
2024 की तैयारी, सबसे बड़ा वोट बैंक...! जानें- सियासत में कितने बड़ा 'गेमचेंजर' है OBC समुदाय
AajTak
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जातिगत जनगणना करवाकर नया सियासी दांव चल दिया है. जातिगत जनगणना में सामने आया है कि बिहार में पिछड़ा वर्ग की आबादी 63 फीसदी है. इस दांव से लग रहा है कि 2024 में ओबीसी कार्ड अहम होगा. ऐसे में जानते हैं कि ओबीसी वोटर्स कितने अहम हैं?
जाति है कि जाती नहीं. राजनीति से... क्योंकि यही जाति सदन में नेताओं की कुर्सी पक्की करती है.
आजादी के बाद जब 1951 में पहली जनगणना होनी थी, तब केंद्र की जवाहर लाल नेहरू की सरकार ने तय किया कि आजाद भारत में जाति आधारित भेदभाव को खत्म करना है, इसलिए जातिगत जनगणना की जरूरत नहीं है.
केंद्र भी यही दलील देती है कि जाति जनगणना कराने की नीति 1951 में ही छोड़ दी गई है, इसलिए अब कराना सही नहीं है.
लेकिन अब फिर से देशभर में जातिगत जनगणना की मांग शुरू हो गई है. बिहार की नीतीश कुमार सरकार ने तो 'सर्वे' बताकर जाति जनगणना करवा भी ली. आंकड़े भी जारी कर दिए. बताया कि राज्य में पिछड़ा वर्ग की आबादी 63% है. इसमें अन्य पिछड़ा वर्ग 27% और अति पिछड़ा वर्ग 36% हैं. एससी 19% और एसटी 1.68% तो सामान्य वर्ग 15.52% हैं.
बिहार की जातिगत जनगणना को नीतीश कुमार का बड़ा दांव माना जा रहा है. क्योंकि अगले साल लोकसभा चुनाव होने हैं. ऐसे में ओबीसी की आबादी के आंकड़े को देखकर ज्यादा आरक्षण की मांग कर इसका राजनीतिक इस्तेमाल किया जा सकता है.
ओबीसी कार्ड...

देश में लोकसभा चुनाव, विधानसभा चुनाव और स्थानीय निकाय चुनाव समय समय पर होते रहते हैं. सरकारें आती है और जाती हैं. पर देश के करीब हर शहर में कुछ ऐसी समस्याएं हैं जो शाश्वत हैं. जो कोई भी सरकार आए या जाए यथावत बनी रहती हैं. क्या इस बार बीएमसी से ये उम्मीद की जानी चाहिए कि मुंबई की इन समस्याओं से आम लोगों को निजात मिलेगी?

देश आज मकर संक्रांति, पोंगल और माघ बिहू जैसे महत्वपूर्ण त्योहार मना रहा है. ये त्योहार न केवल हमारी संस्कृति का हिस्सा हैं बल्कि इनका समाज और राजनीति पर भी गहरा प्रभाव है. इस वीडियो में हम बात करते हैं कि क्या 2026 की चुनावी क्रांति मकर संक्रांति से शुरू हो चुकी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पोंगल मनाने केंद्रीय मंत्री एल मुुरुगन के घर पहुंचे और तमिलनाडु के इस त्योहार को ग्लोबल फेस्टिवल बताया. साथ ही केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की पतंगबाजी की तस्वीरें भी चर्चा में हैं. कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा सरकार पर लोगों की आवाज दबाने के आरोपों के जवाब में बीजेपी ने पलटवार किया है.

आज का दंगल पश्चिम बंगाल में ईडी की कार्रवाई को लेकर हो रही सियासत पर है. 8 जनवरी को ईडी ने कोलकाता में आईपैक प्रमुख के घर और दफ्तर पर छापेमारी की थी. ईडी ने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी ने छापे में बरामद सारे दस्तावेज ये कहकर छीन लिये थे कि ये उनकी पार्टी के सीक्रेट्स हैं. ईडी ने कोर्ट में भी यही अर्जी दी कि ममता ने जांच से जुड़े सबूत छीन लिए. उनकी सीबीआई जांचं की जाए. ममता बनर्जी की पार्टी की ओर से किसी तीसरे शख्स ने खुद को अधिकृत बताते हुए अर्जी दी की कि ईडी ने जो जब्ती की है उसमें टीएमसी के सीक्रेट्स हैं, उन्हें सुरक्षित रखा जाए.

अमृतसर में एक बार फिर 10 से अधिक स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी भरी ई-मेल मिली है, जिससे हड़कंप मच गया है. ई-मेल में राष्ट्रीय गान को लेकर भड़काऊ संदेश भी लिखे गए हैं. पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. एसएसपी देहाती सुहैल मीर के अनुसार स्कूलों की सुरक्षा बढ़ा दी गई है और हर पहलू से जांच जारी है.

पुलिस ने इमामों और धार्मिक संस्थानों से निजी और आर्थिक जानकारी मांगी है जिसे धार्मिक आजादी और सुरक्षा नीति के संदर्भ में विवादित माना जा रहा है. राजनीतिक नेताओं ने इसे मुसलमानों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई और सामूहिक संदेह की नीति बताया है. ये मामला घाटी में धार्मिक आजादी, भरोसे और सुरक्षा को लेकर एक बड़ी बहस का रूप ले चुका है.








