
45 रातें, 35 गांव और जंगल से घर तक भेड़ियों का शोर... बहराइच में हंटिंग पर प्रशासन, पहरेदारी पर लोग
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यूपी के दो जिलों में इन दिनों इंसान और जंगली जानवरों के बीच का संघर्ष चल रहा है. और वो संघर्ष कुछ इस मुकाम पर है कि पिछले 45 दिनों में जहां एक ही जिले में 8 बच्चों समेत कुल 9 लोगों की मौत हो चुकी है, वहीं दूसरे जिले में एक शख्स अपनी जान से जा चुका और एक बुरी तरह से ज़ख्मी होकर जिंदगी और मौत के बीच झूल रहा है.
Wolves terror in Bahraich: कहीं गांवों में घुस आए खूंखार शयों की ड्रोन के ज़रिए ट्रैकिंग. कहीं रात-रात भर जाकर लाठियों और बंदूकों का पहरा और कहीं तमाम जतन के बावजूद एक-एक कर खूंखार जानवरों का निवाला बनता इंसान. ऐसे ही दूसरी जगह खेतों के बीच पिंजरे लगाए जा रहे हैं. असल में यूपी के दो जिलों में इन दिनों इंसान और जंगली जानवरों के बीच का संघर्ष चल रहा है. और वो संघर्ष कुछ इस मुकाम पर है कि पिछले 45 दिनों में जहां एक ही जिले में 8 बच्चों समेत कुल 9 लोगों की मौत हो चुकी है, वहीं दूसरे जिले में एक शख्स अपनी जान से जा चुका और एक बुरी तरह से ज़ख्मी होकर जिंदगी और मौत के बीच झूल रहा है.
यूपी के दो जिलों में कोहराम इनमें से एक जिला है बहराइच, जबकि दूसरा है लखीमपुर खीरी. वैसे तो इन दोनों जिलों के बीच फासला करीब 130 किलोमीटर से भी ज्यादा का है. लेकिन ये दोनों ही जिले इस वक्त एक ही जैसी तकलीफ से जूझ रहे हैं. बहराइच के लोग जहां जंगली भेड़ियों के आतंक से घबराए हुए हैं, वहीं लखीमपुर खीरी के लोग तो टाइगर यानी बाघ का निवाला बन रहे हैं. और हक़ीकत यही है कि पिछले कई महीनों से चल रहे ख़ौफ के इस सिलसिले का फिलहाल किसी के पास कोई इलाज नहीं. प्रशासन के पास भी नहीं और वन विभाग के पास भी नहीं.
बहराइच में भेड़ियों का आतंक सबसे पहले बात बहराइच की. नेपाल से सटे यूपी के इस जिले में टाइगर यानी बाघों का आतंक तो पुरानी बात है, लेकिन अब नई बात भेड़ियों की शक्ल में सामने आई है. भेड़िये कभी रात के अंधेरे में तो दिन के उजाले के बीच ही गांवों में घुस आते हैं और अक्सर बच्चों को दबोच कर भाग निकलते हैं. हालत कितनी खराब है, इसका अंदाजा बस इसी बात से लगा सकते हैं कि पिछले 45 दिनों में इन भेड़ियों की आहट से जिले के 35 गांवों के लोगों की नींद हराम हो चुकी है और इन भेड़ियों ने 8 बच्चों और एक महिला की जान ले ली है.
शासन-प्रशासन से नहीं कोई उम्मीद भेड़िये बड़े चालाक हैं. आसानी से पकड़ में नहीं आते. वैसे भी वो अकेले नहीं होते, बल्कि झुंड में शिकार करते हैं. ऐसे में अगर वन विभाग बड़ी मशक्कत से किसी भेड़िये को काबू कर भी ले, तो बाकी का झूंड छुट्टा ही रह जाता है और खतरा कम नहीं होता. हार कर अब लोगों ने शासन-प्रशासन से उम्मीद छोड़ कर खुद ही दिन-रात जागकर अपने नौनिहालों की रखवाली शुरू कर दी है. अब वन विभाग के ड्रोन कैमरे में कैद हुए भेड़ियों की तस्वीरें भी सामने आई हैं. जिनमें देखा जा सकता है कि कैसे दिन के उजाले में भी भेड़िये बिल्कुल बेख़ौफ़ जंगल से निकल कर गांवों की ओर बढ़ते जा रहे हैं.
भेड़ियों ने बदला हमले का वक्त कभी ड्रोन के नीचे आने से वो थोड़ा ठिठकते हैं, लेकिन अगले ही पल डायरेक्शन चेंज कर आगे बढ़ने लगते हैं. ये भेड़िये इतने शातिर हैं कि ज्यादातर बच्चों की ही निशाना बनाते हैं, क्योंकि 3 फीट तक लंबे इन भेड़ियों के लिए बच्चों को उठा कर ले जाना आसान होता है. अब चूंकि हाल के दिनों में लोगों ने रात-रात भर जाग कर भेड़ियों को भगाना शुरू कर दिया है, भेड़ियों ने हमले का टाइम चेंज कर दिया है. अब कभी भी कहीं भी धावा बोल देते हैं. बस हमला तभी करते हैं, जब लोग सो रहे हों या फिर बच्चे अकेले हों. और तो और हमले के लिए ये घरों में भी घुस आते हैं.
महसी तहसील में आठ घटनाएं और अब इसी के चलते रात में पहरेदारी की जा रही है. आम लोगों के साथ-साथ हाथ में बंदूक लिए बीजेपी विधायक सुरेश्वर सिंह भी भेड़ियों का पीछा कर रहे हैं. जब से इलाके में भेड़ियों का आतंक बढ़ा है, नेताजी ने भी अपनी लाइसेंसी राइफल थाम कर आदमखोरों की तलाश बिल्कुल एक्टिव हो चुके हैं. लेकिन लाख कोशिशों के बावजूद ना तो भेड़ियों का हमला थम रहा है और ना ही मासूमों की मौत रुक रही है. अकेले जिले के महसी तहसील में आठ ऐसी घटनाएं हुई हैं, जिनमें भेड़ियों ने बच्चों को अपना निवाला बनाया है.

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