
14 देश, दो लाख मौत और भीषण तबाही... 19 साल पहले कहर बनकर आई थी Tsunami
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26 दिसंबर 2004 के दिन इंडोनेशिया में रिक्टर पैमाने पर 9.1 तीव्रता के भूकंप (EarthQuake) के बाद समुद्र के भीतर सुनामी (Tsunami) की लहरें उठीं. जिसने भारत सहित 14 देशों में भारी तबाही मचाई थी. इस भीषण तबाही में 2 लाख 25 हजार से भी ज्यादा लोगों ने अपनी जान गंवाई थी.
अरब सागर से उठा चक्रवाती तूफान 'बिपरजॉय' गुजरात के तटीय क्षेत्रों की तरफ बढ़ रहा है. गुरुवार यानी आज शाम यह गुजरात के कच्छ जिले के जखाऊ पोर्ट और इससे लगते पाकिस्तान के इलाकों से टकराने जा रहा है. अनुमान है कि तट से टकराते समय तूफान की स्पीड 125 से लेकर 150 किलोमीटर तक रह सकती है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह कोई पहली बार नहीं है जब समुद्र अपना रौद्र रूप दिखा रहा है. इससे पहले भी न जाने कितने ही तूफानों से भारत के तटीय क्षेत्रों को नुकसान पहुंचा है.
आज से ठीक 19 साल पहले भी भारत में समुद्री तबाही का ऐसा ही मंजर देखने को मिला था. जिसे इतिहास के पन्नों में हमेशा-हमेशा के लिए दर्ज कर लिया गया था. जी हां, हम बात कर रहे हैं साल 2004 की. जब अरब सागर में सुनामी की लहरें उठी थीं और उन लहरों से ना जाने कितने ही देश प्रभावित हुए थे. इस भीषण तबाही में 2 लाख 25 हजार से भी ज्यादा लोगों ने अपनी जान गंवाई थी. चलिए जानते हैं Tsunami की उस दुखद घटना के बारे में विस्तार से...
26 दिसंबर 2004 को इंडोनेशिया के उत्तरी भाग में स्थित असेह के निकट रिक्टर पैमाने पर 9.1 तीव्रता के भूकंप (Earthquake) के बाद समुद्र के भीतर उठी सुनामी ने भारत सहित 14 देशों में भारी तबाही मचाई थी. इसने यूं तो कई देशों में तबाही मचाई थी. लेकिन सबसे ज्यादा नुकसान इंडोनेशिया, दक्षिण भारत, श्रीलंका, मालदीव्स और थाइलैंड को हुआ था.
उस समय तक सुनामी की पूर्व चेतावनी जैसी कोई प्रणाली प्रचलन में नहीं थी. इसी का नतीजा था कि इस तरह की तबाही का किसी को अंदाजा भी नहीं था. साल खत्म होने वाला था तो लोग भी नए साल का जश्न मनाने के लिए भारी संख्या में तटीय क्षेत्रों में घूमने के लिए गए हुए थे. इस कारण मरने वालों की संख्या कहीं ज्यादा थी. समुद्र किनारे बने होटलों और रिसॉर्ट में बड़ी संख्या में ठहरे पर्यटकों की इस समुद्री कहर ने जान ले ली थी.

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