
ED समन पर केजरीवाल और हेमंत सोरेन का स्टैंड एक जैसा, तैयारियां अलग-अलग क्यों?
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अरविंद केजरीवाल और हेमंत सोरेन दोनों ही मुख्यमंत्रियों को ED बार बार समन भेज रहा है, लेकिन कोई भी पेश नहीं हो रहा है. ये भी अजीब लगता है कि दोनों ही नेता अपनी अपनी गिरफ्तारी की आशंका जता रहे हैं, और ईडी के अफसर हैं कि आगे एक्शन ले ही नहीं रहे हैं - आखिर माजरा क्या है?
प्रवर्तन निदेशालय यानी ED के नोटिस पर देश के दो मुख्यमंत्रियों की प्रतिक्रिया बिलकुल एक जैसी देखने को मिल रही है. दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन को ईडी ने अलग अलग मामलों में पूछताछ के लिए कई बार नोटिस भेज चुका है, लेकिन दोनों में से कोई भी गंभीरता से नहीं ले रहा है - और दोनों ही नेताओं के मामलों में ईडी का रवैया भी पहेली जैसा लग रहा है. सवाल है कि अरविंद केजरीवाल और हेमंत सोरेन दोनों ही आखिर ईडी के समन को हल्के में क्यों ले रहे हैं? और दोनों मामलों में जो ईडी का रवैया नजर आ रहा है, दोनों मुख्यमंत्रियों की दलीलें भी दमदार नजर आने लगी हैं! दोनों ही मुख्यमंत्रियों और उनकी पार्टियों का आरोप है कि ईडी का एक्शन पूरी तरह राजनीति से प्रेरित है.
समन को हल्के में क्यों ले रहे हैं केजरीवाल और सोरेन
ईडी के समन पर अरविंद केजरीवाल ने करीब करीब हेमंत सोरेन जैसा ही स्टैंड ले रखा है - और इस मामले में ये दोनों ही शरद पवार से अलग रवैया अपना रहे हैं. दोनों नेताओं के मामले में ईडी भी लगभग वैसे ही पेश आ रहा है, जैसे शरद पवार के मामले में देखा गया था. केजरीवाल और हेमंत सोरेन जो पेशी के लिए तैयार भी नहीं है, शरद पवार ने तो नोटिस मिलने पर ईडी के दफ्तर जाकर पेश होने के लिए ऐलान ही कर दिया था. बाद में ईडी की तरफ से शरद पवार को बोल दिया गया कि उनको दफ्तर आकर पेश होने की जरूरत नहीं है. शरद पवार जैसी ही हीलाहवाली ईडी के रुख में केजरीवाल और हेमंत सोरेन के मामलों में भी देखी जा रही है, लेकिन माहौल ऐसा बना हुआ है कि दोनों ही नेताओं की गिरफ्तारी की आशंका खत्म नहीं हो रही है.
हेमंत सोरेन को अब तक 7 बार पूछताछ के लिए बुलाया जा चुका है, और अरविंद केजरीवाल को भी तीन बार. लेकिन दोनों में से कोई भी पेश होने को राजी नहीं है. दोनों ही मुख्यमंत्रियों की तरफ से जवाब भी मिलता जुलता ही दिया जा रहा है - दोनों ही मुख्यमंत्री ईडी के समन को गैरकानूनी बता रहे हैं, और राजनीति से प्रेरित भी.
काफी दिनों से झारखंड के राजभवन में पड़े एक बंद लिफाफे की भी चर्चा होती रही है. कहा जाता है कि अगर लिफाफा खुल गया तो हेमंत सोरेन की विधानसभा सदस्यता भी जा सकती है. असल में चुनाव आयोग ने हेमंत सोरेन के मामले में राज्यपाल को अपनी एक रिपोर्ट भेजी थी. तब भी काफी बवाल मचा था, अब भी वैसी ही चर्चा है. बीजेपी की तरफ से चुनाव आयोग में हेमंत सोरेन के खिलाफ लाभ के पद को लेकर शिकायत दर्ज कराई गई थी.
हेमंत सोरेन की ही तरह अरविंद केजरीवाल भी ईडी के सामने पेश नहीं हो रहे हैं, और ऊपर से सवाल भी पूछे जा रहे हैं. ईडी को भेजे अपने जवाब में अरविंद केजरीवाल ये भी पूछ चुके हैं, और उनके साथी भी पूछ रहे हैं, किस हैसियत में उनको बुलाया जा रहा है, ना वो गवाह हैं, ना वो अभियुक्त हैं.

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