
सुखबीर सिंह बादल के सामने फायरिंग करने वाले नारायण सिंह चौड़ा की पुलिस रिमांड बढ़ी
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अमृतसर के गोल्डन टेंपल के बाहर शिरोमणि अकाली दल के नेता सुखबीर सिंह बादल पर गोली चलाने वाले नारायण सिंह चौड़ा की पुलिस रिमांड 3 दिन के लिए बढ़ा दी गई है. स्थानीय अदालत ने रविवार को नारायण सिंह चौड़ा की पुलिस हिरासत 11 दिसंबर तक के लिए बढ़ा दी है.
अमृतसर के गोल्डन टेंपल के बाहर शिरोमणि अकाली दल के नेता सुखबीर सिंह बादल पर गोली चलाने वाले नारायण सिंह चौड़ा की पुलिस रिमांड 3 दिन के लिए बढ़ा दी गई है. स्थानीय अदालत ने रविवार को नारायण सिंह चौड़ा की पुलिस हिरासत 11 दिसंबर तक के लिए बढ़ा दी है. इसके बाद उन्हें फिर अदालत में पेश किया जाएगा. पूर्व खालिस्तानी आतंकवादी को 5 दिसंबर को 3 दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा गया था.
अमृतसर में एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि 68 वर्षीय नारायण सिंह चौड़ा की पुलिस रिमांड रविवार को खत्म हो रही थी. इसलिए उनको अदालत में पेश किया गया. उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 109 (हत्या का प्रयास) और आर्म्स एक्ट की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है. उन पर 4 दिसंबर को गोल्डन टेंपल के गेट पर मौजूद सुखबीर सिंह बादल पर गोली चलाने का आरोप है, जो हमले में बाल-बाल बच गए थे.
हरमंदिर साहिब के गेट पर जिस जगह फायरिंग हुई, वहां बादल के अलावा सैकड़ों श्रद्धालु मौजूद थे और गोली किसी को भी लग सकती थी. लेकिन भला वो पंजाब पुलिस के उन जवानों का, जिन्होंने वक़्त रहते इस हमले को नाकाम कर दिया. हमलावर को 9 एमएम पिस्टल के साथ रंगे हाथों दबोच लिया. अब सवाल ये उठता है कि आखिर सुखबीर बादल पर हमला करने वाला ये शख्स कौन है? सुखबीर की जान लेने की कोशिश की वजह क्या है?
पुलिस तफ्तीश में इन सवालों का जवाब मिल गया है. हमलावर की पहचान पंजाब के ही गुरुदासपुर जिले के डेरा बाबा नानक के रहने वाले एक कट्टरपंथी नारायण सिंह चौड़ा के तौर पर हुई. वो बादल परिवार को सिख पंथ का गद्दार मानते हैं. पुलिस की मानें तो बादल परिवार आज से नहीं बल्कि पहले से ही चौड़ा की हिटलिस्ट में रहा है. आतंकी गतिविधियों में शामिल रहा चौड़ा जेल की सजा काट चुका है. उसका ताल्लुक बब्बर खालसा से बताया जाता है.
वो आतंकी गतिविधियों के सिलसिले में ही पाकिस्तान जा चुका है. पाकिस्तान में रहते हुए ही उसने एक किताब भी लिखी है, जो गुरिल्ला वार और देशद्रोही साहित्य है. नारायण सिंह चौड़ा की जन्म कुंडली तो आपने देख ली, अब आइए आपको इस हमले की असली कहानी बताते हैं. अब तक की तफ्तीश में पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों को नारायण सिंह चौड़ा की एक फेसबुक पोस्ट मिली है, जो उसने 14 जुलाई को लिखी थी.
असल में अकाली दल के बागी गुट ने पहली जुलाई को श्री अकाल तख्त साहिब पहुंच कर बादल की गलतियां कबूल की थी, जिसके बाद उनके लिए धार्मिक सजा मुकर्रर की गई थी. इसके बाद नारायण सिंह चौड़ा ने लिखा था कि सिख समुदाय ने सुखबीर सिंह बादल को उसके जघन्य अपराधों के लिए राजनीतिक इदारे से खारिज कर दिया और अब वो अपनी मरी हुई प्रतिष्ठा को फिर जिंदा करने के लिए अकाल तख्त साहिब की मदद ले रहा है.

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