
5 अगस्त 2019 से अब तक क्या-क्या और कितना बदल चुका है कश्मीर? 13 पॉइंट में समझें
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केंद्र की मोदी सरकार ने चार साल पहले जम्मू-कश्मीर के हालात में बदलाव की सोच के साथ एक ऐतिहासिक पटकथा लिखी थी. 5 अगस्त, 2019 को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त करने और इसे दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित करने का प्रस्ताव पेश किया था. जम्मू और कश्मीर को संविधान के अनुच्छेद 370 और अनुच्छेद 35ए (राष्ट्रपति के आदेश के जरिए बना कानून) के तहत विशेष दर्जा प्राप्त था.
जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटाने के चार साल बाद इसकी वैधता पर आज सुप्रीम कोर्ट फैसला सुनाएगा. केंद्र सरकार ने 5 अगस्त 2019 को संविधान के अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त करने का निर्णय लिया था. केंद्र के इस फैसले के बाद जम्मू से विशेष राज्य का दर्जा छिन गया था और यह केंद्र के अधीन आ गया था. इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई. फिलहाल, आज यह साफ हो जाएगा कि केंद्र का फैसला संवैधानिक रूप से वैध था या नहीं? आइए जानते हैं कि अनुच्छेद 370 हटने के बाद 5 अगस्त 2019 से अब तक जम्मू कश्मीर कितना बदला है?
बता दें कि 2019 के लोकसभा चुनाव में बंपर जीत के तुरंत बाद केंद्र की बीजेपी सरकार ने जम्मू-कश्मीर को लेकर ऐतिहासिक फैसला लिया था. मोदी सरकार ने जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले संवैधानिक प्रावधानों को निरस्त कर दिया था. सरकार का कहना है कि सही समय आने पर जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा दे दिया जाएगा.
1. 'बाहरी लोगों' के लिए संपत्ति के अधिकार
2019 से पहले विशेष दर्जा के चलते जम्मू-कश्मीर में बाहर के लोगों को जमीन खरीदने की इजाजत नहीं थी. अनुच्छेद 35ए ऐसी खरीदारी को सिर्फ 'स्थायी निवासियों' तक सीमित रखता था. विशेष दर्जा खत्म होने के बाद केंद्र सरकार ने जम्मू और कश्मीर विकास अधिनियम में संशोधन किया और 'स्थायी निवासी' शब्द को हटाते हुए एक अधिसूचना जारी की. अब 'बाहरी लोग' जम्मू-कश्मीर में जमीन खरीद सकते हैं, अगर वो कृषि भूमि ना हो.
2. 'कोई अलग झंडा या संविधान नहीं'
विशेष दर्जे के तहत जम्मू और कश्मीर को अपना झंडा और एक संविधान की अनुमति मिलती थी. यह निर्धारित करता था कि भारतीय संविधान के कौन से हिस्से जम्मू कश्मीर में लागू होंगे. इसकी अपनी दंड संहिता थी, जिसे रणबीर दंड संहिता कहा जाता था. विशेष दर्जा समाप्त किए जाने के बाद नागरिक सचिवालय समेत सरकारी कार्यालयों में अब सिर्फ भारतीय तिरंगा, राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाता है. जम्मू-कश्मीर का झंडा हटाया गया.

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