
'हम संत नहीं हैं...', अजित पवार ने BJP से अलायंस का किया बचाव, NCP के दोनों गुटों में विलय की अटकलें तेज
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महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने साल 2023 में अपने चाचा शरद पवार के खिलाफ बगावत कर दी थी और 40 विधायकों के साथ पार्टी से अलग हो गए थे. बाद में वे महाराष्ट्र में सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का हिस्सा बने.
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) ने मंगलवार को अपना 26वां स्थापना दिवस मनाया. पूरे दिन यह जश्न एकता की बजाय दो समानांतर समारोहों में बंटा रहा. पुणे में अजित पवार और सुप्रिया सुले के नेतृत्व में NCP के दोनों गुटों ने अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित किए. इस बीच, राजनीतिक गलियारों में दोनों गुटों के बीच संभावित विलय की अटकलें भी जोर पकड़ने लगी हैं.
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने साल 2023 में अपने चाचा शरद पवार के खिलाफ बगावत कर दी थी और 40 विधायकों के साथ पार्टी से अलग हो गए थे. बाद में वे महाराष्ट्र में सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का हिस्सा बने. अजित ने पार्टी और चुनाव चिह्न भी हासिल कर लिया. अब महाराष्ट्र की राजनीति में एनसीपी के दोनों गुट अपनी विचारधारा के साथ सक्रिय हैं.
अजित गुट ने मनाया स्थापना दिवस
मंगलवार को अजित गुट ने पार्टी का स्थापना दिवस मनाया. कार्यक्रम को NCP प्रमुख अजित पवार ने संबोधित किया. उन्होंने अपने बगावत के फैसले का खुलकर बचाव किया. अजित पवार ने कहा, सिर्फ विपक्ष में बैठकर नारे लगाना और मोर्चे निकालना काफी नहीं है. हम कोई संत नहीं हैं. हम यहां दिशा देने, लोगों की समस्याएं हल करने और समावेशी राजनीति करने आए हैं. उन्होंने यह भी साफ किया कि बीजेपी से हाथ मिलाने का मतलब पार्टी की विचारधारा से समझौता नहीं है.
महायुति में क्यों आए? अजित ने दिया जवाब
उन्होंने आगे कहा, कुछ लोग सवाल उठाते हैं कि हमने बीजेपी और महायुति (एनडीए) से हाथ क्यों मिलाया? लेकिन क्या 2019 में हमने शिवसेना से गठबंधन नहीं किया था? तब भी समझौते हुए थे. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी जैसे नेता खुद को धर्मनिरपेक्ष बताते हैं. नायडू भी NDA से जुड़ चुके हैं और ममता अतीत में एनडीए की हिस्सा रही हैं.

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