ़ जाती है, तो श्रमिक अपने कैंप में लौट आते हैं. मौसम साफ होने के बाद ही काम फिर से शुरू होता है.

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