
40 सीटें, 6 पार्टियां और हाजीपुर का पेच... बिहार में चाचा-भतीजे की रार से अटका NDA का सीट बंटवारा
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बिहार में 40 लोकसभा सीटें हैं और बीजेपी और जेडीयू समेत एनडीए की छह पार्टियां दावेदार हैं. हाजीपुर सीट पर पशुपति पारस और चिराग पासवान, दोनों ही दावा कर रहे हैं. चाचा-भतीजे की रार से एनडीए में बिहार का सीट बंटवारा अटका पड़ा है. किस दल की क्या डिमांड है और सीट शेयरिंग के पेच क्या हैं?
लोकसभा चुनाव करीब हैं और केंद्र की सत्ता पर काबिज भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में सीट शेयरिंग की कवायद तेज हो गई है. सीट शेयरिंग को लेकर पटना से लेकर दिल्ली तक बैठक पर बैठक हो रही है. बिहार बीजेपी अध्यक्ष और नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली सरकार में डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी समेत बीजेपी और सहयोगी दलों के बड़े नेता दिल्ली में डेरा डाले थे. मैराथन मंथन का दौर चलता रहा लेकिन सीट शेयरिंग को लेकर किसी फॉर्मूले पर सहमति नहीं बन सकी.
दिल्ली से पटना लौटने के बाद सम्राट चौधरी ने यह दावा किया कि लोकसभा चुनाव के लिए चुनाव कार्यक्रम के ऐलान से पहले सीट शेयरिंग के फॉर्मूले का ऐलान कर दिया जाएगा. बिहार सरकार के पूर्व मंत्री और जेडीयू एमएलसी अशोक चौधरी ने भी यह दावा किया है कि एनडीए में सब ठीक है और चुनाव कार्यक्रम के ऐलान से पहले सीट शेयरिंग फॉर्मूला तय कर लिया जाएगा. चिराग पासवान और उपेंद्र कुशवाहा को लेकर एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि सही समय पर सबकुछ सार्वजनिक किया जाएगा.
चिराग और उपेंद्र के सवाल पर नीतीश कुमार के करीबी अशोक चौधरी के जवाब ने अब इसे लेकर कयासों को हवा दे दी है कि क्या एनडीए में सबकुछ ठीक है? यह कयास अनायास भी नहीं. चिराग पासवान और उपेंद्र कुशवाहा को हाल ही में बिहार के बेगूसराय आए पीएम मोदी के कार्यक्रम में शामिल होना था लेकिन दोनों ने ही इस आयोजन से किनारा कर लिया.
सीट शेयरिंग को लेकर जारी बातचीत के बीच चिराग ने 10 मार्च को मुजफ्फरपुर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि हमारा गठबंधन बस बिहार की जनता के साथ है. चिराग के इस बयान को सीट शेयरिंग के लिए बातचीत बीजेपी और एनडीए के अन्य सहयोगी दलों के लिए चेतावनी की तरह देखा गया.
किस पार्टी की क्या डिमांड
बिहार में लोकसभा की 40 सीटें हैं. 2019 के चुनाव में एनडीए को 39 सीटों पर जीत मिली थी. बीजेपी के 17, जेडीयू के 16 और अविभाजित लोक जनशक्ति पार्टी के छह उम्मीदवार चुनाव जीते थे. अब समस्या यह है कि एलजेपी अब दो धड़ों में बंट गई है- एक पशुपति पारस की राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी और दूसरी चिराग की लोक जनशक्ति पार्टी रामविलास. दोनों ही पार्टियां पिछले चुनाव के फॉर्मूले पर छह-छह सीटों की मांग कर रही हैं. यह फॉर्मूला भी सामने आया था कि चिराग पासवान की पार्टी को पांच और पशुपति पारस की पार्टी को एक से दो सीटें मिल सकती हैं. जेडीयू अपनी जीती सीटों से कम पर मानने को तैयार नहीं है. 370 सीटें जीतने का लक्ष्य लेकर चल रही बीजेपी भी अपनी सीटिंग सीटें छोड़ना नहीं चाहेगी.

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