
43 साल पुरानी उस क्रांति की कहानी, जब रातोंरात बदल गया था ईरान, आज हिजाब के खिलाफ महिलाओं की जंग
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ईरान में 22 साल की महसा अमिनी की मौत के बाद से प्रदर्शन हो रहे हैं. महिलाएं हिजाब उड़ा रहीं हैं. अपने बाल काट रहीं हैं. प्रदर्शनकारियों को दबाने के लिए लाठीचार्ज किया जा रहा है. ईरान के ताजा प्रदर्शनों ने 43 साल पहले हुई उस क्रांति की यादें ताजा कर दी, जिसने देश को पूरा बदलकर रख दिया था.
ईरान में महिलाएं अपने बाल काट रहीं हैं. सुरक्षाबलों के सामने अपने हिजाब उड़ा रहीं हैं और उन्हें गिरफ्तार करने की चुनौती दे रहीं हैं. सरकार के खिलाफ नारेबाजी हो रही है. शहर के शहर जल रहे हैं. सरकार प्रदर्शनकारियों को दबाने के लिए लाठीचार्ज कर रही है. इन प्रदर्शनों में अब तक तीन लोगों के मारे जाने की भी खबर है. दर्जनों घायल हो चुके हैं. लेकिन प्रदर्शन रुक नहीं रहे हैं.
इन प्रदर्शनों की वजह 22 साल की महसा अमिनी हैं. महसा अमिनी अब इस दुनिया में नहीं हैं. 16 सितंबर को उनकी मौत हो गई.
महसा अमिनी को 13 सितंबर को पुलिस ने गिरफ्तार किया था. आरोप था कि तेहरान में अमिनी ने सही तरीके से हिजाब नहीं पहना था. जबकि, ईरान में हिजाब पहनना जरूरी है. अमिनी को गिरफ्तार कर पुलिस स्टेशन ले जाया गया. वहां तबीयत बिगड़ी तो अमिनी को अस्पताल ले जाया गया. तीन दिन बाद खबर आई कि अमिनी की मौत हो गई.
परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने अमिनी के साथ बुरी तरह मारपीट की थी. इससे वो कोमा में चली गईं और अस्पताल में उनकी मौत हो गई. अमिनी की मौत के बाद से ईरान में जगह-जगह पर प्रदर्शन हो रहे हैं. सरकार के खिलाफ नारेबाजी हो रही है. महिलाएं खुद से अपने बाल काटकर विरोध जता रहीं हैं. सुरक्षाबलों के सामने हिजाब उड़ा रहीं हैं.
इस पूरी घटना के बाद ईरान में 'एंटी हिजाब' मूवमेंट तेज हो गया है. महिलाएं आजादी मांग रहीं हैं. पुरुष भी उनका साथ दे रहे हैं. इस सबने चार दशक पहले हुई 'इस्लामिक क्रांति' की यादें ताजा कर दीं हैं. तब खुलेपन के खिलाफ क्रांति हुई थी और अब उसी मांग को लेकर प्रदर्शन हो रहे हैं.
क्या है इसका इतिहास?

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