
समान नागरिक संहिता पर ओवैसी और मुस्लिम संगठनों की क्या राय है? विरोध में क्या तर्क दिए जा रहे
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पीएम मोदी ने यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) की चर्चा तेज कर दी है. उन्होंने आरोप लगाया है कि राजनीतिक दल वोट बैंक के कारण इसका विरोध कर रहे हैं. वे मुस्लिम लोगों को भड़का रहे हैं और वोट के कारण मुस्लिम बहनों का नुकसान कर रहे हैं. वहीं यूसीसी पर मुस्लिम संगठनों के अलावा कांग्रेस, आरजेडी, जेडीयू और टीएमसी समेत कई दलों ने पीएम को घेरने की कोशिश की है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भोपाल में समान नागरिक संहिता (UCC) का मुद्दा छेड़कर पूरे देश में इसकी चर्चा फिर से शुरू कर दी. इस दौरान उन्होंने विपक्षी दलों पर UCC के बहाने मुसलमानों को भड़काने का भी आरोप लगाया. पीएम के बयान के बाद अब यूसीसी को लेकर AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने अपनी प्रतिक्रिया दी है. ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल बोर्ड ने मंगलवार देर रात पीएम मोदी के UCC पर दिए बयान के बाद ऑनलाइन इमरजेंसी बैठक की. इसमें UCC के विरोध का फैसला लिया गया है. मीटिंग में बोर्ड अध्यक्ष सैफुल्ला रहमानी मौलाना खालिद रशीदी फिरंगी महली और बोर्ड के सदस्य और कानूनी जानकर शमिल हुए. बैठक में फैसला लिया गया कि लॉ कमीशन के सामने UCC को लेकर वे अपना पक्ष रखेंगे और कागजात भी पेश करेंगे. हालांकि इससे पहले भी मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के अलावा अन्य मुस्लिम संगठन यूसीसी का विरोध कर चुके हैं.
पीएम नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में कहा- भारत के मुसलमानों को यह समझना होगा कि कौन से राजनीतिक दल ऐसा कर रहे हैं. एक घर में एक सदस्य के लिए एक कानून हो और दूसरे के लिए दूसरा तो घर चल पायेगा क्या? तो ऐसी दोहरी व्यवस्था से देश कैसे चल पाएगा? ये लोग हम पर आरोप लगाते हैं. ये अगर मुसलमानों के सही हितैषी होते तो मुसलमान पीछे नहीं रहते. सुप्रीम कोर्ट बार-बार कह रहा है कि यूनिफॉर्म सिविल कोड लाओ लेकिन ये वोट बैंक के भूखे लोग ऐसा नहीं करना चाहते. उन्होंने कहा- वोट बैंक के भूखे लोग मुस्लिम बहनों का बहुत नुकसान कर रहे हैं. तीन तलाक से नुकसान सिर्फ बेटियों का ही नहीं बल्कि इसका दायरा इससे कहीं बड़ा है. इससे पूरे परिवार तबाह हो जाते हैं. अगर तीन तलाक कहकर किसी बेटी को कोई निकाल दे तो उसके पिता का क्या होगा, भाई का क्या होगा, पूरे परिवार इससे तबाह हो जाते हैं. तीन तलाक का इस्लाम में इतना ही अपरिहार्य होता तो कतर, जॉर्डन, बांग्लादेश, पाकिस्तान और इंडोनेशिया जैसे देशों में इसको क्यों प्रतिबंधित कर दिया. मिस्र ने आज से 90 साल पहले इसको खत्म कर दिया था. अगर इस्लाम से इसका संबंध होता तो इस्लामिक देश इसे क्यों खत्म करते. तीन तलाक का फंदा लटका कर कुछ लोग मुस्लिम बहनों पर अत्याचार की खुली छूट चाहते हैं.
- तीन तलाक के खिलाफ कानून बना, लेकिन उसका कोई फर्क नहीं पड़ा, महिलाओं पर शोषण और बढ़ गया.
- अगर कानून बनाना है तो उन मर्दों के खिलाफ बनाएं, जो अपनी पत्नी को छोड़ देते हैं.
- यूनिफॉर्म सिविल कोड से सिर्फ मुसलमानों को नहीं बल्कि अन्य धर्म के लोगों को भी नुकसान है.
- अगर UCC लागू होता है तो मुसलमानों के पारिवारिक मामलों पर यह कानून असर डालेगा.

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