
96 स्तंभ, 7 शिखर और काशी-अयोध्या की झलक... अबू धाबी के पहले हिंदू मंदिर से Exclusive रिपोर्ट, PM मोदी करेंगे उद्घाटन
AajTak
आम लोगों के लिए 18 फरवरी 2024 को खोले जाने वाले इस मंदिर की खासियत भी अद्भुत हैं. इसे 27 एकड़ की जमीन पर बनाया गया है, जिसमें साढ़े 13 एकड़ में मंदिर का हिस्सा बना है और बाकी साढ़े 13 एकड़ में पार्किंग एरिया बनाया गया है. मंदिर संयुक्त अरब अमीरात की राजधानी अबू धाबी में बने इस हिंदू मंदिर का नाम बीएपीएस हिंदू मंदिर है, जिसे बीएपीएस संस्था के नेतृत्व में बनाया गया है.
संयुक्त अरब अमीरात (UAE) है तो एक मुस्लिम देश, लेकिन अगले एक हफ्ते में यहां हिंदुत्व का वो मोती सारी दुनिया में चमक बिखेरने को तैयार है, जिसका इंतजार दशकों से हो रहा था. UAE की राजधानी अबूधाबी में मंदिर के घंटों के आवाज गूंजेगी, शंखनाद होगा. देव प्रतिमा के आगे दीप जलेंगे. आरती की सुरलहरियों से भक्ति का सोता बहेगा. होम की समिधा से वातावरण सकारात्मक होगा और प्रसाद की मिठास मन को आनंदित कर देगी.
अबूधाबी में होने वाला है हिंदू मंदिर का उद्घाटन ये सब इसलिए संभव होने वाला है, क्योंकि 22 जनवरी को अयोध्या में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के बाद अब पीएम मोदी अबूधाबी में स्वामी नारायण हिंदू मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा और उद्धाटन करने जा रहे हैं. इस मंदिर की भव्यता देखते ही बन रही है. 700 करोड़ रुपये की लागत से बना ये मंदिर भारतीय प्राचीन मंदिर निर्माण शैली का अद्भुत उदाहरण है और रेत के शहर में प्राच्य संस्कृति-संस्कार और श्रद्धा के संगम के रूप मे देखा जाएगा. ये मंदिर न सिर्फ आस्था का केंद्र बनेगा बल्कि सौहार्द और सामंजस्य के प्रतीक के रूप में भी जाना जाएगा.
18 फरवरी 2024 से दर्शन कर सकेंगे श्रद्धालु आम लोगों के लिए 18 फरवरी 2024 को खोले जाने वाले इस मंदिर की खासियत भी अद्भुत हैं. इसे 27 एकड़ की जमीन पर बनाया गया है, जिसमें साढ़े 13 एकड़ में मंदिर का हिस्सा बना है और बाकी साढ़े 13 एकड़ में पार्किंग एरिया बनाया गया है. मंदिर संयुक्त अरब अमीरात की राजधानी अबू धाबी में बने इस हिंदू मंदिर का नाम बीएपीएस हिंदू मंदिर है, जिसे बीएपीएस संस्था के नेतृत्व में बनाया गया है. बीएपीएस एक ऐसी संस्था है, जिसने दुनियाभर में 1,100 से ज्यादा हिंदू मंदिरों का निर्माण किया है.
भारतवंशी समुदाय में काफी उत्साह दिल्ली में अक्षरधाम मंदिर का निर्माण भी इसी संस्था ने किया है. मंदिर निर्माण के लिए संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने जमीन दान में दी थी. मंदिर के ऑपरेशन से जुड़े रविंदर कदम ने बताया कि, इस मंदिर को लेकर अरब के भारतवंशी समुदाय में काफी उत्साह है. खुद रविंदर कदम भी ईश्वरीय प्रेरणा से अपनी सर्विस छोड़कर निर्माण से जुड़े हुए हैं.
अगस्त 2015 में UAE दौरे पर गए थे पीएम मोदी रविंदर कदम ने बताया कि मंदिर का उद्गघाटन पीएम मोदी 14 फरवरी को करेंगे. अगस्त 2015 में पीएम मोदी जब UAE के दौरे पर आए थे, तब यहां मंदिर निर्माण की अनुमति दी गई थी. 34 वर्षों में किसी भारतीय पीएम का पहला दौरा था, जिसने दो राष्ट्रों के बीच मित्रता और साझा संस्कृति की एक अहम नींव रखी थी.
जिन पत्थरों से बना राम मंदिर, उन्हीं से हुआ अबूधाबी मंदिर का निर्माण मंदिर की विशेषताओं की बात करें तो इसका एक लिंक अभी-अभी अयोध्या में प्राण प्रतिष्ठित हुए राम मंदिर से भी है. इस मंदिर का निर्माण जयपुर के पिंक सैंड स्टोन (लाल बलुआ पत्थर) से हुआ है. यह वही पत्थर है, जिससे अयोध्या में मंदिर बनाया गया है. वहीं, इस मंदिर के निर्माण में भी अयोध्या की ही तरह न तो लोहे का प्रयोग हुआ है और न ही स्टील का. बल्कि, इंटरलॉकिंग पद्धति से शिलाओं की फिटिंग की गई है. यह पद्धति किसी भी निर्माण कार्य को हजारों सालों की मजबूती प्रदान करती है. इसके अलावा अबूधाबी में बनें इस मंदिर में इटैलियन मार्बल का भी प्रयोग किया गया है, जिसके कारण इसका इंटीरियर अलग ही निखर कर सामने आया है.

