
सस्ती फ्लाइट, अच्छे होटल और पेयजल की कमी... ये 7 दिक्कतें हो जाएं दूर तो टूरिज्म में मालदीव को पीछे छोड़ देगा लक्षद्वीप
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भारत और मालदीव के बीच लक्षद्वीप को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है. पीएम मोदी की ओर से लक्षद्वीप जाने की अपील करने के बाद मालदीव के मंत्रियों की भारत विरोधी टिप्पणी ने तनाव बढ़ा दिया है. ऐसे में जानते हैं कि लक्षद्वीप में हर साल कितने पर्यटक आते हैं? वहां जाने का किराया कितना है? और क्यों खूबसूरत होने के बावजूद पर्यटकों को लुभा नहीं पाया लक्षद्वीप?
India vs Maldives: लक्षद्वीप को लेकर भारत और मालदीव के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से लक्षद्वीप की तस्वीरें शेयर कर यहां घूमने की अपील करने के बाद मालदीव के तीन मंत्रियों ने भारत विरोधी टिप्पणी कर दी थी. मालदीव सरकार ने इन मंत्रियों को सस्पेंड तो कर दिया है, लेकिन विवाद है कि थम नहीं रहा.
मालदीव के साथ विवाद शुरू होने के बाद लक्षद्वीप सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रहा है. भारतीय मालदीव का बॉयकॉट कर रहे हैं और लक्षद्वीप जाने की ही अपील कर रहे हैं. लेकिन टूरिस्ट प्लेस के तौर पर लक्षद्वीप के विकास की योजना कोई नई बात नहीं है.
साल 2020 में लक्षद्वीप प्रशासन ने टूरिज्म को लेकर एक नई पॉलिसी जारी की थी. लेकिन अब प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा और मालदीव के साथ विवाद के बाद लक्षद्वीप में विकास योजनाओं में तेजी आने की उम्मीद है.
भारत के दोनों द्वीप- लक्षद्वीप और अंडमान-निकोबार में पिछले दशक में टूरिज्म मामूली ही रहा है. बेहतर कनेक्टिविटी और इन्फ्रास्ट्रक्चर देखकर ही टूरिस्ट आते हैं और इस मामले में लक्षद्वीप थोड़ा पीछे ही रहा है. हालांकि, इसके बावजूद दोनों जगहों पर टूरिज्म बढ़ ही रहा था, लेकिन कोविड इसके लिए बड़ा झटका बनकर आई. बहरहाल, कोविड के बाद अब दोबारा यहां पर्यटन बढ़ रहा है.
लेकिन इन सबके बावजूद, जितने भी घरेलू और विदेशी पर्यटक भारत घूमने आते हैं, उनमें से महज 0.2 फीसदी ही लक्षद्वीप या अंडमान-निकोबार जाते है.
लक्षद्वीप क्यों नहीं आते पर्यटक?

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