
2027 से पहले का सेमीफाइनल, जमीन तैयार करने का मौका... जानें- हर पार्टी के लिए क्यों जरूरी है लुधियाना उपचुनाव
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ये उपचुनाव इसलिए हो रहा है क्योंकि आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक गुरप्रीत सिंह गोगी के निधन के बाद यह सीट खाली हो गई थी और नियमों के अनुसार, कोई भी विधानसभा या संसद सीट 6 महीने से ज्यादा खाली नहीं रह सकती. ये चुनाव इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि इसे पंजाब की चार बड़ी पार्टियों के लिए सियासी इम्तिहान माना जा रहा है. आइए समझते हैं कि कैसे ये चुनाव हर दल के लिए खास बन गया है...
लुधियाना वेस्ट विधानसभा सीट पर उपचुनाव के लिए शेड्यूल जारी हो गया है. रविवार सुबह चुनाव आयोग ने देश के 5 राज्यों में होने वाले उपचुनावों की घोषणा की, जिसके तहत लुधियाना वेस्ट सीट पर 19 जून को मतदान और 23 जून को मतगणना होगी. इसी के साथ कल से नामांकन प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
ये उपचुनाव इसलिए हो रहा है क्योंकि आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक गुरप्रीत सिंह गोगी के निधन के बाद यह सीट खाली हो गई थी और नियमों के अनुसार, कोई भी विधानसभा या संसद सीट 6 महीने से ज्यादा खाली नहीं रह सकती. ये चुनाव इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि इसे पंजाब की चार बड़ी पार्टियों के लिए सियासी इम्तिहान माना जा रहा है. आइए समझते हैं कि कैसे ये चुनाव हर दल के लिए खास बन गया है...
AAP ने सांसद को मैदान में उतारा
आम आदमी पार्टी ने सबसे पहले 26 फरवरी को अपने उम्मीदवार संजीव अरोड़ा का नाम घोषित किया. अरोड़ा राज्यसभा के सांसद हैं और लुधियाना से ही ताल्लुक रखते हैं. उनके मैदान में उतरने को दिल्ली में AAP की हार से उबरने की रणनीति माना जा रहा है. संजीव अरोड़ा के नाम को लेकर पहले अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया जैसे नेताओं के नामों की अटकलें भी लगाई जा रही थीं, लेकिन पार्टी ने इन अटकलों को खारिज कर दिया. विपक्ष का मानना है कि पार्टी के अनुरोध पर संजीव अरोड़ा को राज्यसभा सीट खाली करने पर राज्य सरकार में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जाएगी, हालांकि इस बारे में विस्तृत जानकारी नहीं दी गई है.
बता दें कि संजीव अरोड़ा व्यवसायी हैं और पंजाब के औद्योगिक शहर लुधियाना से आते हैं. उनकी उम्मीदवारी के बाद भगवंत मान सरकार ने किसानों के धरनों को हटवाने और एकमुश्त समझौता (OTS) योजना जैसे व्यापार-हितैषी फैसले लिए, जिससे यह साफ हुआ कि यह कदम सिर्फ चुनावी नहीं, बल्कि नीति से जुड़ा भी है. सरकार के तीन साल पूरे होने के बाद यह पहला उपचुनाव है और इसे 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले जनता की भावनाओं के बैरोमीटर के रूप में देखा जा रहा है.
कांग्रेस पूरी ताकत से ठोकेगी ताल

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