झारखंड के लातेहार जिले के भैंसादोन गांव में ग्रामीणों ने एलएलसी कंपनी के अधिकारियों और कर्मियों को बंधक बना लिया. ग्रामीणों का आरोप था कि कंपनी बिना ग्राम सभा की अनुमति गांव में आकर लोगों को ठगने और जमीन हड़पने की कोशिश कर रही थी. पुलिस के हस्तक्षेप के बाद लगभग दो घंटे में अधिकारी सुरक्षित गांव से बाहर निकल सके.

दिल्ली के सदर बाजार में गोरखीमल धनपत राय की दुकान की रस्सी आज़ादी के बाद से ध्वजारोहण में निरंतर उपयोग की जाती है. प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल के बाद यह रस्सी नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाने लगी. इस रस्सी को सेना पूरी सम्मान के साथ लेने आती है, जो इसकी ऐतिहासिक और भावनात्मक महत्ता को दर्शाता है. सदर बाजार की यह रस्सी भारत के स्वाधीनता संग्राम और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक बनी हुई है. देखिए रिपोर्ट.

संभल में दंगा मामले के बाद सीजेएम के तबादले को लेकर विवाद शुरू हो गया है. पुलिस के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए गए थे लेकिन पुलिस ने कार्रवाई नहीं की. इस पर सीजेएम का अचानक तबादला हुआ और वकील प्रदर्शन कर रहे हैं. समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और AIMIM ने न्यायपालिका पर दबाव बनाने का आरोप लगाया है. इस विवाद में राजनीतिक सियासत भी जुड़ी है. हाई कोर्ट के आदेशानुसार जजों के ट्रांसफर होते हैं लेकिन इस बार बहस हुई कि क्या यहां राज्य सरकार ने हस्तक्षेप किया.

दावोस में भारत वैश्विक आर्थिक चुनौतियों का सामना करने और एक बेहतर भविष्य बनाने के लिए पूरी तैयारी कर रहा है. इस संदर्भ में सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव से खास बातचीत की गई जिसमें उन्होंने बताया कि AI को लेकर भारत की क्या योजना और दृष्टिकोण है. भारत ने तकनीकी विकास तथा नवाचार में तेजी लाई है ताकि वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे रह सके. देखिए.

महाराष्ट्र के स्थानीय निकाय चुनावों के बाद ठाणे जिले के मुंब्रा क्षेत्र में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं. एमआईएम के टिकट पर साढ़े पांच हजार से अधिक वोट के अंतर से जीत हासिल करने वाली सहर शेख एक बयान की वजह से चर्चा में हैं. जैसे ही उनका बयान विवादास्पद हुआ, उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका बयान धार्मिक राजनीति से जुड़ा नहीं था. सहर शेख ने यह भी कहा कि उनके बयान को गलत तरीके से प्रस्तुत किया जा रहा है और वे उस तरह की राजनीति का समर्थन नहीं करतीं.








